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जगन्नाथ रथ यात्रा पूजा विधि

📅 22 अगस्त 2026 ⏱️ 3 मिनट पढ़ने का समय
जगन्नाथ रथ यात्रा पूजा विधि के लिए सजी पूजा चौकी और प्रमुख सामग्री

जगन्नाथ रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को ओडिशा के पुरी में निकलती है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा तीन विशाल रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से लगभग 3 किमी दूर गुंडिचा मंदिर (मौसी का घर) जाते हैं। यह विश्व की सबसे प्राचीन और विशाल रथ यात्राओं में गिनी जाती है। पुरी न जा सकें तो अपने शहर के इस्कॉन या जगन्नाथ मंदिर की यात्रा में शामिल हों या घर पर पूजा करें।

📅 जगन्नाथ रथ यात्रा 2027 कब है? सोमवार, 5 जुलाई 2027   ⏳ 250 दिन बाकी

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया — 5 जुलाई सुबह 4:51 से 6 जुलाई रात 1:14 तक (IST)। सभी व्रत-त्योहार: हिंदू कैलेंडर →

तीनों रथ

रथ देवता पहचान
नंदीघोष भगवान जगन्नाथ लाल-पीला कपड़ा, 16 पहिए, सबसे ऊँचा
तालध्वज बलभद्र जी लाल-हरा कपड़ा, 14 पहिए, सबसे आगे चलता है
दर्पदलन देवी सुभद्रा लाल-काला कपड़ा, 12 पहिए, बीच में

रथ हर वर्ष नई लकड़ी से बनाए जाते हैं। यात्रा से पहले पुरी के गजपति राजा सोने की झाड़ू से रथों का मार्ग बुहारते हैं — इसे छेरा पहरा कहते हैं।

रथ यात्रा से जुड़ा पूरा उत्सव-क्रम

  1. स्नान पूर्णिमा (ज्येष्ठ पूर्णिमा): 108 घड़ों से देवताओं का स्नान।
  2. अनवसर (लगभग 15 दिन): मान्यता है कि भगवान “अस्वस्थ” रहते हैं; सामान्य दर्शन बंद रहते हैं।
  3. नेत्रोत्सव: रथ यात्रा से एक दिन पहले पुनः दर्शन।
  4. रथ यात्रा (आषाढ़ शुक्ल द्वितीया): गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान।
  5. हेरा पंचमी: माँ लक्ष्मी भगवान को ढूँढने गुंडिचा आती हैं।
  6. बहुदा यात्रा (लगभग 9वें दिन): श्रीमंदिर वापसी; सुना बेशा में स्वर्ण श्रृंगार।
  7. नीलाद्रि बिजे: देवता पुनः गर्भगृह में प्रवेश करते हैं।

घर पर पूजा सामग्री

  • जगन्नाथ-बलभद्र-सुभद्रा का चित्र या छोटी काष्ठ प्रतिमा, छोटा सजाया हुआ रथ (वैकल्पिक)
  • चंदन, तुलसी दल, फूल माला, धूप, घी का दीपक
  • भोग: खिचड़ी, मालपुआ, खाजा, पोड़ा पीठा, फल, दही — या जो सात्विक भोग संभव हो

घर पर पूजा विधि

  1. स्नान कर तीनों देवताओं का चित्र चौकी पर स्थापित करें।
  2. चंदन, तुलसी, फूल अर्पित कर दीपक जलाएँ।
  3. मंत्र: “ॐ श्री जगन्नाथाय नमः” या हरे कृष्ण महामंत्र का जप करें।
  4. भोग लगाकर आरती करें; “जगन्नाथ स्वामी नयनपथगामी भवतु मे” (जगन्नाथाष्टकम्) का पाठ करें।
  5. छोटे रथ को घर या आँगन में खींचकर प्रतीकात्मक यात्रा करें; बच्चों को कथा सुनाएँ।
  6. प्रसाद सबमें बाँटें — जगन्नाथ प्रसाद “महाप्रसाद” में ऊँच-नीच का भेद नहीं माना जाता।

ध्यान रखें

  • ✅ पुरी में लाखों की भीड़ होती है — बुज़ुर्ग और बच्चे रथ के बहुत पास न जाएँ; प्रशासन के निर्देश मानें।
  • ✅ जगन्नाथ जी श्रीकृष्ण का रूप हैं — कृष्ण पूजा विधि भी देखें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगन्नाथ रथ यात्रा कब निकलती है? (When is Rath Yatra?)

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को, जो प्रायः जून-जुलाई में आती है।

रथ यात्रा में कौन-कौन से देवता होते हैं? (Which deities?)

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा — अलग-अलग रथों नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन पर।

गुंडिचा मंदिर में भगवान कितने दिन रहते हैं? (How long at Gundicha?)

लगभग सात दिन; फिर बहुदा यात्रा से श्रीमंदिर लौटते हैं।

घर पर रथ यात्रा की पूजा कैसे करें? (How to celebrate at home?)

तीनों देवताओं का चित्र रखकर चंदन, तुलसी, फूल और खिचड़ी-मालपुआ जैसा भोग अर्पित करें, आरती करें और छोटा रथ खींचें।

अनवसर क्या है? (What is Anavasara?)

स्नान पूर्णिमा के बाद लगभग 15 दिन की अवधि, जब परंपरा अनुसार भगवान विश्राम करते हैं और सामान्य दर्शन नहीं होते।

यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।

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