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विश्वकर्मा पूजा विधि

📅 22 अगस्त 2026 ⏱️ 4 मिनट पढ़ने का समय
विश्वकर्मा पूजा विधि के लिए सजी पूजा चौकी और प्रमुख सामग्री

विश्वकर्मा पूजा देवताओं के शिल्पकार और सृष्टि के प्रथम इंजीनियर माने जाने वाले भगवान विश्वकर्मा के सम्मान में मनाई जाती है। यह हिंदू तिथि से नहीं, बल्कि सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश (कन्या संक्रांति) पर होती है, इसलिए लगभग हर वर्ष 17 सितंबर (कभी 16 या 18) को पड़ती है। कारखानों, वर्कशॉप, दफ़्तरों और घरों में औज़ारों, मशीनों और वाहनों की पूजा की जाती है। उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में दीपावली के अगले दिन (गोवर्धन के दिन) भी विश्वकर्मा पूजा होती है।

📅 विश्वकर्मा पूजा 2026 कब है? गुरुवार, 17 सितंबर 2026   ✅ इस वर्ष यह पर्व बीत चुका है — अगले वर्ष की तिथि जल्द अपडेट होगी

कन्या संक्रांति के दिन; सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश से तय होती है। सभी व्रत-त्योहार: हिंदू कैलेंडर →

भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित — पौराणिक मान्यता

  • स्वर्ग लोक और इंद्रपुरी
  • भगवान कृष्ण की द्वारका नगरी
  • पांडवों का इंद्रप्रस्थ (मय दानव के साथ जोड़कर भी वर्णित)
  • रावण की सोने की लंका (मूल रूप में कुबेर के लिए)
  • भगवान शिव का त्रिशूल, विष्णु का सुदर्शन चक्र, पुष्पक विमान

पूजा सामग्री

  • भगवान विश्वकर्मा का चित्र या मूर्ति (हाथ में औज़ार, हंस/हाथी वाहन)
  • रोली, हल्दी, अक्षत, मौली, फूल-माला, धूप, दीपक, कपूर
  • कलश, नारियल, सुपारी, पान के पत्ते
  • भोग: फल, मिठाई, बूंदी, पंचमेवा
  • मशीन/औज़ार/वाहन के लिए: साफ़ कपड़ा, रोली-अक्षत, फूल, मौली

पूजा विधि — चरणबद्ध

  1. सफ़ाई: एक दिन पहले वर्कशॉप, दफ़्तर, मशीनें, औज़ार और वाहन अच्छी तरह साफ़ करें।
  2. स्थापना: पूजा के दिन स्नान कर चौकी पर वस्त्र बिछाएँ, विश्वकर्मा जी का चित्र और कलश स्थापित करें।
  3. संकल्प: हाथ में जल-अक्षत लेकर कार्य में उन्नति, सुरक्षा और कौशल की प्रार्थना के साथ संकल्प लें।
  4. गणेश पूजन: पहले गणेश जी का पूजन करें — गणेश पूजा विधि।
  5. विश्वकर्मा पूजन: रोली, अक्षत, फूल, माला अर्पित कर दीपक-धूप जलाएँ।
  6. मंत्र: “ॐ विश्वकर्मणे नमः” का जप करें।
  7. औज़ार व मशीन पूजा: हर मशीन, औज़ार, कंप्यूटर और वाहन पर रोली-अक्षत का तिलक लगाएँ, मौली बाँधें और फूल चढ़ाएँ।
  8. हवन (वैकल्पिक): बड़े कारखानों में छोटा हवन किया जाता है।
  9. आरती व प्रसाद: आरती करके सभी कर्मचारियों और कारीगरों में प्रसाद बाँटें।
  10. विश्राम: परंपरा में इस दिन मशीनें और औज़ार नहीं चलाए जाते — पूजा के बाद काम बंद रखा जाता है।

कहाँ विशेष रूप से मनाई जाती है

पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, असम और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में यह बड़ा उत्सव है — कारखानों में पंडाल लगते हैं और बंगाल में पतंगबाज़ी की परंपरा भी है। टैक्सी, ऑटो और ट्रक चालक अपने वाहनों को सजाकर पूजा करते हैं।

ध्यान रखें

  • ✅ पूजा के बाद मशीन चालू करने से पहले मौली, फूल और कपूर-दीपक हटा दें — आग और उलझने का खतरा रहता है।
  • ✅ वाहन पूजा में नारियल फोड़ने के बाद टुकड़े सड़क से हटा दें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्वकर्मा पूजा कब होती है? (When is Vishwakarma Puja?)

कन्या संक्रांति पर, जो लगभग हर वर्ष 17 सितंबर (कभी 16 या 18) को पड़ती है।

विश्वकर्मा पूजा हर साल 17 सितंबर को ही क्यों होती है? (Why fixed date?)

क्योंकि यह चंद्र तिथि नहीं, बल्कि सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश से तय होती है, जो सौर कैलेंडर में लगभग एक ही तारीख को आता है।

विश्वकर्मा पूजा में किसकी पूजा होती है? (What is worshipped?)

भगवान विश्वकर्मा के साथ औज़ार, मशीनें, कंप्यूटर, वाहन और कार्यस्थल की पूजा होती है।

क्या विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीन चला सकते हैं? (Can we use machines that day?)

परंपरा में पूजा के दिन मशीनों और औज़ारों को विश्राम दिया जाता है; ज़रूरी सेवाएँ अपवाद हैं।

विश्वकर्मा जी का मंत्र क्या है? (Vishwakarma mantra)

सरल मंत्र “ॐ विश्वकर्मणे नमः” है, जिसका 108 बार जप किया जा सकता है।

यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।

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