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Makhana Dry Fruit Panjiri Recipe: जन्माष्टमी भोग के लिए बिना गेहूं की मखाना मेवा पंजीरी

पीतल की कटोरी में मखाना, बादाम, काजू और नारियल से बनी जन्माष्टमी पंजीरी प्रसाद

Makhana Dry Fruit Panjiri Recipe जन्माष्टमी भोग के लिए
ऐसी पंजीरी है जिसमें गेहूं का आटा नहीं डाला जाता। इसे मखाना, बादाम,
काजू, सूखा नारियल, खरबूजे के बीज, घी, इलायची और बूरा या पिसी मिश्री से
बनाया जाता है। सही स्वाद का रहस्य बहुत घी डालने में नहीं, बल्कि हर
सामग्री को धीमी आंच पर अलग-अलग भूनने और मिश्रण पूरी तरह ठंडा होने के बाद
मिठास मिलाने में है। जन्माष्टमी 2026 की पूजा, व्रत और भोग की जानकारी के
लिए कृष्ण जन्माष्टमी 2026
का मुख्य पृष्ठ देखें।

मखाना मेवा पंजीरी उन परिवारों के लिए उपयोगी है जो पारंपरिक धनिया पंजीरी
के साथ दूसरा प्रसाद बनाना चाहते हैं या गेहूं रहित विकल्प पसंद करते हैं।
इसे अपने आप “सभी व्रतों के लिए उपयुक्त” न मानें, क्योंकि अलग-अलग परिवारों
में नारियल, कुछ मेवों, तैयार बूरा या बाजार के घी को लेकर नियम बदल सकते
हैं। व्रत के लिए बना रहे हों तो हर सामग्री का लेबल और घर की परंपरा पहले
देख लें।

तैयारी का समय लगभग 15 मिनट
भूनने का समय लगभग 20 से 25 मिनट
ठंडा होने का समय लगभग 25 मिनट
कुल मात्रा 10 से 12 छोटी प्रसाद कटोरियां
मुख्य स्वाद हल्का मीठा, मेवेदार और इलायची की सुगंध वाला
सबसे जरूरी बात बूरा या मिश्री केवल पूरी तरह ठंडे मिश्रण में मिलाएं

मखाना मेवा पंजीरी के लिए सामग्री

  • मखाना: 4 कप, लगभग 80 ग्राम
  • बादाम: 1/2 कप, लगभग 60 ग्राम
  • काजू: 1/2 कप, लगभग 60 ग्राम
  • सूखा नारियल कद्दूकस: 1/2 कप, लगभग 45 ग्राम
  • खरबूजे के बीज: 3 बड़े चम्मच, लगभग 25 ग्राम; इच्छा अनुसार
  • किशमिश: 1/3 कप, लगभग 45 ग्राम
  • देसी घी: 6 से 7 बड़े चम्मच, लगभग 85 ग्राम
  • बूरा या पिसी मिश्री: 1 कप, लगभग 180 ग्राम
  • इलायची पाउडर: 1 छोटा चम्मच
  • जायफल पाउडर: एक छोटी चुटकी; इच्छा अनुसार
  • सूखी गुलाब पंखुड़ी: 1 बड़ा चम्मच; इच्छा अनुसार

ऊपर दी गई मिठास मध्यम रखी गई है। परिवार अधिक मीठा पसंद करता हो तो बूरा
20 से 25 ग्राम बढ़ा सकते हैं। पहली बार बना रहे हों तो पूरी बूरा एक साथ
न डालें। लगभग तीन-चौथाई मात्रा मिलाकर स्वाद देखें, फिर जरूरत के अनुसार
बाकी डालें।

Makhana Panjiri बनाने से पहले ये तैयारी करें

मखानों को तोड़कर देखें। यदि वे नरम हैं तो उन्हें थोड़ा अधिक समय भूनना
होगा। बादाम और काजू को बहुत महीन न काटें; छोटे टुकड़े पंजीरी को अच्छा
स्वाद और बनावट देते हैं। किशमिश को धोकर डालना हो तो उसे पूरी तरह सुखाना
जरूरी है। नमी रह जाने पर पंजीरी जल्दी खराब हो सकती है, इसलिए सूखी साफ
किशमिश उपयोग करना अधिक आसान है।

बूरा में गांठ हो तो छलनी से छान लें। घी की खुशबू सामान्य होनी चाहिए;
बासी गंध वाला घी प्रसाद के स्वाद को खराब कर देगा। कड़ाही और चलाने वाला
चम्मच पूरी तरह सूखा रखें।

मखाना मेवा पंजीरी बनाने की विधि

1. मखाने धीमी आंच पर भूनें

भारी कड़ाही में दो बड़े चम्मच घी गरम करें। आंच धीमी रखकर मखाने डालें और
लगातार चलाते हुए 8 से 10 मिनट भूनें। एक मखाना निकालकर ठंडा करें और
तोड़ें। यदि वह आसानी से कुरकुरा टूट जाए तो मखाने तैयार हैं। केवल बाहर
हल्का रंग आने से काम नहीं चलेगा; अंदर तक कुरकुरापन जरूरी है।

