Home एकादशी कैलेंडर मोहिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

मोहिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक मई 23, 2026 (शनिवार)
🗓️ तिथि वैशाख, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ मई 22, 08:30 PM
⏰ समाप्त मई 23, 07:48 PM

1. दशमी तिथि से नियमों का पालन

  • सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • ब्रह्मचर्य एवं संयम का पालन करें।
  • झूठ, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

2. प्रातःकाल स्नान करें

एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

3. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु के समक्ष जल लेकर व्रत का संकल्प करें।

संकल्प मंत्र:

मम समस्त पापक्षयपूर्वक श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं मोहिनी एकादशी व्रतमहं करिष्ये।

4. भगवान विष्णु की पूजा करें

  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
  • चंदन, अक्षत, पुष्प एवं तुलसी दल अर्पित करें।
  • धूप एवं दीप प्रज्वलित करें।
  • नैवेद्य अर्पित करें।

5. मंत्र जाप करें

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥

या

ॐ विष्णवे नमः॥

6. कथा एवं भजन

  • मोहिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • भगवान विष्णु के भजन एवं कीर्तन करें।

7. द्वादशी को पारण करें

द्वादशी तिथि में शुभ समय पर व्रत का पारण करें तथा जरूरतमंदों को दान दें।


मोहिनी एकादशी पर क्या करें?

✅ भगवान विष्णु की पूजा करें।
✅ तुलसी दल अर्पित करें।
✅ विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
✅ दान-पुण्य करें।
✅ भजन-कीर्तन करें।
✅ आत्मचिंतन एवं भगवान का स्मरण करें।


मोहिनी एकादशी पर क्या न करें?

❌ चावल का सेवन न करें।
❌ मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन का सेवन न करें।
❌ झूठ, निंदा और छल-कपट से बचें।
❌ क्रोध एवं विवाद न करें।
❌ किसी का अपमान न करें।


व्रत में क्या खा सकते हैं?

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना
  • कुट्टू का आटा
  • सिंघाड़े का आटा
  • राजगीरा
  • सूखे मेवे

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहिनी एकादशी किस महीने में आती है?
मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आती है।
मोहिनी एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
यह एकादशी पापों से मुक्ति, आत्मशुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है।
मोहिनी एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा धृष्टबुद्धि नामक व्यक्ति और महर्षि कौंडिन्य द्वारा बताए गए व्रत से संबंधित है।
मोहिनी एकादशी का नाम मोहिनी क्यों पड़ा?
क्योंकि यह भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ी हुई है, जिसने समुद्र मंथन के समय देवताओं को अमृत प्रदान किया था।
क्या महिलाएं मोहिनी एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या मोहिनी एकादशी पर चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित पारण समय के भीतर करना चाहिए।
मोहिनी एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
पापों से मुक्ति, मानसिक शांति, भगवान विष्णु की कृपा और मोक्ष की प्राप्ति।
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