योगिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी
पद्म पुराण के अनुसार स्वर्गलोक में भगवान कुबेर के उद्यान की देखभाल हेममाली नामक यक्ष करता था। उसका कार्य प्रतिदिन मानसरोवर से पुष्प लाकर भगवान शिव की पूजा के लिए प्रस्तुत करना था।
हेममाली अपनी पत्नी विशालाक्षी से अत्यधिक प्रेम करता था। एक दिन वह पत्नी के साथ समय बिताने में इतना व्यस्त हो गया कि भगवान शिव की पूजा के लिए पुष्प समय पर नहीं पहुंचा सका।
जब कुबेर को इस बात का पता चला तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने हेममाली को शाप दे दिया कि वह स्वर्ग से गिरकर पृथ्वी पर कोढ़ (कुष्ठ रोग) से पीड़ित होकर कष्टमय जीवन बिताए।
शाप के प्रभाव से हेममाली पृथ्वी पर आ गया और अनेक वर्षों तक दुख भोगता रहा।
एक दिन वह हिमालय पर्वत पर तपस्या कर रहे मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम पहुंचा। ऋषि ने उसकी दुःखभरी कथा सुनी और उसे आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।
हेममाली ने श्रद्धापूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से वह शाप और रोग से मुक्त हो गया तथा पुनः अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त कर स्वर्ग लौट गया।
यह कथा बताती है कि योगिनी एकादशी का व्रत गंभीर पापों और कष्टों से भी मुक्ति दिलाने की शक्ति रखता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी पर खाटू दर्शन की योजना?
पहले से होटल और टैक्सी बुक करें — एकादशी पर भारी भीड़ होती है।
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📚 सन्दर्भ एवं अधिक जानकारी
- Drik Panchang — Ekadashi Dates & Muhurat 2026 ↗ — Accurate tithi timings
- Sikar.rajasthan.gov.in — Official Govt Website ↗ — Sikar district official information
- Wikipedia — Ekadashi ↗ — Complete Ekadashi history