सीधे मुख्य जानकारी पर जाएँ
Home Blog Dhaniya Panjiri Recipe: जन्माष्टमी प्रसाद के लिए दानेदार धनिया पंजीरी बनाने की विधि
🙏 भक्ति एवं आध्यात्म

Dhaniya Panjiri Recipe: जन्माष्टमी प्रसाद के लिए दानेदार धनिया पंजीरी बनाने की विधि

पीतल की कटोरी में दानेदार धनिया पंजीरी, मखाना, मेवे और जन्माष्टमी पूजा की सजावट

Dhaniya Panjiri Recipe में सबसे जरूरी बात है कि साबुत
धनिया धीमी आंच पर अलग भुना जाए, मखाना और मेवे अलग-अलग कुरकुरे किए जाएं
और बूरा या पिसी मिश्री केवल पूरी तरह ठंडे मिश्रण में मिलाई जाए। इससे
जन्माष्टमी का पंजीरी प्रसाद सुगंधित, दानेदार और बिना चिपचिपाहट के बनता है।
नीचे दी मात्रा से लगभग 10–12 छोटी प्रसाद कटोरियां तैयार होती हैं। पूजा का
पूरा क्रम
जन्माष्टमी पूजा विधि
में देखें। पर्व की तिथि, व्रत और मुख्य जानकारी
कृष्ण जन्माष्टमी 2026
के मुख्य पृष्ठ पर उपलब्ध है।

धनिया पंजीरी उत्तर भारत में जन्माष्टमी भोग के रूप में लोकप्रिय है। इसमें
गेहूं का आटा नहीं डाला जाता; मुख्य स्वाद भुने धनिए, घी, बूरा, मखाने और
मेवों से आता है। अलग-अलग घरों में इसकी मात्रा बदलती है। कोई केवल धनिया,
घी और बूरा से बनाता है, जबकि कोई मखाना, नारियल, बादाम और काजू भी मिलाता
है। यहां ऐसी विधि दी गई है जिसमें धनिए का स्वाद साफ रहता है और मेवे उसे
बहुत भारी नहीं बनाते।

तैयारी लगभग 12 मिनट
भुनाई लगभग 20–25 मिनट
ठंडा होने का समय 20–30 मिनट
कुल मात्रा लगभग 550–600 ग्राम; 10–12 छोटी प्रसाद कटोरियां
मुख्य सावधानी गर्म मिश्रण में बूरा न मिलाएं और धनिया तेज आंच पर न जलाएं।

धनिया पंजीरी की सामग्री

  • साबुत धनिया — 1 कप, लगभग 90 ग्राम
  • मखाना — 2 कप, लगभग 40 ग्राम
  • सूखा नारियल कद्दूकस — 1/3 कप, लगभग 30 ग्राम
  • बादाम — 1/4 कप, लगभग 30 ग्राम
  • काजू — 1/4 कप, लगभग 30 ग्राम
  • खरबूजे के बीज — 2 बड़े चम्मच, लगभग 18 ग्राम; इच्छा अनुसार
  • देसी घी — 5 बड़े चम्मच, लगभग 65–70 ग्राम
  • बूरा या पिसी मिश्री — 3/4 कप, लगभग 140–150 ग्राम
  • इलायची पाउडर — 1 छोटा चम्मच
  • सूखी गुलाब पंखुड़ी — 1 बड़ा चम्मच; इच्छा अनुसार
मिठास का संतुलन: पहली बार बना रहे हों तो बूरा की पूरी
मात्रा एक साथ न डालें। आधा कप मिलाकर देखें, फिर आवश्यकता के अनुसार बाकी
बूरा मिलाएं। भोग के लिए चखने की पारिवारिक मनाही हो तो थोड़ी अलग परीक्षण
मात्रा बनाकर अनुपात समझ सकते हैं।

सामग्री तैयार करने से पहले ध्यान दें

धनिया साफ और ताजा होना चाहिए। पुराना धनिया भुनने पर भी सुगंध नहीं देता
और कभी-कभी हल्की बासी गंध ला सकता है। मखाने को तोड़कर अंदर देखें; उनमें
कीड़ा, काला भाग या नमी न हो। बादाम और काजू को भी सूंघकर देखें। मेवों की
बासी गंध तैयार पंजीरी में स्पष्ट महसूस होती है।

