Home एकादशी कैलेंडर श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक अगस्त 23, 2026 (रविवार)
🗓️ तिथि श्रावण, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ अगस्त 23, 02:00 AM
⏰ समाप्त अगस्त 24, 04:18 AM

1. दशमी तिथि से तैयारी

  • सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करें।
  • तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

2. प्रातःकाल स्नान करें

एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें तथा स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

3. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु के समक्ष जल लेकर व्रत का संकल्प करें।

संकल्प मंत्र:

मम समस्त पापक्षयपूर्वक संतान-सुख-प्राप्त्यर्थं श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं पुत्रदा एकादशी व्रतमहं करिष्ये।

4. भगवान विष्णु की पूजा करें

  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
  • चंदन, अक्षत, पुष्प एवं तुलसी दल अर्पित करें।
  • धूप एवं दीप प्रज्वलित करें।
  • फल और नैवेद्य अर्पित करें।

5. मंत्र जाप करें

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥

या

ॐ नारायणाय नमः॥

6. कथा श्रवण एवं भजन

  • श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • भगवान विष्णु के भजन एवं कीर्तन करें।

7. संतान सुख के लिए विशेष प्रार्थना

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें।
  • संतान के सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करें।

8. द्वादशी को पारण

द्वादशी तिथि में शुभ समय पर व्रत का पारण करें और दान-पुण्य करें।


श्रावण पुत्रदा एकादशी पर क्या करें?

✅ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
✅ तुलसी दल अर्पित करें।
✅ विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
✅ संतान के लिए विशेष प्रार्थना करें।
✅ दान-पुण्य करें।
✅ भजन, कीर्तन और सत्संग करें।


श्रावण पुत्रदा एकादशी पर क्या न करें?

❌ चावल का सेवन न करें।
❌ मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन से दूर रहें।
❌ झूठ, निंदा और अपशब्दों से बचें।
❌ क्रोध और विवाद न करें।
❌ किसी का अपमान न करें।


व्रत में क्या खा सकते हैं?

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना
  • कुट्टू का आटा
  • सिंघाड़े का आटा
  • राजगीरा
  • सूखे मेवे

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रावण पुत्रदा एकादशी किसके लिए की जाती है?
यह व्रत संतान प्राप्ति, संतान सुख और संतान की उन्नति के लिए किया जाता है।
वर्ष में पुत्रदा एकादशी कितनी बार आती है?
वर्ष में दो बार—पौष शुक्ल पक्ष और श्रावण शुक्ल पक्ष में।
श्रावण पुत्रदा एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा राजा महीजित और महर्षि लोमश से संबंधित है।
क्या महिलाएं पुत्रदा एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय के भीतर पारण करना चाहिए।
पुत्रदा एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
संतान सुख, परिवार की समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा।
क्या अविवाहित व्यक्ति भी यह व्रत कर सकते हैं?
हाँ, भगवान विष्णु की कृपा और जीवन की मंगल कामनाओं के लिए कोई भी भक्त यह व्रत कर सकता है।
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