विजया एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी
पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम माता सीता की खोज करते हुए समुद्र तट पर पहुंचे, तब उन्हें लंका जाने के लिए समुद्र पार करना था।
समुद्र अत्यंत विशाल था और उसे पार करने का कोई उपाय दिखाई नहीं दे रहा था। तब भगवान श्रीराम ने अपने भाई लक्ष्मण से किसी महान ऋषि का मार्गदर्शन लेने को कहा। लक्ष्मण जी ने महर्षि बकदाल्भ्य के आश्रम में जाकर उनसे उपाय पूछा।
महर्षि ने भगवान श्रीराम को फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत करने का सुझाव दिया और बताया कि इस व्रत के प्रभाव से सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
ऋषि के निर्देशानुसार भगवान श्रीराम ने विधिपूर्वक विजया एकादशी का व्रत किया, भगवान विष्णु की पूजा की और द्वादशी के दिन व्रत का पारण किया।
व्रत के पुण्य प्रभाव से समुद्र पार करने का मार्ग प्रशस्त हुआ, नल-नील द्वारा सेतु निर्माण हुआ और अंततः भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त कर माता सीता को मुक्त कराया।
इसलिए विजया एकादशी को विजय, सफलता और बाधाओं के नाश की एकादशी कहा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी पर खाटू दर्शन की योजना?
पहले से होटल और टैक्सी बुक करें — एकादशी पर भारी भीड़ होती है।
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📚 सन्दर्भ एवं अधिक जानकारी
- Drik Panchang — Ekadashi Dates & Muhurat 2026 ↗ — Accurate tithi timings
- Sikar.rajasthan.gov.in — Official Govt Website ↗ — Sikar district official information
- Wikipedia — Ekadashi ↗ — Complete Ekadashi history