2. भुने मखाने दरदरे करें

मखानों को प्लेट में पूरी तरह ठंडा करें। आधे मखाने हाथ या बेलन से छोटे
टुकड़ों में तोड़ें और बाकी आधे मिक्सर में एक-दो बार चलाकर दरदरे करें।
पूरा महीन पाउडर बनाने से पंजीरी भारी लग सकती है। कुछ छोटे टुकड़े बने
रहने से हर कौर में अच्छा स्वाद आता है।

3. बादाम और काजू भूनें

उसी कड़ाही में एक बड़ा चम्मच घी डालें। पहले बादाम को दो मिनट चलाएं,
फिर काजू डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। तेज आंच पर काजू जल्दी जलता
है, इसलिए रंग बदलते ही दोनों को प्लेट में निकाल लें। ठंडा होने के बाद
थोड़ा दरदरा काट या पीस सकते हैं।

4. बीज, नारियल और किशमिश तैयार करें

खरबूजे के बीज बिना घी के धीमी आंच पर हल्के फूटने तक चलाएं। फिर नारियल
डालकर केवल सुगंध आने तक भूनें; उसे भूरा नहीं करना है। गैस बहुत धीमी रखें।
नारियल निकालने के बाद आधा छोटा चम्मच घी डालकर किशमिश को 20 से 30 सेकंड
चलाएं। किशमिश फूलते ही निकाल लें।

5. सभी भुनी सामग्री मिलाएं

कड़ाही में बचा घी डालें। दरदरे मखाने, बादाम, काजू, बीज और नारियल डालकर
दो मिनट धीमी आंच पर मिलाएं। गैस बंद करके किशमिश, इलायची और इच्छा अनुसार
जायफल डालें। मिश्रण को बड़ी थाली या परात में फैला दें, ताकि वह जल्दी
ठंडा हो जाए।

6. ठंडे मिश्रण में बूरा मिलाएं

मिश्रण को हाथ से छूने पर बिल्कुल सामान्य तापमान का होना चाहिए। अब छनी
हुई बूरा या पिसी मिश्री थोड़ी-थोड़ी करके मिलाएं। गर्मी बाकी होगी तो चीनी
पिघलकर पंजीरी में गांठ बना सकती है। आखिर में सूखी गुलाब पंखुड़ी डालें और
साफ चम्मच से अच्छी तरह मिलाएं।

7. भोग के लिए अलग कटोरी निकालें

तैयार पंजीरी को पहले साफ कटोरी में निकालकर लड्डू गोपाल को अर्पित करें।
परिवार की परंपरा में तुलसी-दल अर्पित किया जाता हो तो भोग लगाते समय रखें;
उसे पूरी पंजीरी में मिलाकर लंबे समय के लिए न रखें। पूजा के बाद प्रसाद
बांटें और बची पंजीरी पूरी तरह ठंडी होने पर डिब्बे में भरें।

पंजीरी दानेदार कैसे बनेगी?

  • मखाने अंदर तक कुरकुरे भूनें, लेकिन जलने न दें।
  • कुछ मखाने दरदरे रखें और कुछ छोटे टुकड़ों में तोड़ें।
  • मेवों को अलग-अलग भूनें, क्योंकि सबका भूनने का समय अलग है।
  • नारियल को हल्का ही चलाएं; अधिक भूरा होने पर स्वाद कड़वा हो सकता है।
  • घी इतना ही डालें कि सामग्री पर हल्की परत आए, मिश्रण चिपके नहीं।
  • बूरा मिलाने से पहले मिश्रण को पूरी तरह ठंडा करें।
  • डिब्बे में भरने से पहले भी पंजीरी ठंडी और सूखी होनी चाहिए।

मखाना पंजीरी और धनिया पंजीरी में क्या अंतर है?

बात मखाना मेवा पंजीरी धनिया पंजीरी
मुख्य सामग्री मखाना और मेवे भुना साबुत धनिया
स्वाद मेवेदार और हल्का कुरकुरा सुगंधित, मिट्टी जैसा हल्का धनिया स्वाद
बनावट छोटे कुरकुरे टुकड़ों वाली दरदरी और अधिक महीन
किसके लिए जिन्हें मखाना और मेवे पसंद हों पारंपरिक जन्माष्टमी प्रसाद चाहने वालों के लिए
विधि हर मेवा अलग भूनना जरूरी धनिया सही धीमी आंच पर भूनना सबसे जरूरी

दोनों में से कोई एक बनाना पर्याप्त है। अधिक लोगों के लिए प्रसाद बनाना हो
तो दोनों को अलग कटोरियों में रख सकते हैं। पारंपरिक धनिया पंजीरी की पूरी
विधि धनिया पंजीरी प्रसाद रेसिपी
में दी गई है।

व्रत के लिए बनाते समय क्या देखें?

