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भगवान विष्णु पूजा विधि

📅 21 अगस्त 2026 ⏱️ 4 मिनट पढ़ने का समय
भगवान विष्णु पूजा विधि के लिए सजी पूजा चौकी और प्रमुख सामग्री

भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता हैं। उनकी पूजा विशेष रूप से गुरुवार, हर एकादशी, पूर्णिमा (सत्यनारायण रूप में) और पूरे कार्तिक मास में की जाती है। विष्णु पूजा की पहचान है — पीला रंग, तुलसी दल, शंख और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”। नीचे घर पर की जाने वाली सरल विष्णु पूजा विधि है।

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विष्णु पूजा सामग्री

  • भगवान विष्णु / लक्ष्मी-नारायण का चित्र या शालिग्राम शिला
  • पीला कपड़ा, पीले फूल (गेंदा, कनेर), तुलसी दल, केले
  • शंख (दक्षिणावर्ती हो तो विशेष), घंटी, घी का दीपक, धूप
  • पीला चंदन / केसर, हल्दी, अक्षत, जनेऊ, मौली
  • भोग: चने की दाल-गुड़, पीली मिठाई (बेसन लड्डू), खीर, पंचामृत, फल

विष्णु पूजा विधि — चरणबद्ध

  1. स्नान और वस्त्र: सुबह स्नान करके संभव हो तो पीले वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पूर्व या उत्तर-पूर्व में हो।
  2. संकल्प: हाथ में जल, अक्षत, तुलसी लेकर पूजा या व्रत का संकल्प लें।
  3. ध्यान: “शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं, वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥”
  4. शंख पूजन: शंख में जल भरकर उस पर चंदन-फूल अर्पित करें। इसी शंख के जल से भगवान / शालिग्राम का अभिषेक करें (विष्णु पूजा में शंख से अभिषेक शुभ है, शिव पूजा में नहीं)।
  5. श्रृंगार: पीला चंदन, पीले फूल, जनेऊ और तुलसी दल अर्पित करें — शालिग्राम पर तुलसी अवश्य रखें।
  6. मंत्र जप: द्वादशाक्षर मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” 108 बार, या “ॐ नमो नारायणाय”। समय हो तो विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  7. भोग: चने की दाल-गुड़, बेसन के लड्डू, केले या खीर — तुलसी दल रखकर।
  8. आरती: “ॐ जय जगदीश हरे” आरती करें और शंख बजाएँ।
  9. परिक्रमा: भगवान विष्णु की चार परिक्रमा करने की परंपरा है।

गुरुवार व्रत विधि (संक्षेप में)

गुरुवार को पीले वस्त्र पहनकर केले के पेड़ में हल्दी-चने की दाल और गुड़ मिला जल चढ़ाया जाता है, फिर विष्णु पूजा और बृहस्पतिवार व्रत कथा होती है। व्रत में एक समय पीला भोजन (बेसन, चने की दाल) किया जाता है और नमक से परहेज़ रखा जाता है। 16 गुरुवार के बाद उद्यापन करने की परंपरा है।

एकादशी पर विष्णु पूजा

एकादशी को चावल नहीं खाए जाते, दिन भर हरिनाम और रात को जागरण किया जाता है, और द्वादशी को पारण समय में व्रत खोला जाता है। विशेष एकादशियों की विधि: देवउठनी · देवशयनी · निर्जला। खाटू धाम में भी हर एकादशी पर बाबा श्याम के विशेष दर्शन होते हैं।

विष्णु के दस अवतार

मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध (कई परंपराओं में बलराम) और कल्कि — इनकी जयंतियों पर भी विष्णु पूजा होती है, जैसे नरसिंह जयंती, परशुराम जयंती और राम नवमी।

ध्यान रखें

  • ✅ विष्णु पूजा में तुलसी और शंख अनिवार्य-से माने जाते हैं।
  • ❌ विष्णु पूजा में अक्षत के रूप में टूटे चावल और मदार/धतूरा नहीं चढ़ाए जाते।
  • ❌ एकादशी को तुलसी न तोड़ें — एक दिन पहले तोड़कर रखें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवान विष्णु की पूजा किस दिन करें? (Which day for Vishnu puja?)

गुरुवार, हर एकादशी और पूर्णिमा विष्णु पूजा के विशेष दिन हैं; कार्तिक मास में रोज़ पूजा का महत्व है।

विष्णु जी का मूल मंत्र क्या है? (Main Vishnu mantra?)

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” (द्वादशाक्षर) और “ॐ नमो नारायणाय” (अष्टाक्षर) सबसे प्रचलित मंत्र हैं।

विष्णु पूजा में शंख क्यों बजाते हैं? (Why is conch used?)

शंख भगवान विष्णु का प्रिय आयुध है; विष्णु पूजा में शंख से अभिषेक और शंखनाद शुभ माना जाता है।

शालिग्राम पर क्या चढ़ाएँ? (What to offer on Shaligram?)

जल/पंचामृत से अभिषेक, चंदन, पीले फूल और तुलसी दल — शालिग्राम पूजा में तुलसी अवश्य होती है।

गुरुवार व्रत में क्या खाएँ? (What to eat on Thursday fast?)

एक समय पीला भोजन — बेसन, चने की दाल, केला — और नमक से परहेज़ की परंपरा है।

यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।

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