बूरा या मिश्री बिल्कुल सूखी हो। सामान्य पिसी चीनी भी उपयोग कर सकते हैं,
लेकिन बूरा से पंजीरी में हल्की दानेदार बनावट आती है। घी की मात्रा बहुत
कम करने से पंजीरी सूखी लग सकती है और बहुत अधिक घी से चिपचिपी हो सकती है।
दी गई मात्रा मध्यम रखी गई है।

धनिया पंजीरी बनाने की विधि

1. साबुत धनिया धीमी आंच पर भूनें

भारी तले की साफ कड़ाही को धीमी से मध्यम आंच पर गरम करें। बिना घी के
साबुत धनिया डालें और लगातार चलाते हुए लगभग 4–6 मिनट भूनें। धनिया से अच्छी
सुगंध आने लगे और उसका रंग थोड़ा गहरा हो जाए तो तुरंत बड़ी प्लेट में निकाल
लें। उसे भूरा या काला न होने दें, वरना कड़वाहट आ सकती है।

2. धनिया पूरी तरह ठंडा करके दरदरा पीसें

गर्म धनिया मिक्सर में डालने से भाप और नमी बन सकती है। इसलिए उसे पूरी तरह
ठंडा होने दें। इसके बाद थोड़े-थोड़े अंतर से मिक्सर चलाकर दरदरा पीसें। बहुत
महीन पाउडर करने से पंजीरी की बनावट आटे जैसी हो जाएगी। कुछ छोटे दाने बने
रहना अच्छा लगता है।

3. मखाना कुरकुरा भूनें

उसी कड़ाही में 2 बड़े चम्मच घी डालें। मखाना डालकर धीमी आंच पर 7–9 मिनट
चलाते रहें। एक मखाना तोड़कर देखें; वह अंदर से कुरकुरा होना चाहिए। ठंडा
होने पर आधा मखाना दरदरा पीसें और आधा हाथ से छोटे टुकड़ों में तोड़ें। इससे
पंजीरी में एक जैसी महीन बनावट के बजाय अच्छा दाना आता है।

4. बादाम, काजू और बीज अलग भूनें

बादाम और काजू को छोटे टुकड़ों में काटें। कड़ाही में 1 बड़ा चम्मच घी डालकर
उन्हें धीमी आंच पर 2–3 मिनट भूनें। हल्का रंग आते ही खरबूजे के बीज डालें
और लगभग एक मिनट चलाएं। मेवे बहुत गहरे न करें; ठंडा होने के बाद भी उनकी
भुनाई थोड़ी जारी रहती है।

5. नारियल बहुत हल्का भूनें

कद्दूकस सूखा नारियल डालकर केवल 1–2 मिनट चलाएं। नारियल जल्दी जलता है,
इसलिए आंच धीमी रखें। हल्की सुगंध आते ही निकाल लें। भूरा होने तक न भूनें,
वरना उसका स्वाद धनिए पर भारी पड़ सकता है।

6. धनिया, मखाना और मेवे मिलाएं

कड़ाही में बचा हुआ घी डालें और दरदरा धनिया लगभग 2 मिनट धीमी आंच पर चलाएं।
अब मखाना, मेवे, बीज और नारियल मिलाकर एक मिनट चलाएं। गैस बंद कर दें और
मिश्रण को बड़ी थाली या परात में फैला दें। फैलाने से वह जल्दी और समान रूप
से ठंडा होगा।

7. ठंडे मिश्रण में बूरा और इलायची मिलाएं

मिश्रण को हाथ से छूकर देखें। उसमें बिल्कुल गर्माहट न हो तभी बूरा या पिसी
मिश्री मिलाएं। इलायची और इच्छा अनुसार सूखी गुलाब पंखुड़ी डालें। साफ सूखे
हाथ या बड़े चम्मच से अच्छी तरह मिलाएं। गर्म मिश्रण में बूरा डालने से वह
पिघलकर गांठ और चिपचिपाहट पैदा कर सकता है।

