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करवा चौथ पूजा विधि

📅 21 अगस्त 2026 ⏱️ 6 मिनट पढ़ने का समय
करवा चौथ पूजा विधि के लिए सजी पूजा चौकी और प्रमुख सामग्री

करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को रखा जाने वाला सुहागिन महिलाओं का व्रत है, जिसमें पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखा जाता है। शाम को माता गौरी (करवा माता), भगवान शिव, श्री गणेश और कार्तिकेय की पूजा होती है और रात को चाँद को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। नीचे घर पर करने की पूरी, चरणबद्ध विधि दी गई है।

📅 करवा चौथ 2026 कब है? गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026   ⏳ कल है

इस पेज पर घर पर की जाने वाली पूरी पूजा विधि है। शुभ मुहूर्त, तिथि का समय और सही तारीख की पूरी जानकारी के लिए देखें: करवा चौथ 2026 — चाँद निकलने का समय →

करवा चौथ व्रत का क्रम — एक नज़र में

समय क्या करें
सूर्योदय से पहले स्नान, सरगी ग्रहण और व्रत का संकल्प
दिन भर परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत; पूजा की तैयारी और श्रृंगार
शाम (पूजा मुहूर्त) करवा माता / गौरी पूजा, व्रत कथा, थाली फेरना, बाया देना
चंद्रोदय के बाद छलनी से चंद्र दर्शन, अर्घ्य, पति का दर्शन और पारण

अपने शहर में चाँद निकलने का समय करवा चौथ 2026 पेज पर 20 शहरों की सूची में देखें।

करवा चौथ पूजा सामग्री

  • करवा — मिट्टी या पीतल का टोंटीदार लोटा (पूजा के लिए एक, कई घरों में सास के लिए दूसरा)
  • करवे के ढक्कन पर रखने के लिए चावल या शक्कर, और करवे में जल
  • माता गौरी का चित्र या मिट्टी से बनी गौरी, या करवा चौथ का कैलेंडर
  • छलनी, घी का दीपक, रुई की बत्ती
  • रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, मौली, फूल, दूर्वा
  • सुहाग सामग्री — चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, लाल चुनरी
  • मिठाई / मठरी / फल, और बाया (सास को देने के लिए मिठाई, मेवे, कपड़े या दक्षिणा)
  • पूजा की थाली और चौकी के लिए लाल कपड़ा

करवा चौथ पूजा विधि — चरणबद्ध

1. सरगी और संकल्प (सूर्योदय से पहले)

सूर्योदय से पहले स्नान करके सास द्वारा दी गई सरगी (फेनी, मेवे, फल, मिठाई) ग्रहण करें और पानी पी लें। फिर हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प लें:

“मम सुख-सौभाग्य-पुत्र-पौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।”
(सरल भाव: अपने सुहाग, परिवार के सुख और सौभाग्य के लिए मैं करवा चौथ का व्रत करूँगी।)

2. दिन में

परंपरा में यह व्रत निर्जला रखा जाता है। गर्भवती, बीमार या दवा लेने वाली महिलाएँ डॉक्टर की सलाह से जल या फल ले सकती हैं — व्रत का भाव श्रद्धा है, शरीर को कष्ट देना नहीं। दोपहर बाद पूजा स्थान साफ करें और श्रृंगार करें।

3. पूजा की तैयारी

उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ। दीवार पर करवा चौथ का चित्र लगाएँ या मिट्टी की गौरी स्थापित करें। करवे में जल भरकर मौली बाँधें, रोली से स्वास्तिक बनाएँ, ढक्कन पर चावल/शक्कर और ऊपर दीपक रखें।

4. शाम की पूजा

  1. सबसे पहले श्री गणेश का ध्यान करें — “ॐ गं गणपतये नमः”।
  2. माता गौरी को रोली, अक्षत, फूल, सुहाग सामग्री और चुनरी अर्पित करें, फिर भगवान शिव और कार्तिकेय की पूजा करें।
  3. करवे पर रोली-अक्षत लगाएँ और दीपक जलाएँ।
  4. गौरी मंत्र का पाठ करें: “नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संततिं शुभाम्। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥”
  5. महिलाएँ मिलकर बैठें और करवा चौथ की व्रत कथा सुनें या पढ़ें (नीचे संक्षेप में)।
  6. थाली फेरना: पूजा की थालियाँ सात बार एक-दूसरे को घुमाकर दी जाती हैं, साथ में पारंपरिक गीत गाया जाता है।
  7. सास या घर की बड़ी महिला को बाया देकर पैर छुएँ और आशीर्वाद लें।

