अनंत चतुर्दशी पूजा विधि


अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का दिन है। इस दिन 14 गाँठों वाला अनंत सूत्र पूजकर हाथ में बाँधा जाता है — पुरुष दाहिने और महिलाएँ बाएँ हाथ में। यही दिन दस दिन के गणेशोत्सव के गणपति विसर्जन का भी है।
📅 अनंत चतुर्दशी 2026 कब है? शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 ✅ इस वर्ष यह पर्व बीत चुका है — अगले वर्ष की तिथि जल्द अपडेट होगी
इस पेज पर घर पर की जाने वाली पूरी पूजा विधि है। शुभ मुहूर्त, तिथि का समय और सही तारीख की पूरी जानकारी के लिए देखें: अनंत चतुर्दशी 2026 →
अनंत चतुर्दशी 2026 की तारीख अनंत चतुर्दशी पेज पर और विसर्जन की जानकारी गणेश विसर्जन पेज पर देखें।
अनंत पूजा सामग्री
- भगवान विष्णु का चित्र या शालिग्राम, चौकी, पीला कपड़ा, कलश
- अनंत सूत्र — कच्चे सूत या रेशम का धागा, हल्दी या कुमकुम से रंगा, जिसमें 14 गाँठें हों (बाज़ार में तैयार भी मिलता है)
- कुश (दर्भ) से बनी शेषनाग की आकृति (परंपरा हो तो), एक कटोरी में दूध या जल (क्षीरसागर का प्रतीक)
- पीले फूल, तुलसी दल, रोली, चंदन, अक्षत, मौली, धूप, घी का दीपक
- भोग: 14 पूरी / मालपुए, खीर, फल, पंचामृत
अनंत चतुर्दशी पूजा विधि — चरणबद्ध
- व्रत और संकल्प: सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। परंपरागत रूप से अनंत व्रत में बिना नमक का भोजन या फलाहार किया जाता है।
- स्थापना: चौकी पर कलश स्थापित करें। उसके पास कटोरी में दूध/जल रखें — यह क्षीरसागर है। उसमें कुश की शेषनाग आकृति और भगवान विष्णु का चित्र रखें।
- गणेश स्मरण करके भगवान अनंत (विष्णु) का ध्यान करें: “नमस्ते देव देवेश नमस्ते धरणीधर। नमस्ते सर्वनागेन्द्र नमस्ते पुरुषोत्तम॥”
- पूजन: भगवान को जल, चंदन, पीले फूल, तुलसी और धूप-दीप अर्पित करें।
- अनंत सूत्र पूजन: 14 गाँठों वाले धागे को भगवान के सामने रखकर रोली-चंदन-अक्षत से पूजें। हर गाँठ पर भगवान के एक नाम का स्मरण किया जाता है।
- कथा: अनंत व्रत कथा (कौंडिन्य ऋषि और सुशीला की कथा) सुनें।
- सूत्र बाँधना: मंत्र बोलते हुए अनंत सूत्र बाँधें — पुरुष दाहिनी भुजा पर, महिलाएँ बाईं भुजा पर: “अनंत संसार महासमुद्रे मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव। अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्यनंतसूत्राय नमो नमस्ते॥”
- भोग और आरती: 14 पूरी/मालपुए और खीर का भोग लगाएँ, आरती करें। भोग का आधा हिस्सा ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को दान करने की परंपरा है।
अनंत व्रत कथा (संक्षेप में)
ब्राह्मण सुमंत की पुत्री सुशीला का विवाह कौंडिन्य ऋषि से हुआ। सुशीला ने अनंत व्रत करके 14 गाँठों वाला अनंत सूत्र बाँधा, जिससे घर में सुख-समृद्धि आई। कौंडिन्य ने अहंकार में उस धागे को जादू-टोना समझकर तोड़कर आग में डाल दिया। इसके बाद उनका सारा धन-वैभव नष्ट हो गया। पश्चाताप में कौंडिन्य भगवान अनंत को खोजते हुए वन-वन भटके। अंत में भगवान ने वृद्ध ब्राह्मण के रूप में दर्शन देकर उन्हें क्षमा किया और 14 वर्ष तक अनंत व्रत करने को कहा। व्रत करने से उनका सब कुछ लौट आया। युधिष्ठिर को भी श्रीकृष्ण ने वनवास के समय यही व्रत बताया था।
ध्यान रखें
- ✅ अनंत सूत्र कम से कम 14 दिन या अगले अनंत चतुर्दशी तक पहनने की परंपरा है; उतारने पर उसे बहते जल या पेड़ की जड़ में विसर्जित करें।
- ✅ इसी दिन गणपति विसर्जन हो तो पहले अनंत पूजा करें, फिर विसर्जन की उत्तर-पूजा।
- ❌ अनंत सूत्र को फेंकें या जलाएँ नहीं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अनंत सूत्र में कितनी गाँठें होती हैं? (How many knots in Anant Sutra?)
अनंत सूत्र में 14 गाँठें होती हैं, जो 14 लोकों या भगवान के 14 स्वरूपों का प्रतीक मानी जाती हैं।
अनंत सूत्र किस हाथ में बाँधें? (Which hand to tie the sutra?)
पुरुष दाहिनी भुजा पर और महिलाएँ बाईं भुजा पर अनंत सूत्र बाँधती हैं।
अनंत चतुर्दशी पर किसकी पूजा होती है? (Who is worshipped?)
भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप (शेषनाग पर विराजमान) की पूजा होती है।
अनंत सूत्र कब तक पहनें? (How long to wear it?)
कम से कम 14 दिन या अगली अनंत चतुर्दशी तक; उतारने पर बहते जल में विसर्जित करें।
क्या अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन एक ही दिन हैं? (Is Ganesh visarjan on the same day?)
हाँ, दस दिन के गणेशोत्सव का विसर्जन अनंत चतुर्दशी को ही होता है।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।