8. भोग के लिए अलग कटोरी निकालें

तैयार पंजीरी में से पूजा के लिए साफ कटोरी भरें। परिवार की परंपरा के अनुसार
तुलसी दल अर्पित कर सकते हैं। बाकी पंजीरी को तुरंत बंद डिब्बे में न रखें;
पहले पूरी तरह कमरे के तापमान पर आने दें।

दानेदार पंजीरी के सात जरूरी नियम

  1. साबुत धनिया उपयोग करें और उसे अलग भूनें।
  2. धनिया को ठंडा होने के बाद ही पीसें।
  3. बहुत महीन पाउडर न बनाएं; हल्का दाना रहने दें।
  4. मखाना अंदर तक कुरकुरा भूनें।
  5. नारियल और मेवे की भुनाई अलग रखें।
  6. बूरा केवल पूरी तरह ठंडे मिश्रण में मिलाएं।
  7. पंजीरी निकालने के लिए हमेशा सूखा चम्मच उपयोग करें।

पंजीरी चिपचिपी हो जाए तो क्या करें?

चिपचिपाहट का सामान्य कारण गर्म मिश्रण में चीनी मिलाना या घी अधिक होना है।
मिश्रण को बड़ी थाली में फैला दें और पूरी तरह ठंडा होने दें। अलग से थोड़े
मखाने भूनकर दरदरे पीसें और मिलाएं। जरूरत हो तो एक या दो बड़े चम्मच भुना
धनिया पाउडर भी मिला सकते हैं। कच्चा धनिया सीधे न डालें।

पंजीरी में पानी, दूध या कोई गीली सामग्री न मिलाएं। इससे वह थोड़ी देर के
लिए नरम लगेगी, लेकिन जल्दी खराब हो सकती है। मिठास कम लगे तो ठंडी पंजीरी
में थोड़ी छनी हुई बूरा मिलाएं।

धनिया कड़वा हो जाए तो क्या करें?

बहुत जला धनिया पूरी पंजीरी को कड़वा कर सकता है। हल्की कड़वाहट हो तो मखाना,
नारियल और बूरा थोड़ा बढ़ाकर संतुलन बनाने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन
तेज जली गंध हो तो नया धनिया भूनना बेहतर है। भोग के लिए खराब स्वाद वाली
पंजीरी उपयोग न करें।

बिना मखाने या बिना मेवे की पंजीरी

मखाना उपलब्ध न हो तो केवल धनिया, नारियल, घी, बूरा और इलायची से पंजीरी
बनाई जा सकती है। मेवे से एलर्जी हो तो बादाम, काजू और बीज पूरी तरह छोड़ दें।
उसी कड़ाही और चम्मच का उपयोग न करें जिसमें पहले मेवे भुने गए हों।

बहुत सरल रूप में 1 कप साबुत धनिया, 4 बड़े चम्मच घी, 1/2 से 3/4 कप बूरा
और इलायची पर्याप्त हैं। स्वाद हल्का रखने के लिए धनिया को जलने से बचाना
और बूरा ठंडे मिश्रण में मिलाना फिर भी जरूरी है।

जन्माष्टमी पर धनिया पंजीरी का भोग कैसे लगाएं?

साफ कटोरी में पंजीरी रखें। साथ में माखन-मिश्री, फल या पंचामृत रखा जा
सकता है। पहले श्रीकृष्ण को भोग अर्पित करें, फिर परिवार की परंपरा के अनुसार
तुलसी दल रखें और आरती करें। भोग के विकल्प
जन्माष्टमी के 11 भोग
में देखें।

प्रसाद बांटते समय छोटी मात्रा दें, क्योंकि इसमें घी, चीनी और मेवे होते हैं।
मेवे या नारियल से एलर्जी वाले व्यक्ति को सामग्री पहले बता दें। बच्चों को
बड़े मेवे के टुकड़े देने से पहले उम्र का ध्यान रखें।

पंजीरी कितने दिन सुरक्षित रख सकते हैं?