5. चंद्र दर्शन, अर्घ्य और पारण

  1. चाँद निकलने पर छत या खुले स्थान पर जाएँ। दीपक वाली थाली और जल भरा करवा साथ रखें।
  2. छलनी में दीपक रखकर उससे चंद्रमा के दर्शन करें, फिर उसी छलनी से पति का दर्शन करें।
  3. करवे से चंद्रमा को अर्घ्य दें और मन में कहें “ॐ सोमाय नमः”। रोली-अक्षत अर्पित करके परिवार की मंगलकामना करें।
  4. पति के हाथ से जल पीकर और मिठाई का पहला निवाला लेकर व्रत खोलें। उसके बाद सात्विक भोजन करें।

करवा चौथ व्रत कथा (संक्षेप में)

प्रचलित कथा के अनुसार साहूकार की बेटी वीरावती सात भाइयों की इकलौती बहन थी। विवाह के बाद पहले करवा चौथ पर वह भूख-प्यास से व्याकुल हो गई। बहन की हालत देखकर भाइयों ने पेड़ के पीछे दीपक जलाकर छलनी की ओट से उसे नकली चाँद दिखा दिया। वीरावती ने व्रत खोल लिया और उसी समय उसके पति के अस्वस्थ होने का समाचार आया। दुःखी वीरावती ने पूरे वर्ष श्रद्धा से चतुर्थी व्रत किए और अगले करवा चौथ पर विधि-विधान से व्रत पूरा किया। माता गौरी की कृपा से उसका सुहाग फिर सुरक्षित हुआ। कथा का संदेश है — व्रत का पालन श्रद्धा और धैर्य से पूरा करना चाहिए।

क्या करें और क्या न करें

  • ✅ सरगी सूर्योदय से पहले ही लें; पूजा में लाल या पीले रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  • ✅ चाँद न दिखे (बादल हों) तो अपने शहर के चंद्रोदय समय के बाद पूर्व दिशा में अर्घ्य देकर व्रत खोलें, या घर की परंपरा मानें।
  • ❌ पूजा से पहले व्रत न तोड़ें; कई परिवारों में इस दिन कैंची-सुई से काम वर्जित माना जाता है।
  • ❌ स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ न करें — ज़रूरत हो तो जल या फल लेना दोष नहीं है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करवा चौथ पर सरगी कब खानी चाहिए? (When should sargi be eaten?)

सरगी सूर्योदय से पहले, ब्रह्म मुहूर्त में खाई जाती है। उसके बाद संकल्प लेकर व्रत शुरू होता है।

करवा चौथ में किस देवी-देवता की पूजा होती है? (Which deities are worshipped?)

माता गौरी (करवा माता), भगवान शिव, श्री गणेश और कार्तिकेय की पूजा होती है, और रात को चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।

छलनी से चाँद क्यों देखा जाता है? (Why is the moon seen through a sieve?)

परंपरा में छलनी में दीपक रखकर पहले चंद्रमा और फिर पति का दर्शन किया जाता है। यह वीरावती की कथा से जुड़ी मान्यता है।

थाली कितनी बार फेरी जाती है? (How many times is the thali rotated?)

अधिकतर परिवारों में पूजा की थाली सात बार फेरी जाती है, साथ में पारंपरिक गीत गाया जाता है।

क्या अविवाहित लड़कियाँ करवा चौथ रख सकती हैं? (Can unmarried girls keep the fast?)

कई परिवारों में अविवाहित लड़कियाँ मनचाहे जीवनसाथी के लिए व्रत रखती हैं और तारों को देखकर व्रत खोलती हैं। यह पारिवारिक परंपरा पर निर्भर है।

यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।

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