हरियाली तीज पूजा विधि


हरियाली तीज (श्रावणी तीज, सिंधारा तीज) श्रावण शुक्ल तृतीया को सावन की हरियाली के बीच मनाई जाती है। सुहागिनें शिव-पार्वती के पुनर्मिलन की स्मृति में व्रत रखती हैं, हरे वस्त्र-चूड़ियाँ पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और झूला झूलती हैं। राजस्थान में, विशेषकर जयपुर में, तीज माता की सवारी इस पर्व की शान है।
📅 हरियाली तीज 2027 कब है? बुधवार, 4 अगस्त 2027 ⏳ 280 दिन बाकी
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हरियाली तीज की परंपराएँ
| परंपरा | क्या होता है |
|---|---|
| सिंधारा | मायके या ससुराल से बहू-बेटी को मिठाई (घेवर), कपड़े, चूड़ियाँ, मेहंदी भेजना — एक दिन पहले |
| श्रृंगार | हरी साड़ी/लहरिया, हरी चूड़ियाँ, मेहंदी, सोलह श्रृंगार |
| झूला | पेड़ों पर झूले डालकर सावन के गीत (कजरी, मल्हार) |
| पूजा | शिव-पार्वती (तीज माता) की पूजा और व्रत कथा |
पूजा सामग्री
- माता पार्वती (तीज माता) और भगवान शिव का चित्र या मिट्टी की प्रतिमा, चौकी, हरा/लाल कपड़ा
- सुहाग सामग्री — हरी चूड़ियाँ, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, महावर, चुनरी
- बेलपत्र, धतूरा, शिव जी के लिए जनेऊ; माता के लिए लाल-हरे फूल
- रोली, हल्दी, अक्षत, कलश, नारियल, घी का दीपक, धूप
- भोग: घेवर, मालपुआ, खीर, फल
हरियाली तीज पूजा विधि — चरणबद्ध
- व्रत का संकल्प: सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें — परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहार।
- श्रृंगार: हरे या लहरिया वस्त्र, हरी चूड़ियाँ और मेहंदी के साथ सोलह श्रृंगार करें।
- स्थापना: पूजा स्थान पर चौकी पर शिव-पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और कलश रखें।
- गणेश पूजन के बाद शिव जी को जल, बेलपत्र, धतूरा, चंदन और जनेऊ अर्पित करें।
- माता पार्वती को चुनरी, सुहाग सामग्री, फूल और मेहंदी अर्पित करें — “ॐ उमायै नमः” / “ॐ पार्वत्यै नमः”।
- कथा: तीज व्रत कथा सुनें — माता पार्वती की 108 जन्मों की तपस्या और शिव जी से पुनर्मिलन की कथा।
- भोग और आरती: घेवर, खीर, फल का भोग लगाकर शिव-पार्वती की आरती करें।
- बायना: सास या घर की बड़ी महिला को सुहाग सामग्री, मिठाई और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें।
- पारण: शाम को पूजा के बाद या अगले दिन सुबह परंपरा अनुसार व्रत खोलें।
हरियाली तीज की कथा
मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 108 जन्मों तक तप किया। श्रावण शुक्ल तृतीया को भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसी पुनर्मिलन की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है, इसलिए सुहागिनें अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याएँ अच्छे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं।
जयपुर की तीज सवारी
राजस्थान में तीज सावन का सबसे बड़ा लोक-उत्सव है। जयपुर में सिटी पैलेस से तीज माता की पारंपरिक सवारी निकलती है, जिसमें सजे हाथी-घोड़े, लोक नर्तक और हज़ारों लोग शामिल होते हैं। सावन में खाटू श्याम जी की यात्रा के साथ जयपुर रुकने वाले भक्त इसे देख सकते हैं — जयपुर से खाटू रूट।
तीन तीज — अंतर
- हरियाली तीज — श्रावण शुक्ल तृतीया (झूला, हरियाली, सिंधारा)
- कजरी तीज — भाद्रपद कृष्ण तृतीया (नीमड़ी माता पूजा, कजरी गीत)
- हरतालिका तीज — भाद्रपद शुक्ल तृतीया (निर्जला व्रत, रेत के शिव-पार्वती, जागरण)
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरियाली तीज पर हरा रंग क्यों पहनते हैं? (Why wear green on Hariyali Teej?)
सावन की हरियाली, प्रकृति की समृद्धि और सौभाग्य के प्रतीक के रूप में हरे वस्त्र और हरी चूड़ियाँ पहनी जाती हैं।
सिंधारा क्या होता है? (What is Sindhara?)
तीज से एक दिन पहले बहू-बेटी को मायके या ससुराल से भेजी जाने वाली मिठाई, वस्त्र, चूड़ियाँ और मेहंदी को सिंधारा कहते हैं।
हरियाली तीज में किसकी पूजा होती है? (Who is worshipped?)
माता पार्वती (तीज माता) और भगवान शिव की पूजा होती है।
हरियाली तीज पर कौन-सी मिठाई खास है? (Which sweet is special?)
राजस्थान और उत्तर भारत में घेवर तीज की सबसे प्रसिद्ध मिठाई है।
हरियाली तीज और हरतालिका तीज में अंतर? (Hariyali vs Hartalika?)
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को उत्सव-झूले के साथ, और हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को निर्जला व्रत-जागरण के साथ मनाई जाती है।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।