हनुमान जयंती पूजा विधि


हनुमान जयंती (हनुमान जन्मोत्सव) उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है। दक्षिण भारत में यह अलग तिथियों पर — जैसे तमिलनाडु में मार्गशीर्ष अमावस्या और आंध्र-तेलंगाना में वैशाख में — मनाई जाती है, और कई जगह कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (छोटी दिवाली) को भी हनुमान जयंती मानी जाती है। मान्यता है कि हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के समय हुआ, इसलिए मुख्य पूजा सुबह होती है।
हनुमान जयंती पर क्या विशेष करें
- सूर्योदय से पहले स्नान करके सुबह ही पूजा आरंभ करें।
- मंदिर में सिंदूर-चमेली के तेल का चोला चढ़ाएँ या चढ़वाएँ।
- सुंदरकांड या हनुमान चालीसा के 108 पाठ (परिवार या मंडली मिलकर)।
- भंडारा, प्रसाद वितरण और ज़रूरतमंदों को भोजन — सेवा हनुमान जी की सबसे प्रिय उपासना है।
हनुमान जयंती पूजा सामग्री
- हनुमान जी और श्रीराम दरबार का चित्र, लाल कपड़ा, चौकी
- सिंदूर, चमेली का तेल, लाल लंगोट/वस्त्र, जनेऊ
- लाल फूल, गेंदे की माला, तुलसी दल
- भोग: बूँदी के लड्डू, बेसन लड्डू, गुड़-चना, इमरती/जलेबी, केले, पान
- घी या चमेली के तेल का दीपक, धूप, ध्वजा (लाल झंडा — घर की छत या मंदिर पर चढ़ाने के लिए)
हनुमान जयंती पूजा विधि — चरणबद्ध
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और लाल/केसरिया वस्त्र।
- व्रत का संकल्प — एक समय फलाहार या मीठा भोजन।
- राम दरबार पूजा: पहले श्रीराम, सीता, लक्ष्मण का पूजन करें — राम भक्ति के बिना हनुमान पूजा अधूरी मानी जाती है।
- हनुमान जी का अभिषेक (प्रतिमा हो तो जल से), फिर सिंदूर-चमेली का चोला, जनेऊ, वस्त्र और माला।
- दीपक जलाएँ — कई भक्त इस दिन 11 या 21 दीपक जलाते हैं।
- पाठ: हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान अष्टक या पूरा सुंदरकांड।
- मंत्र: “ॐ हं हनुमते नमः” या “मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥”
- भोग: लड्डू, गुड़-चना, केले, पान का बीड़ा।
- ध्वजा: लाल झंडा (जिस पर “राम” या हनुमान जी अंकित हों) घर की छत या मंदिर पर लगाने की परंपरा है।
- आरती “आरती कीजै हनुमान लला की” और प्रसाद / भंडारा।
हनुमान जन्म की कथा
हनुमान जी वानरराज केसरी और माता अंजना के पुत्र हैं और पवन देव के आशीर्वाद से जन्मे, इसलिए पवनपुत्र, केसरीनंदन और अंजनीपुत्र कहलाते हैं। बचपन में उन्होंने उगते सूर्य को फल समझकर निगलने के लिए छलाँग लगाई थी। इंद्र के वज्र से उनकी ठोड़ी (हनु) पर चोट लगी — तभी से वे “हनुमान” कहलाए। पवन देव के रूठने पर सभी देवताओं ने हनुमान जी को अमरता, असीम बल और बुद्धि के वरदान दिए।
राजस्थान में हनुमान जयंती
सालासर बालाजी में चैत्र पूर्णिमा पर विशाल मेला लगता है, और मेहंदीपुर बालाजी में भी भारी भीड़ रहती है। खाटू श्याम जी से सालासर की दूरी और रास्ता खाटू से सालासर रूट गाइड में देखें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हनुमान जयंती कब मनाई जाती है? (When is Hanuman Jayanti?)
उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा को; कई जगह कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को भी, और दक्षिण भारत में क्षेत्र के अनुसार अलग तिथियों पर।
हनुमान जयंती की पूजा किस समय करें? (What time for the puja?)
मान्यता है कि हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के समय हुआ, इसलिए मुख्य पूजा सुबह की जाती है।
हनुमान जयंती पर क्या भोग लगाएँ? (What bhog on Hanuman Jayanti?)
बूँदी या बेसन के लड्डू, गुड़-चना, इमरती, केले और पान का बीड़ा।
हनुमान जी का नाम हनुमान क्यों पड़ा? (Why the name Hanuman?)
बचपन में सूर्य की ओर छलाँग लगाने पर इंद्र के वज्र से उनकी ठोड़ी (हनु) पर चोट लगी, इसलिए वे हनुमान कहलाए।
हनुमान जयंती और हनुमान जन्मोत्सव में अंतर है? (Jayanti vs Janmotsav?)
दोनों एक ही पर्व हैं; कई भक्त “जन्मोत्सव” शब्द पसंद करते हैं क्योंकि हनुमान जी को चिरंजीवी माना जाता है।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।