सामान्य मौसम पूरी तरह ठंडी करके सूखे बंद डिब्बे में सामान्यतः 7–10 दिन।
गर्म या नम मौसम कम मात्रा बनाएं, नमी से बचाएं और गंध या स्वाद बदलने पर उपयोग न करें।
डिब्बा साफ, सूखा और अच्छी तरह बंद होने वाला कांच या स्टील का डिब्बा।
चम्मच हर बार बिल्कुल सूखा चम्मच उपयोग करें।
खराब होने के संकेत बासी गंध, चिपचिपापन, फफूंद, कीड़ा या स्पष्ट कड़वाहट।

पोषण का सामान्य अनुमान

यह प्रसाद घी, बूरा और मेवों के कारण ऊर्जा से भरपूर है। 10–12 छोटी मात्रा
मानने पर एक भाग में लगभग 190–225 कैलोरी हो सकती हैं। वास्तविक मात्रा
सामग्री और परोसने के आकार पर निर्भर करेगी। इसे किसी बीमारी के उपचार या
औषधीय लाभ के रूप में न देखें; प्रसाद की छोटी मात्रा पर्याप्त है।

बाबा श्याम के भक्तों के लिए प्रसाद का भाव

जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण को धनिया पंजीरी अर्पित करते समय बाबा श्याम का
स्मरण भी किया जा सकता है। लोकप्रचलित कथा में श्रीकृष्ण ने वीर बर्बरीक को
“श्याम” नाम दिया था। पूरी कथा
खाटू श्याम जी की कथा
में पढ़ें।

खाटू धाम ले जाने या बांटने से पहले मंदिर और स्थानीय व्यवस्था के नियम देखें।
कतार या भीड़ में बिना अनुमति भोजन बांटना सुविधाजनक या सुरक्षित नहीं हो
सकता। घर पर भोग लगाकर परिवार और आसपास जरूरतमंद लोगों को सम्मानपूर्वक
प्रसाद देना सरल विकल्प है।

सामान्य गलतियां

  • धनिया तेज आंच पर भूनकर जला देना।
  • गर्म धनिया पीसकर मिक्सर में नमी बनाना।
  • मखाना केवल बाहर से गरम करना, अंदर तक कुरकुरा न करना।
  • नारियल को बहुत भूरा करना।
  • गर्म मिश्रण में बूरा डालना।
  • घी बहुत अधिक डालकर पंजीरी चिपचिपी करना।
  • ठंडी होने से पहले डिब्बा बंद कर देना।
  • गीला चम्मच डालना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनिया पंजीरी में साबुत धनिया लें या पाउडर?

साबुत धनिया को धीमी आंच पर भूनकर दरदरा पीसने से सुगंध और बनावट बेहतर रहती है। तैयार पाउडर भी उपयोग कर सकते हैं, लेकिन उसे बहुत हल्का भूनें।

पंजीरी में बूरा कब मिलाएं?

मिश्रण पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही बूरा या पिसी मिश्री मिलाएं। गर्म मिश्रण में डालने से चीनी पिघलकर गांठ बना सकती है।

धनिया पंजीरी कितने दिन रख सकते हैं?

पूरी तरह ठंडी पंजीरी को साफ, सूखे और बंद डिब्बे में सामान्यतः 7–10 दिन रखा जा सकता है। गर्म या नम मौसम में कम मात्रा बनाएं।

क्या धनिया पंजीरी में मखाना जरूरी है?

नहीं। केवल भुना धनिया, घी, बूरा, इलायची और इच्छा अनुसार नारियल से भी पंजीरी बन सकती है।

पंजीरी चिपचिपी क्यों हो जाती है?

गर्म मिश्रण में चीनी मिलाने, घी अधिक डालने या नमी आने से पंजीरी चिपचिपी हो सकती है। ठंडा करके भुना दरदरा मखाना मिलाएं।

क्या धनिया पंजीरी जन्माष्टमी व्रत में ले सकते हैं?

इसके सामान्य घटक बहुत-सी फलाहार परंपराओं में स्वीकार हैं, लेकिन अपने परिवार के व्रत नियम और सभी सामग्री की पुष्टि करें।

Prakash Bengani
लेखक / Author
Prakash Bengani

Founder, KhatuWaleBaba.in — खाटू श्याम जी yatra का सम्पूर्ण portal। हर hotel, dharamshala और route की जानकारी local team द्वारा verified। WordPress.org पर 844 मंदिरों की Temple Directory plugin के developer।

बाबा श्याम के दर्शन करें

Hotel, Taxi और Ekadashi — सब यहाँ