मुखपृष्ठ पूजा विधि चंद्रघंटा पूजा विधि | Chandraghanta Puja Vidhi Day 3

चंद्रघंटा पूजा विधि | Chandraghanta Puja Vidhi Day 3

📅 13 अगस्त 2026 ⏱️ 5 मिनट पढ़ने का समय

🔱 श्रेणी: नवरात्रि — दिन 3  |  🎨 रंग: लाल/सुनहरा  |  🥛 भोग: दूध/खीर
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माँ चंद्रघंटा पूजा विधि — नवरात्रि तीसरा दिन | Chandraghanta Puja Vidhi

माँ चंद्रघंटा दुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं — शौर्य, साहस और युद्ध-कौशल की प्रतीक। मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारण करने के कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। दस भुजाओं में विविध अस्त्र-शस्त्र धारण किए, सिंह पर सवार यह देवी शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली मानी जाती हैं। इनकी पूजा से भय का नाश और आत्मबल की प्राप्ति होती है, ऐसी मान्यता है।

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सामग्री सूची

🕯️ घी का दीपक🌺 लाल फूल🥛 दूध/खीर📿 जपमाला🪔 धूप-अगरबत्ती🌾 अक्षत, रोली🥥 नारियल🍯 शहद🥛 पंचामृत

पूजा विधि — विस्तृत चरण

1. जागरण व स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और यथासंभव लाल या सुनहरे रंग के वस्त्र धारण करें — यह इस दिन का शुभ रंग माना जाता है।
2. पूजा स्थान शुद्धि: स्थान को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें; कलश यथावत रहने दें।
3. मूर्ति/चित्र स्थापन: कलश के पास माँ चंद्रघंटा की मूर्ति या चित्र रखें, मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर।
4. दीप-धूप प्रज्ज्वलन: घी का दीपक और धूप जलाएं।
5. संकल्प: अपना नाम, गोत्र और आज की पूजा का उद्देश्य मन में या स्पष्ट रूप से बोलें।
6. पंचामृत अभिषेक: दूध, दही, शहद, घी और शक्कर मिलाकर अभिषेक करें, फिर स्वच्छ जल और वस्त्र से पोंछें।
7. तिलक व पुष्प अर्पण: रोली-चंदन तिलक लगाएं, लाल पुष्प अर्पित करें।
8. भोग अर्पण: दूध या दूध से बनी खीर का भोग चढ़ाएं।
9. मंत्र जाप: “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” का माला से 108 बार जाप करें।
10. पाठ व आरती: दुर्गा सप्तशती/चालीसा का पाठ करें, आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

माँ चंद्रघंटा को क्या अर्पित करें

वस्तु महत्व
दूध/खीर सर्वाधिक प्रिय भोग — शौर्य के साथ कोमलता का प्रतीक
लाल फूल शक्ति और साहस का प्रतीक रंग
पंचामृत अभिषेक हेतु आवश्यक
शहद मधुरता के साथ दृढ़ता का सह-प्रतीक माना जाता है
घी का दीपक सात्विक पूजा की मूल भेंट

व्रत के दौरान सात्विक आहार का पालन करें — प्याज, लहसुन, मांसाहार और सामान्य नमक से परहेज करें।

चंद्रघंटा का महत्व — Significance

पौराणिक कथा के अनुसार, पार्वती जी ने भगवान शिव से विवाह के पश्चात अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया, जिससे उनका यह नया स्वरूप “चंद्रघंटा” कहलाया। यह स्वरूप शांति और युद्ध दोनों का संतुलन दर्शाता है — एक ओर चंद्रमा की शीतलता, दूसरी ओर घंटे की तीव्र ध्वनि जो नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाती है। मान्यता है कि इनकी घंटे जैसी ध्वनि सुनकर राक्षस और नकारात्मक शक्तियां भयभीत होकर भाग जाती हैं।

तीसरे दिन इनकी पूजा का संदेश यह है कि आंतरिक शांति बनाए रखते हुए भी बाहरी चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना किया जा सकता है — यह सौम्यता और शक्ति के संतुलन का प्रतीक स्वरूप माना जाता है।

मंत्र का अर्थ — Mantra Meaning

“ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” का सरल अर्थ है — “उन देवी को नमन जो मस्तक पर घंटे के आकार का चंद्र धारण करती हैं”। इस मंत्र का जाप करते समय मन में यह भाव रखा जाता है कि जिस प्रकार घंटे की ध्वनि नकारात्मकता को दूर भगाती है, उसी प्रकार हमारे मन से भी भय और आशंका दूर हो। मंत्र को शांत, स्थिर स्वर में उच्चारित करना अधिक प्रभावी माना जाता है।

ध्यान विधि — कैसे करें एकाग्रता

आंखें बंद कर माँ चंद्रघंटा के स्वर्णिम, तेजस्वी स्वरूप की कल्पना करें — मस्तक पर अर्धचंद्र, दस भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र, सिंह पर आरूढ़। मन में यह भाव लाएं कि उनकी शक्ति हमारे भीतर के भय और झिझक को समाप्त कर दे। कुछ क्षण इस दृश्य पर एकाग्रचित्त होकर बैठना पूजा के प्रभाव को गहरा करता है।

व्यावहारिक सुझाव

  • यदि सिंह पर सवार मूर्ति उपलब्ध न हो, केवल चित्र से भी ध्यान किया जा सकता है — भाव महत्वपूर्ण है, वस्तु नहीं।
  • लाल वस्त्र न मिलने पर कोई भी हल्का शुभ रंग पहना जा सकता है।
  • व्रत रखने वालों के लिए दूध आधारित फलाहार इस दिन उपयुक्त माना जाता है।

चंद्रघंटा पूजा से जुड़े प्रश्न

Q: माँ चंद्रघंटा की पूजा से क्या लाभ माना जाता है?

मान्यता है कि इनकी उपासना से भय और मानसिक अशांति दूर होती है, आत्मबल और साहस बढ़ता है — विशेष रूप से जो लोग किसी संकट या डर का सामना कर रहे हों, उनके लिए यह पूजा लाभकारी मानी जाती है।

Q: What does the name Chandraghanta signify?

The name comes from the bell-shaped half-moon (chandra = moon, ghanta = bell) she wears on her forehead — a symbol associated with courage and readiness to confront negativity or fear.

Q: माँ चंद्रघंटा को शौर्य की देवी क्यों कहा जाता है?

दस भुजाओं में विविध अस्त्र-शस्त्र धारण करने और सिंह पर सवार होने के कारण यह देवी युद्ध-कौशल और निर्भयता की प्रतीक मानी जाती हैं — इनकी मुद्रा सदैव युद्ध के लिए तत्पर योद्धा जैसी दर्शाई जाती है।

Q: Is there a specific time of day considered best for worshipping Maa Chandraghanta?

Like the other days of Navratri, morning worship after the daily aarti to the kalash is the common practice — there is no additional time restriction specific to this day beyond the general daily puja routine.

॥ जय माता दी ॥

Source: Traditional Navratri puja-vidhi practice, Drik Panchang | Updated August 2026

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