कृष्ण जन्माष्टमी 2026 शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाई जाएगी। खाटू श्याम जी की कथा भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी होने के कारण इस दिन बाबा श्याम के भक्तों में भी विशेष उत्साह रहता है। शुक्रवार के बाद शनिवार और रविवार होने से इस बार कई परिवार तीन दिन की यात्रा बना सकते हैं।
खाटू मंदिर समिति की ओर से जन्माष्टमी के विशेष दर्शन समय या रात्रि कार्यक्रम की विस्तृत सूचना अभी सामने नहीं आई है। इसलिए लेख में किसी विशेष झांकी, श्रृंगार या पूरी रात दर्शन का दावा नहीं किया गया है। कार्यक्रम घोषित होने पर वही समय यात्रियों के लिए मान्य होगा।
खाटू श्याम और श्रीकृष्ण का संबंध
महाभारत की कथा में बर्बरीक को भगवान श्रीकृष्ण से ‘श्याम’ नाम का वरदान मिला था। इसी मान्यता के कारण भक्त बाबा श्याम को हारे के सहारे और श्रीकृष्ण के कलियुगी स्वरूप के रूप में पूजते हैं। जन्माष्टमी पर घरों और श्याम मंदिरों में भजन, कीर्तन और कृष्ण जन्म की झांकियां सजाई जाती हैं।
जन्माष्टमी और बाबा श्याम का जन्मोत्सव अलग पर्व हैं। बाबा श्याम का जन्मोत्सव कार्तिक शुक्ल एकादशी पर मनाया जाता है, जबकि जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से संबंधित है। दोनों को एक ही आयोजन बताना सही नहीं होगा।
शुक्रवार की जन्माष्टमी से सप्ताहांत तक बढ़ सकती है आवाजाही
दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बहुत से श्रद्धालु सप्ताहांत में खाटू पहुंचते हैं। इस बार जन्माष्टमी शुक्रवार को होने से 4 से 6 सितंबर के बीच सड़कों, कमरों और रींगस से खाटू जाने वाले वाहनों पर सामान्य दिनों से अधिक दबाव रह सकता है।
रेल से आने वालों के लिए रींगस जंक्शन प्रमुख स्टेशन है, जो मंदिर से करीब 17 किलोमीटर दूर है। रुणिचा एक्सप्रेस भी 24 सितंबर तक बदले मार्ग से रींगस होकर चल रही है। इससे दिल्ली और हरियाणा की ओर से आने वाले यात्रियों को इन दिनों एक सीधा रेल विकल्प मिला हुआ है।
एक दिन रुकने की योजना है तो कमरा पहले तय करें
शुक्रवार शाम पहुंचकर शनिवार को लौटने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ी तो उसी दिन कमरा मिलना कठिन हो सकता है। होटल या धर्मशाला चुनते समय मंदिर से सड़क दूरी और आने-जाने का रास्ता पूछ लेना पर्याप्त है। अपनी जरूरत के अनुसार खाटू के होटल और धर्मशालाओं की सूची देखी जा सकती है।
जन्माष्टमी की तारीख को लेकर अलग पंचांग परंपराओं में एक दिन का अंतर दिखाई दे सकता है, लेकिन 2026 में वैष्णव जन्माष्टमी का प्रमुख उत्सव 4 सितंबर को रखा गया है। खाटू मंदिर का विशेष कार्यक्रम जारी होते ही दर्शन का सही समय भी स्पष्ट हो जाएगा।
स्रोत: सितंबर 2026 पर्व कैलेंडर और खाटू श्याम यात्रा संबंधी स्थानीय जानकारी।