मखाना, मेवे, नारियल, घी और मिश्री बहुत-सी जन्माष्टमी व्रत परंपराओं में
उपयोग किए जाते हैं, फिर भी नियम हर परिवार में समान नहीं होते। बाजार की
बूरा, पैक मेवे या घी में मिलावट अथवा दूसरी सामग्री का संपर्क हो सकता है।
कठोर व्रत रखने वाले लोग भरोसेमंद सामग्री लें और अपने घर के नियम के अनुसार
ही प्रसाद ग्रहण करें।

मधुमेह, एलर्जी, पाचन संबंधी समस्या या चिकित्सकीय आहार वाले व्यक्ति छोटी
मात्रा लें और अपनी जरूरत के अनुसार चीनी, घी तथा मेवों की मात्रा तय करें।
धार्मिक प्रसाद सम्मान से लिया जाता है, लेकिन स्वास्थ्य की जरूरतों को
नजरअंदाज करना आवश्यक नहीं है।

कितने दिन सुरक्षित रख सकते हैं?

पूरी तरह ठंडी और सूखी मखाना पंजीरी को साफ बंद डिब्बे में सामान्यतः 7 से
10 दिन रखा जा सकता है। बहुत नम या गर्म मौसम में कम मात्रा बनाना बेहतर
है। हमेशा सूखा चम्मच डालें। गंध, स्वाद या बनावट में बदलाव दिखे तो प्रसाद
उपयोग न करें।

फ्रिज में रखने से मखाना नमी पकड़कर नरम हो सकता है। घर बहुत गर्म हो और
फ्रिज आवश्यक हो तो पंजीरी को हवा न जाने वाले डिब्बे में रखें और निकालने
के बाद डिब्बा तुरंत बंद करें। परोसने से पहले उसे कुछ देर सामान्य तापमान
पर आने दें।

बाबा श्याम भक्ति में प्रसाद बांटने का भाव

जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण को पंजीरी अर्पित करते समय भक्त बाबा श्याम का
स्मरण भी कर सकते हैं। लोकप्रचलित कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने वीर बर्बरीक
को “श्याम” नाम और कलियुग में पूजे जाने का वरदान दिया। इस प्रसंग को
खाटू श्याम जी की कथा
में विस्तार से पढ़ें।

भोग के बाद प्रसाद परिवार, पड़ोस और जरूरतमंद लोगों में साफ तरीके से बांटें।
खाटू यात्रा में साथ ले जा रहे हों तो कम मात्रा, मजबूत बंद डिब्बा और गर्मी
से बचाव जरूरी है। मंदिर परिसर या कतार में वितरण से पहले स्थानीय व्यवस्था
और अनुमति का पालन करें।

सामान्य गलतियां

  • मखाने तेज आंच पर भूनना, जिससे बाहर रंग आ जाए लेकिन अंदर नरम रहें।
  • सारे मेवे एक साथ डालना और कुछ को जला देना।
  • किशमिश को लंबे समय तक भूनकर कड़ा करना।
  • गर्म मिश्रण में बूरा डालना।
  • बहुत घी डालकर पंजीरी चिपचिपी बनाना।
  • नमी वाली किशमिश या गीला चम्मच उपयोग करना।
  • ठंडा होने से पहले डिब्बा बंद करना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मखाना पंजीरी में गेहूं का आटा डालना जरूरी है?

नहीं। इस विधि में गेहूं का आटा नहीं है। मखाना, मेवे, नारियल, घी और बूरा से दानेदार पंजीरी बनती है। पैक सामग्री लेते समय उसके घटक जरूर देखें।

मखाने कितनी देर भूनें?

धीमी आंच पर सामान्यतः 8 से 10 मिनट लगते हैं। समय मखाने और कड़ाही के अनुसार बदल सकता है। एक मखाना ठंडा करके तोड़ें; वह अंदर तक कुरकुरा होना चाहिए।

बूरा की जगह मिश्री डाल सकते हैं?

हाँ। मिश्री को बारीक पीसकर पूरी तरह ठंडे मिश्रण में डालें। मोटे टुकड़े रहेंगे तो मिठास समान नहीं फैलेगी।

पंजीरी नरम क्यों हो जाती है?

मखाना कम भुना हो, किशमिश में नमी हो, गर्म पंजीरी डिब्बे में बंद की गई हो या गीला चम्मच डाला गया हो तो पंजीरी नरम हो सकती है।

मखाना मेवा पंजीरी कितने दिन रख सकते हैं?

साफ, सूखे और बंद डिब्बे में सामान्यतः 7 से 10 दिन रखी जा सकती है। गर्म और नम मौसम में कम मात्रा बनाएं तथा बदलाव दिखे तो उपयोग न करें।

क्या यह पंजीरी जन्माष्टमी व्रत में खा सकते हैं?

इसके सामान्य घटक कई व्रत परंपराओं में स्वीकार होते हैं, लेकिन परिवार के नियम अलग हो सकते हैं। हर सामग्री की पुष्टि करके ही व्रत में लें।

Prakash Bengani
लेखक / Author
Prakash Bengani

Founder, KhatuWaleBaba.in — खाटू श्याम जी yatra का सम्पूर्ण portal। हर hotel, dharamshala और route की जानकारी local team द्वारा verified। WordPress.org पर 844 मंदिरों की Temple Directory plugin के developer।

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