खाटू श्याम मंदिर क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार ने ₹87.87 करोड़ की परियोजना मंजूर की है। पर्यटन मंत्रालय की सूची में इसे वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत स्वीकृत ‘श्री खाटू श्याम जी मंदिर, सीकर में विकास कार्य’ के रूप में दर्ज किया गया है।
सरकारी सूची में परियोजना का नाम और स्वीकृत राशि स्पष्ट है, लेकिन हर निर्माण कार्य, उसकी मौजूदा प्रगति और पूरा होने की तारीख का अलग विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए ₹87.87 करोड़ मंजूर होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी सुविधाएं बनकर तैयार हो चुकी हैं।
स्वदेश दर्शन 2.0 में किस तरह के काम होते हैं?
पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन योजना के दूसरे चरण को किसी एक पर्यटन स्थल के संपूर्ण विकास पर केंद्रित किया है। इसमें केवल सजावट या भवन निर्माण नहीं, बल्कि यात्री अनुभव, स्वच्छता, पहुंच, स्थानीय रोजगार, डिजिटल जानकारी और लंबे समय तक सुविधाओं के रखरखाव को भी महत्व दिया जाता है।
खाटू में सामान्य दिनों और एकादशी या फाल्गुन मेले की भीड़ में बड़ा अंतर रहता है। ऐसी जगह पर सड़क, पार्किंग, पैदल मार्ग, शौचालय, पेयजल और भीड़ नियंत्रण से जुड़े काम श्रद्धालुओं के अनुभव पर सीधा असर डालते हैं। परियोजना की अंतिम कार्यसूची सामने आने पर ही पता चलेगा कि इनमें से कौन-कौन से काम ₹87.87 करोड़ के स्वीकृत पैकेज में शामिल हैं।
खाटू में पहले भी केंद्र की परियोजना रही है
स्वदेश दर्शन के पुराने चरण में राजस्थान के कृष्ण सर्किट के लिए ₹75.80 करोड़ की परियोजना स्वीकृत हुई थी। उसमें जयपुर का गोविंद देवजी मंदिर, सीकर का खाटू श्याम मंदिर और राजसमंद का नाथद्वारा शामिल थे। नई ₹87.87 करोड़ की परियोजना केवल खाटू श्याम मंदिर, सीकर के विकास कार्यों के नाम से अलग सूचीबद्ध है।
इसलिए दोनों राशियों को जोड़कर एक ही वर्तमान परियोजना बताना सही नहीं होगा। पुराना कृष्ण सर्किट और स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत स्वीकृत नई परियोजना अलग-अलग सरकारी प्रविष्टियां हैं।
श्रद्धालुओं को बदलाव कब दिखाई देगा?
मंजूरी के बाद विस्तृत योजना, निविदा, निर्माण और काम पूरा होने के चरण आते हैं। किसी नई पार्किंग, प्रवेश मार्ग, यात्री सुविधा या दूसरी सेवा को चालू मानने से पहले उसके उद्घाटन अथवा प्रशासनिक सूचना का इंतजार करना होगा।
₹87.87 करोड़ की मंजूरी खाटू के बढ़ते धार्मिक पर्यटन को सरकार द्वारा दी गई प्राथमिकता दिखाती है। अब परियोजना की गुणवत्ता इस बात से मापी जाएगी कि निर्माण पूरा होने के बाद भीड़ वाले दिनों में यात्रियों और स्थानीय निवासियों को वास्तविक सुविधा कितनी मिलती है।
स्रोत: पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन परियोजनाओं की आधिकारिक सूची