गुड़ी पड़वा पूजा विधि

गुड़ी पड़वा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को महाराष्ट्र और गोवा में मराठी नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से हिंदू नव संवत्सर (विक्रम संवत) और चैत्र नवरात्रि आरंभ होते हैं; कर्नाटक, आंध्र और तेलंगाना में यही दिन उगादि और सिंधी समाज में चेटीचंड के आसपास पड़ता है। घर के बाहर विजय और समृद्धि के प्रतीक “गुड़ी” को ऊँचा फहराया जाता है। “पड़वा” का अर्थ प्रतिपदा है।
📅 गुड़ी पड़वा 2027 कब है? बुधवार, 7 अप्रैल 2027 ⏳ 203 दिन बाकी
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा — 7 अप्रैल सुबह 5:21 से 8 अप्रैल सुबह 4:29 तक (जयपुर)। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि व नव संवत्सर। सभी व्रत-त्योहार: हिंदू कैलेंडर →
गुड़ी क्या है और कैसे बनाएँ
- एक लंबा बाँस का डंडा
- उसके ऊपरी सिरे पर बँधा रेशमी/ज़री वाला कपड़ा (पीला, हरा या लाल)
- नीम की टहनी और आम के पत्ते
- गाठी (शक्कर के हार) और फूलों की माला
- सबसे ऊपर उल्टा रखा चाँदी, ताँबे या पीतल का लोटा (कलश)
मान्यताएँ: गुड़ी को ब्रह्म ध्वज माना जाता है — कथा है कि ब्रह्मा जी ने इसी दिन सृष्टि की रचना की। इसे श्रीराम के 14 वर्ष बाद अयोध्या लौटने और छत्रपति शिवाजी महाराज की विजय से भी जोड़ा जाता है।
पूजा सामग्री
- गुड़ी की सामग्री (ऊपर), रंगोली के रंग, आम के पत्तों का तोरण
- हल्दी-कुमकुम, अक्षत, फूल, अगरबत्ती, दीपक
- नीम-गुड़ का प्रसाद: नीम की कोमल पत्तियाँ, गुड़, इमली, जीरा, अजवाइन, नमक
- नैवेद्य: पूरनपोली, श्रीखंड-पूरी, केशरी भात
पूजा विधि — चरणबद्ध
- अभ्यंग स्नान: सूर्योदय से पहले तेल-उबटन लगाकर स्नान करें, नए वस्त्र पहनें।
- घर की सजावट: द्वार पर आम के पत्तों का तोरण बाँधें और आँगन में रंगोली बनाएँ।
- गुड़ी स्थापना: सूर्योदय के बाद घर के मुख्य द्वार के दाहिनी ओर या खिड़की/छत पर गुड़ी ऊँची खड़ी करें ताकि दूर से दिखे।
- गुड़ी पूजन: गुड़ी को हल्दी-कुमकुम, अक्षत, फूल अर्पित करें; दीपक-अगरबत्ती जलाकर नैवेद्य लगाएँ।
- ब्रह्मा पूजन व संकल्प: नववर्ष के सुख-आरोग्य का संकल्प लें; पंचांग श्रवण करें (नए वर्ष का राजा-मंत्री, वर्षफल)।
- नीम-गुड़ ग्रहण: परिवार के सभी सदस्य नीम-गुड़ का मिश्रण खाएँ — जीवन में कड़वे-मीठे दोनों अनुभवों को स्वीकारने का प्रतीक; वसंत में स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माना जाता है।
- गुड़ी उतारना: सूर्यास्त से पहले हल्दी-कुमकुम, अक्षत अर्पित कर गुड़ी को सम्मान से उतारें; गाठी प्रसाद के रूप में बाँटें।
शोभा यात्राएँ और नववर्ष स्वागत
मुंबई के गिरगाँव, ठाणे, पुणे और नासिक में पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-ताशा और लेझिम के साथ नववर्ष स्वागत यात्राएँ निकलती हैं। इस दिन सोना, वाहन या नया घर खरीदना और नया व्यवसाय शुरू करना शुभ माना जाता है (साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक)।
इसी दिन से चैत्र नवरात्रि शुरू होती है — दुर्गा पूजा विधि और नवमी पर राम नवमी पूजा विधि देखें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुड़ी पड़वा कब मनाया जाता है? (When is Gudi Padwa?)
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को, जो प्रायः मार्च-अप्रैल में आती है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि शुरू होते हैं।
गुड़ी कहाँ और कब लगानी चाहिए? (Where and when to place Gudi?)
सूर्योदय के बाद घर के मुख्य द्वार के दाहिनी ओर, खिड़की या छत पर ऊँचाई पर; सूर्यास्त से पहले उतार लें।
गुड़ी पड़वा पर नीम क्यों खाते हैं? (Why eat neem?)
नीम-गुड़ का मिश्रण जीवन के कड़वे-मीठे अनुभवों को स्वीकारने का प्रतीक है और मौसम बदलने पर स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा माना जाता है।
गुड़ी पड़वा और उगादि में क्या अंतर है? (Gudi Padwa vs Ugadi)
दोनों एक ही दिन का नववर्ष है — महाराष्ट्र-गोवा में गुड़ी पड़वा और कर्नाटक, आंध्र, तेलंगाना में उगादि कहलाता है।
गुड़ी पड़वा पर क्या बनाते हैं? (Traditional food)
पूरनपोली, श्रीखंड-पूरी और नीम-गुड़ का प्रसाद।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।