Home एकादशी कैलेंडर उत्पन्ना एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

उत्पन्ना एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक दिसम्बर 4, 2026 (शुक्रवार)
🗓️ तिथि मार्गशीर्ष, कृष्ण एकादशी
⏰ प्रारम्भ दिस॰ 03, 11:03 PM
⏰ समाप्त दिस॰ 04, 11:44 PM

1. दशमी तिथि से तैयारी

  • सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • ब्रह्मचर्य एवं संयम का पालन करें।
  • तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

2. प्रातःकाल स्नान करें

एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

3. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु के समक्ष जल लेकर व्रत का संकल्प करें।

संकल्प मंत्र:

मम समस्त पापक्षयपूर्वक श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं उत्पन्ना एकादशी व्रतमहं करिष्ये।

4. भगवान विष्णु एवं एकादशी देवी की पूजा करें

  • भगवान विष्णु का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
  • गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
  • चंदन, अक्षत, पुष्प एवं तुलसी दल अर्पित करें।
  • धूप एवं दीप प्रज्वलित करें।
  • नैवेद्य अर्पित करें।

5. मंत्र जाप करें

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥

या

ॐ नारायणाय नमः॥

6. कथा एवं भजन

  • उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • भजन, कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन करें।

7. रात्रि जागरण

संभव हो तो भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करते हुए रात्रि जागरण करें।

8. द्वादशी को पारण

द्वादशी तिथि में शुभ समय पर व्रत का पारण करें और दान-पुण्य करें।


उत्पन्ना एकादशी पर क्या करें?

✅ भगवान विष्णु की पूजा करें।
✅ तुलसी दल अर्पित करें।
✅ विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
✅ एकादशी देवी का स्मरण करें।
✅ दान-पुण्य करें।
✅ भजन, कीर्तन एवं सत्संग करें।


उत्पन्ना एकादशी पर क्या न करें?

❌ चावल का सेवन न करें।
❌ मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन न करें।
❌ झूठ, निंदा और अपशब्दों से बचें।
❌ क्रोध एवं विवाद न करें।
❌ किसी का अपमान न करें।


व्रत में क्या खा सकते हैं?

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना
  • कुट्टू का आटा
  • सिंघाड़े का आटा
  • राजगीरा
  • सूखे मेवे

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्पन्ना एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
यह एकादशी देवी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है और सभी एकादशी व्रतों की आधारभूत एकादशी मानी जाती है।
उत्पन्ना एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा भगवान विष्णु, मुर दैत्य और एकादशी देवी के प्राकट्य से संबंधित है।
उत्पन्ना एकादशी किस महीने में आती है?
यह मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष में आती है।
एकादशी देवी कौन हैं?
एकादशी देवी भगवान विष्णु के दिव्य तेज से उत्पन्न हुईं और उन्होंने मुर दैत्य का वध किया था।
क्या महिलाएं उत्पन्ना एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय के भीतर पारण करना चाहिए।
उत्पन्ना एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
पापों से मुक्ति, भगवान विष्णु की कृपा और मोक्ष की प्राप्ति।
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