गोवर्धन पूजा और अन्नकूट विधि


गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को, दीपावली के बाद मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की स्मृति में गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजा, गौ पूजा और भगवान को अन्नकूट अर्पित किया जाता है।
📅 गोवर्धन 2026 कब है? मंगलवार, 10 नवंबर 2026 ⏳ 13 दिन बाकी
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गोवर्धन पूजा सामग्री
- ताज़ा गाय का गोबर (गोवर्धन की आकृति बनाने के लिए) — शहरों में मिट्टी या आटे से भी प्रतीकात्मक आकृति बनाई जाती है
- भगवान श्रीकृष्ण का चित्र, गाय-बछड़े की छोटी आकृतियाँ (गोबर या मिट्टी की)
- रोली, अक्षत, मौली, फूल, खील-बताशे, दीपक, धूप
- दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल
- अन्नकूट के लिए — कढ़ी-चावल, बाजरे की खिचड़ी, मिश्रित सब्ज़ी, पूरी, मिठाइयाँ, जितने व्यंजन बन सकें
- गौ पूजा के लिए गुड़, हरा चारा, रोटी, हल्दी-रोली, माला
गोवर्धन पूजा विधि — चरणबद्ध
1. गोवर्धन की आकृति बनाना
सुबह स्नान करके घर के आँगन या पूजा स्थान पर गोबर से लेटे हुए पुरुष के आकार में गोवर्धन पर्वत बनाएँ। नाभि के स्थान पर एक छोटा गड्ढा (कटोरी जैसा) रखें। आसपास गाय, बछड़े, ग्वाल-बाल और पेड़ों की छोटी आकृतियाँ बनाई जाती हैं। आकृति को फूल, खील और रुई से सजाएँ।
2. पूजा
- श्री गणेश का ध्यान करके संकल्प लें।
- गोवर्धन को जल, रोली, अक्षत, फूल और मौली अर्पित करें।
- नाभि वाले स्थान में दूध, दही, शहद, बताशे डालें और बीच में दीपक रखें।
- भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें — “गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक। विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रदो भव॥”
- धूप-दीप दिखाकर परिवार सहित गोवर्धन की सात परिक्रमा करें। परिक्रमा में जल की धार गिराते हुए और जौ बोते हुए चलने की परंपरा है।
3. अन्नकूट भोग
घर में बने सभी व्यंजनों को थालियों में सजाकर भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें। मंदिरों में छप्पन भोग लगता है, पर घर में जितने शुद्ध व्यंजन बन सकें वही पर्याप्त है। भोग के बाद प्रसाद परिवार, पड़ोसियों और ज़रूरतमंदों में बाँटें।
4. गौ पूजा
गाय और बछड़ों को नहलाकर हल्दी-रोली का तिलक लगाएँ, माला पहनाएँ और गुड़, रोटी व हरा चारा खिलाएँ। गाय की परिक्रमा करके आशीर्वाद लें। शहर में गौशाला जाकर सेवा या चारे का दान भी किया जा सकता है।
गोवर्धन पूजा की कथा
ब्रज में लोग हर वर्ष इंद्र देव की पूजा करते थे। बालक श्रीकृष्ण ने समझाया कि वर्षा और अन्न गोवर्धन पर्वत, वन और गायों से मिलता है, इसलिए उन्हीं की पूजा होनी चाहिए। ब्रजवासियों ने गोवर्धन की पूजा की तो इंद्र ने क्रोधित होकर मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। तब श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उँगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सात दिन तक पूरे ब्रज को उसके नीचे आश्रय दिया। इंद्र का अहंकार टूटा और उन्होंने क्षमा माँगी। यह कथा प्रकृति, गौ और अन्न के सम्मान का संदेश देती है।
ध्यान रखें
- ✅ गोबर उपलब्ध न हो तो मिट्टी या आटे से प्रतीकात्मक गोवर्धन बनाना भी पूर्णतः मान्य है।
- ✅ अन्नकूट का भोजन व्यर्थ न जाए — बचा प्रसाद बाँट दें।
- ❌ गोवर्धन पूजा अमावस्या वाले दिन नहीं, प्रतिपदा में होती है — तारीख देखकर ही करें।
इसी दिन कई क्षेत्रों में बलि प्रतिपदा भी मनाई जाती है, और अगले दिन भाई दूज है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोवर्धन पूजा में क्या बनाया जाता है? (What is made for Govardhan Puja?)
गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है और भगवान को अन्नकूट — कढ़ी-चावल, बाजरे की खिचड़ी, सब्ज़ियाँ, पूरी और मिठाइयाँ — अर्पित की जाती हैं।
गोवर्धन की परिक्रमा कितनी बार करें? (How many parikramas?)
घर में बने गोवर्धन की सात परिक्रमा करने की परंपरा है।
अन्नकूट और गोवर्धन पूजा में क्या अंतर है? (Difference between Annakut and Govardhan Puja?)
दोनों एक ही दिन के पर्व हैं — गोवर्धन पूजा पर्वत और गौ की पूजा है, और अन्नकूट उसी दिन भगवान को अर्पित किया जाने वाला अनेक व्यंजनों का भोग है।
शहर में गोबर न मिले तो क्या करें? (What if cow dung is not available?)
मिट्टी, आटे या चित्र से प्रतीकात्मक गोवर्धन बनाकर उसी विधि से पूजा की जा सकती है।
गोवर्धन पूजा किस भगवान की होती है? (Which deity is worshipped?)
भगवान श्रीकृष्ण (गिरिराज धरण), गोवर्धन पर्वत और गौ माता की पूजा होती है।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।