छठ पूजा विधि


छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का चार दिन का कठोर व्रत है, जो कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक चलता है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश-विदेश में बसे पूर्वांचल के परिवार इसे विशेष श्रद्धा से मनाते हैं। व्रती लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। नीचे चारों दिनों की विधि दी गई है।
📅 छठ 2026 कब है? रविवार, 15 नवंबर 2026 ⏳ 18 दिन बाकी
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छठ पूजा के चार दिन
| दिन | नाम | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| पहला (चतुर्थी) | नहाय-खाय | स्नान, घर की शुद्धि, कद्दू-भात और चने की दाल का सात्विक भोजन |
| दूसरा (पंचमी) | खरना | दिन भर उपवास, शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद, फिर निर्जला व्रत शुरू |
| तीसरा (षष्ठी) | संध्या अर्घ्य | घाट पर डूबते सूर्य को अर्घ्य |
| चौथा (सप्तमी) | उषा अर्घ्य और पारण | उगते सूर्य को अर्घ्य, प्रसाद और पारण |
2026 की तारीखें और अर्घ्य का समय छठ पूजा 2026 पेज पर देखें।
छठ पूजा सामग्री
- बाँस का सूप और दौरा (टोकरी) — हर व्रती के लिए अलग सूप
- ठेकुआ (गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बना मुख्य प्रसाद), चावल के लड्डू (कसार)
- मौसमी फल: केला का घौद, गन्ना, नारियल (जटा वाला), डाभ नींबू, सिंघाड़ा, शकरकंद, सुथनी, अदरक और हल्दी का पौधा
- दूध और जल (अर्घ्य के लिए लोटा या पीतल का पात्र), गंगाजल
- दीपक, घी, सिंदूर, रोली, अक्षत, फूल, नए वस्त्र (व्रती के लिए बिना सिले या नए कपड़े)
- मिट्टी का चूल्हा और आम की लकड़ी (खरना और प्रसाद पकाने के लिए, जहाँ संभव हो)
छठ पूजा विधि — दिन के अनुसार
दिन 1: नहाय-खाय
व्रती सुबह नदी, तालाब या घर पर गंगाजल मिले पानी से स्नान करते हैं। घर और रसोई पूरी तरह शुद्ध की जाती है। दोपहर में सेंधा नमक वाला कद्दू (लौकी) की सब्ज़ी, चने की दाल और भात बनाकर पहले व्रती ग्रहण करते हैं, फिर परिवार। इस दिन से लहसुन-प्याज पूरी तरह बंद रहता है।
दिन 2: खरना
व्रती दिन भर उपवास रखते हैं। शाम को मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़ की खीर (रसियाव) और रोटी बनाई जाती है। छठी मैया को भोग लगाकर व्रती यही प्रसाद ग्रहण करते हैं और इसके बाद से लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है। इसी रात ठेकुआ और प्रसाद की तैयारी भी शुरू होती है।
दिन 3: संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को)
- दोपहर में सूप और दौरे में ठेकुआ, फल, गन्ना, नारियल सजाएँ और घर के पुरुष सिर पर दौरा रखकर घाट तक ले जाते हैं।
- घाट पर व्रती पानी में खड़े होकर सूर्य की ओर मुख करते हैं।
- सूर्यास्त के समय सूप में दीपक रखकर दूध और जल से अर्घ्य दिया जाता है। परिवार के सदस्य लोटे से सूप पर दूध-जल की धार डालते हैं।
- छठी मैया के गीत गाए जाते हैं और घाट पर दीप जलाए जाते हैं। कई परिवार रात को घर के आँगन में “कोसी भराई” करते हैं।
दिन 4: उषा अर्घ्य और पारण
- भोर से पहले फिर घाट पर पहुँचें और उगते सूर्य को उसी तरह अर्घ्य दें।
- मंत्र: “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” का जप करते हुए परिवार और संतान के कल्याण की प्रार्थना करें।
- अर्घ्य के बाद घाट पर प्रसाद बाँटा जाता है, व्रती बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं।
- घर लौटकर व्रती अदरक-गुड़ या प्रसाद और जल ग्रहण करके पारण करते हैं।
छठ पूजा का महत्व
छठ सूर्य देव की उपासना का पर्व है, जिन्हें जीवन, आरोग्य और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। छठी मैया को संतान की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि रामायण काल में माता सीता और महाभारत काल में कुंती व द्रौपदी ने भी सूर्य उपासना की थी। यह पर्व प्रकृति — नदी, फल, बाँस और मिट्टी — के प्रति कृतज्ञता का भी प्रतीक है।
छठ के नियम
- ✅ प्रसाद बनाने में पूरी शुद्धता — नहाकर, नए या धुले बर्तन में, बिना चखे।
- ✅ घाट पर बच्चों और बुज़ुर्गों को गहरे पानी से दूर रखें; भीड़ में प्रशासन के निर्देश मानें।
- ❌ चार दिन तक लहसुन-प्याज, मांसाहार और नशा पूरी तरह वर्जित।
- ❌ बीमार या कमज़ोर व्यक्ति डॉक्टर की सलाह के बिना निर्जला व्रत न रखें — परिवार का कोई और सदस्य व्रत रख सकता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
छठ पूजा कितने दिन की होती है? (How many days is Chhath Puja?)
छठ पूजा चार दिन की होती है — नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य।
छठ में ठेकुआ क्यों बनाया जाता है? (Why is thekua made?)
ठेकुआ गेहूँ, गुड़ और घी से बना शुद्ध प्रसाद है जो सूप में छठी मैया और सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। यह छठ का सबसे प्रमुख प्रसाद है।
खरना क्या होता है? (What is Kharna?)
खरना छठ का दूसरा दिन है, जब व्रती शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद खाकर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करते हैं।
क्या घर पर छठ पूजा कर सकते हैं? (Can Chhath be done at home?)
हाँ, घाट न हो तो छत या आँगन में पानी का छोटा कुंड / टब बनाकर उसमें खड़े होकर अर्घ्य दिया जा सकता है।
छठ में किसको अर्घ्य दिया जाता है? (Who is given arghya?)
सूर्य देव को — तीसरे दिन डूबते सूर्य को और चौथे दिन उगते सूर्य को दूध-जल से अर्घ्य दिया जाता है।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।