Home एकादशी कैलेंडर पापमोचिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

पापमोचिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक अप्रैल 9, 2026 (बृहस्पतिवार)
🗓️ तिथि चैत्र, कृष्ण एकादशी
⏰ प्रारम्भ अप्रैल 09, 03:39 AM
⏰ समाप्त अप्रैल 10, 03:46 AM

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में चैत्ररथ वन में मेधावी ऋषि तपस्या कर रहे थे। वे अत्यंत तेजस्वी और भगवान शिव के परम भक्त थे।

उसी वन में स्वर्ग की प्रसिद्ध अप्सरा मंजुघोषा भी रहती थी। कामदेव के कहने पर मंजुघोषा ने मेधावी ऋषि की तपस्या भंग करने का प्रयास किया। उसने अपने मधुर गायन और सौंदर्य से ऋषि का मन आकर्षित कर लिया।

मेधावी ऋषि उसकी मोह-माया में फंस गए और कई वर्षों तक उसके साथ समय व्यतीत करते रहे। जब उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने मंजुघोषा को पिशाचिनी होने का शाप दे दिया।

शाप से भयभीत होकर मंजुघोषा ने क्षमा याचना की। तब ऋषि ने बताया कि यदि वह चैत्र कृष्ण पक्ष की पापमोचिनी एकादशी का व्रत करे तो उसे शाप से मुक्ति मिल सकती है।

मंजुघोषा ने विधिपूर्वक पापमोचिनी एकादशी का व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से वह पिशाच योनि से मुक्त होकर पुनः अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त कर सकी।

बाद में मेधावी ऋषि ने भी अपने पापों के प्रायश्चित्त हेतु इस व्रत का पालन किया और उन्हें भी पापों से मुक्ति प्राप्त हुई।

यह कथा बताती है कि पापमोचिनी एकादशी का व्रत मनुष्य के बड़े से बड़े पापों का भी नाश करने में समर्थ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पापमोचिनी एकादशी किस महीने में आती है?
पापमोचिनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है।
पापमोचिनी एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
यह एकादशी पापों से मुक्ति, आत्मशुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है।
पापमोचिनी एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा मेधावी ऋषि और अप्सरा मंजुघोषा से संबंधित है।
क्या महिलाएं पापमोचिनी एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धा के साथ यह व्रत कर सकते हैं।
क्या पापमोचिनी एकादशी पर चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित पारण समय के भीतर करना चाहिए।
पापमोचिनी एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
समस्त पापों का नाश, मानसिक शांति, भगवान विष्णु की कृपा और मोक्ष की प्राप्ति।
इस दिन कौन-सा दान करना शुभ माना जाता है?
अन्न, वस्त्र, फल, दक्षिणा और जरूरतमंदों की सहायता करना शुभ माना जाता है।
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