Home एकादशी कैलेंडर मोहिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

मोहिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक मई 23, 2026 (शनिवार)
🗓️ तिथि वैशाख, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ मई 22, 08:30 PM
⏰ समाप्त मई 23, 07:48 PM

पद्म पुराण के अनुसार प्राचीन काल में भद्रावती नगरी में धृष्टबुद्धि नामक एक व्यक्ति रहता था। वह अत्यंत दुराचारी, जुआरी, मद्यपान करने वाला और पाप कर्मों में लिप्त था। उसके पिता धनपाल एक सम्मानित वैश्य थे, लेकिन धृष्टबुद्धि ने अपने दुर्व्यसनों के कारण परिवार और समाज में अपना सम्मान खो दिया।

उसके बुरे आचरण से परेशान होकर परिवार ने उसे घर से निकाल दिया। वह जंगलों में भटकने लगा और चोरी तथा अन्य अनुचित कार्यों से जीवन यापन करने लगा।

एक दिन वह अत्यंत दुखी अवस्था में महर्षि कौंडिन्य के आश्रम पहुंचा। वहां उसने अपने पापों से मुक्ति का उपाय पूछा।

महर्षि कौंडिन्य ने उसे वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी का व्रत करने का निर्देश दिया और बताया कि यह व्रत बड़े से बड़े पापों का भी नाश कर सकता है।

धृष्टबुद्धि ने श्रद्धापूर्वक मोहिनी एकादशी का व्रत किया, भगवान विष्णु की पूजा की और अपने पापों के लिए प्रायश्चित किया।

व्रत के प्रभाव से उसके सभी पाप नष्ट हो गए और उसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त हुई। अंततः उसे उत्तम लोकों की प्राप्ति हुई।

यह कथा बताती है कि सच्चे मन से किया गया मोहिनी एकादशी का व्रत जीवन के बड़े से बड़े पापों को भी समाप्त करने की शक्ति रखता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहिनी एकादशी किस महीने में आती है?
मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आती है।
मोहिनी एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
यह एकादशी पापों से मुक्ति, आत्मशुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है।
मोहिनी एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा धृष्टबुद्धि नामक व्यक्ति और महर्षि कौंडिन्य द्वारा बताए गए व्रत से संबंधित है।
मोहिनी एकादशी का नाम मोहिनी क्यों पड़ा?
क्योंकि यह भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ी हुई है, जिसने समुद्र मंथन के समय देवताओं को अमृत प्रदान किया था।
क्या महिलाएं मोहिनी एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या मोहिनी एकादशी पर चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित पारण समय के भीतर करना चाहिए।
मोहिनी एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
पापों से मुक्ति, मानसिक शांति, भगवान विष्णु की कृपा और मोक्ष की प्राप्ति।
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