मकर संक्रांति पूजा विधि


मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत मानी जाती है। यह सूर्य आधारित पर्व है, इसलिए लगभग हर वर्ष 14 या 15 जनवरी को आता है। इस दिन पुण्य काल में स्नान, सूर्य को अर्घ्य, तिल-गुड़ का दान और खिचड़ी का विशेष महत्व है। देश भर में यह पोंगल, उत्तरायण, लोहड़ी, बिहू और खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है।
📅 मकर संक्रांति 2027 कब है? शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 ⏳ 79 दिन बाकी
इस पेज पर घर पर की जाने वाली पूरी पूजा विधि है। शुभ मुहूर्त, तिथि का समय और सही तारीख की पूरी जानकारी के लिए देखें: मकर संक्रांति 2027 कब है? →
मकर संक्रांति 2027 की तारीख और पुण्य काल मकर संक्रांति 2027 पेज पर देखें।
पूजा और दान सामग्री
- ताँबे का लोटा, जल, लाल चंदन, लाल फूल, अक्षत, गुड़ (सूर्य अर्घ्य के लिए)
- काले और सफेद तिल, गुड़, तिल के लड्डू / गजक / रेवड़ी
- खिचड़ी के लिए चावल और उड़द/मूंग की दाल, घी
- दान के लिए: तिल, गुड़, कंबल, गर्म वस्त्र, अन्न
मकर संक्रांति पूजा विधि — चरणबद्ध
- पुण्य काल स्नान: पवित्र नदी में या घर पर पानी में गंगाजल और थोड़े काले तिल मिलाकर स्नान करें।
- सूर्य अर्घ्य: ताँबे के लोटे में जल, लाल चंदन, लाल फूल, अक्षत और थोड़ा गुड़-तिल डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें — “ॐ घृणि सूर्याय नमः”।
- स्तुति: समय हो तो आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य के 12 नामों का पाठ करें।
- विष्णु पूजा: भगवान विष्णु को तिल अर्पित करें। मान्यता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर (मकर राशि) जाते हैं।
- भोग: तिल-गुड़ के लड्डू और खिचड़ी का भोग लगाएँ।
- दान: पुण्य काल में तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल और गर्म कपड़े का दान करें।
- भोजन: खिचड़ी और तिल-गुड़ परिवार के साथ ग्रहण करें।
देश भर में मकर संक्रांति
| क्षेत्र | नाम | विशेष |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश, बिहार | खिचड़ी | खिचड़ी दान |
| राजस्थान, गुजरात | संक्रांत / उत्तरायण | पतंगबाज़ी, तिल-पट्टी, सुहागिनों द्वारा 14 वस्तुओं का दान |
| पंजाब, हरियाणा | लोहड़ी (एक दिन पहले) / माघी | अलाव, रेवड़ी-मूंगफली |
| तमिलनाडु | पोंगल | नई फसल से पोंगल पकाना |
| असम | भोगाली बिहू | सामूहिक भोज |
संक्रांति का महत्व
उत्तरायण को देवताओं का दिन माना गया है — महाभारत में भीष्म पितामह ने देह त्याग के लिए उत्तरायण की प्रतीक्षा की थी। इसी दिन गंगासागर में स्नान-मेला और प्रयागराज में माघ मेले का प्रमुख स्नान होता है।
ध्यान रखें
- ✅ पतंग उड़ाते समय चाइनीज़ / धातु वाले माँझे का प्रयोग न करें — इससे पक्षियों और लोगों की जान जाती है।
- ✅ स्नान-दान पुण्य काल में ही करें।
इस पूजा से जुड़े उपयोगी पृष्ठ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मकर संक्रांति पर क्या दान करें? (What to donate?)
तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल, गर्म वस्त्र और घी का दान विशेष शुभ माना जाता है।
मकर संक्रांति पर तिल क्यों खाते हैं? (Why eat sesame?)
सर्दी में तिल-गुड़ ऊर्जा देते हैं, और धार्मिक मान्यता में तिल का दान-सेवन सूर्य व शनि से जुड़ा शुभ कर्म है।
मकर संक्रांति हर साल 14 या 15 जनवरी को क्यों आती है? (Why 14/15 January?)
क्योंकि यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश पर आधारित है, जो सौर वर्ष के अनुसार लगभग इन्हीं दिनों होता है।
सूर्य को अर्घ्य कैसे दें? (How to offer arghya?)
ताँबे के लोटे में जल, लाल चंदन, फूल और अक्षत डालकर उगते सूर्य को “ॐ घृणि सूर्याय नमः” बोलते हुए अर्घ्य दें।
मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों बनाते हैं? (Why khichdi?)
नई फसल के चावल-दाल की खिचड़ी का भोग और दान इस पर्व की परंपरा है।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।