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भाई दूज पूजा विधि

📅 21 अगस्त 2026 ⏱️ 5 मिनट पढ़ने का समय
भाई दूज पूजा विधि के लिए सजी पूजा चौकी और प्रमुख सामग्री

भाई दूज (यम द्वितीया) कार्तिक शुक्ल द्वितीया को, दीपोत्सव के पाँचवें दिन मनाया जाता है। इस दिन बहन भाई को तिलक लगाकर, आरती उतारकर और भोजन कराकर उसकी लंबी आयु की कामना करती है, और भाई बहन को उपहार देकर उसकी रक्षा का वचन देता है। तिलक अपराह्न काल (दोपहर बाद) में करने की परंपरा है।

📅 भाई दूज 2026 कब है? बुधवार, 11 नवंबर 2026   ⏳ 14 दिन बाकी

इस पेज पर घर पर की जाने वाली पूरी पूजा विधि है। शुभ मुहूर्त, तिथि का समय और सही तारीख की पूरी जानकारी के लिए देखें: भाई दूज 2026 — तिलक मुहूर्त →

2026 में भाई दूज की तारीख और तिलक का शुभ समय भाई दूज 2026 पेज पर देखें।

भाई दूज पूजा सामग्री

  • आरती की थाली — रोली, अक्षत, कुमकुम, हल्दी, दीपक (घी का)
  • मौली (कलावा), नारियल (गोला), सुपारी, पान
  • मिठाई, सूखे मेवे, फल; कई क्षेत्रों में बताशे और मिश्री
  • भाई के बैठने के लिए आसन या चौकी, और सिर ढकने के लिए रूमाल
  • उत्तर भारत के कई घरों में आँगन में आटे/चावल से चौक बनाने की सामग्री
  • भाई के लिए भोजन — विशेषकर बहन के हाथ का बना

भाई दूज पूजा विधि — चरणबद्ध

1. सुबह — यमुना और यमराज का स्मरण

बहन सुबह स्नान करके यमुना जी और यमराज का स्मरण करती है। जहाँ संभव हो, भाई-बहन साथ में यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं। कई परिवारों में इस दिन यम, यमुना और चित्रगुप्त की पूजा की जाती है — कायस्थ परिवार इसी दिन चित्रगुप्त पूजा और कलम-दवात की पूजा करते हैं।

2. चौक और आसन

आँगन या पूजा स्थान पर आटे या चावल से चौक बनाएँ। उस पर पीढ़ा या आसन रखें। भाई को पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठाएँ और उसके सिर पर रूमाल रखें।

3. तिलक और आरती (अपराह्न काल में)

  1. बहन पहले श्री गणेश का ध्यान करे।
  2. भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएँ। कई क्षेत्रों में केसर, चंदन या दही-चावल का तिलक भी होता है।
  3. भाई के हाथ में कलावा बाँधें और हाथ में नारियल, पान, सुपारी, मिठाई रखें।
  4. दीपक से भाई की आरती उतारें और उसकी लंबी आयु, स्वास्थ्य और उन्नति की प्रार्थना करें।
  5. प्रचलित भाव-वचन: “गंगा पूजे यमुना को, यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजे कृष्ण को, मैं पूजूँ अपने भाई को — जैसे-जैसे गंगा-यमुना का पानी बढ़े, वैसे-वैसे मेरे भाई की आयु बढ़े।”
  6. भाई को मिठाई खिलाएँ।

4. भोजन और उपहार

इस दिन भाई बहन के घर जाकर उसके हाथ का बना भोजन करता है — यही परंपरा का केंद्र है। भोजन के बाद भाई बहन के पैर छूकर (या बहन छोटी हो तो आशीर्वाद देकर) उपहार या शगुन देता है।

भाई दूज की कथा

सूर्य देव की संतान यमराज और यमुना भाई-बहन थे। यमुना बार-बार भाई को अपने घर भोजन के लिए बुलाती थीं, पर यमराज व्यस्तता के कारण नहीं जा पाते थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज बहन के घर पहुँचे। यमुना ने उनका तिलक किया, आरती उतारी और प्रेम से भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन बहन के घर जाकर उसके हाथ का भोजन करेगा और तिलक कराएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। इसीलिए इसे यम द्वितीया कहते हैं। एक अन्य मान्यता में नरकासुर वध के बाद श्रीकृष्ण का सुभद्रा ने इसी दिन तिलक कर स्वागत किया था।

ध्यान रखें

  • ✅ भाई दूर हो तो उसकी फोटो को तिलक करके और फोन/वीडियो कॉल पर आरती करके भी परंपरा निभाई जाती है।
  • ✅ जिन बहनों के भाई नहीं हैं, वे चचेरे भाई या भाई-समान किसी व्यक्ति का तिलक कर सकती हैं।
  • ❌ तिलक से पहले बहन व्रत रखे या भोजन करे — यह घर की परंपरा पर निर्भर है; कोई एक नियम सब पर लागू नहीं।

रक्षाबंधन और भाई दूज का अंतर जानने के लिए रक्षाबंधन पूजा विधि भी देखें।

इस पूजा से जुड़े उपयोगी पृष्ठ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाई दूज पर तिलक कब करना चाहिए? (When should tilak be done?)

परंपरा में तिलक अपराह्न काल यानी दोपहर बाद किया जाता है। 2026 का सटीक समय भाई दूज 2026 पेज पर दिया गया है।

भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं? (Why is it called Yama Dwitiya?)

क्योंकि इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे और भाइयों को अकाल मृत्यु से मुक्ति का वरदान दिया था।

भाई दूज पर भाई को किस दिशा में बैठाएँ? (Which direction should the brother face?)

भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाना शुभ माना जाता है।

भाई दूर हो तो भाई दूज कैसे मनाएँ? (How to celebrate if the brother is away?)

भाई की फोटो पर तिलक करके, वीडियो कॉल पर आरती उतारकर और मिठाई भेजकर परंपरा निभाई जा सकती है।

भाई दूज पर चित्रगुप्त पूजा क्यों होती है? (Why is Chitragupta Puja done?)

कायस्थ समाज इस दिन यमराज के लेखाकार चित्रगुप्त जी की पूजा कलम-दवात के साथ करता है, क्योंकि यह यम द्वितीया का दिन है।

यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।

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