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शनिदेव पूजा विधि

📅 22 अगस्त 2026 ⏱️ 4 मिनट पढ़ने का समय
शनिदेव पूजा विधि के लिए सजी पूजा चौकी और प्रमुख सामग्री

शनिदेव सूर्य और छाया के पुत्र, न्याय और कर्मफल के देवता हैं। मान्यता है कि वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं — इसलिए शनि पूजा का असली भाव है अनुशासन, ईमानदारी, परिश्रम और ज़रूरतमंदों की सेवा। शनि पूजा शनिवार, शनि अमावस्या और शनि जयंती (ज्येष्ठ अमावस्या) पर विशेष मानी जाती है, और साढ़ेसाती-ढैया में लोग विशेष रूप से यह पूजा करते हैं।

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अगली शनि अमावस्या (शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या) अमावस्या 2026–27 तिथियों में देखें।

शनि पूजा सामग्री

  • सरसों का तेल, लोहे या मिट्टी का दीपक
  • काले तिल, काली उड़द, काला या नीला कपड़ा
  • नीले या काले फूल (अपराजिता, नीलकमल उपलब्ध हो तो), शमी पत्र
  • गुड़, तिल के लड्डू, उड़द की खिचड़ी या इमरती (भोग)
  • दान के लिए: काले तिल, उड़द, तेल, कंबल, जूते-चप्पल, लोहे की वस्तु

शनिवार शनि पूजा विधि — चरणबद्ध

  1. समय: शनि पूजा सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद करना अधिक प्रचलित है।
  2. स्नान और संकल्प: स्नान करके काले या नीले वस्त्र पहन सकते हैं; मन में संकल्प लें कि आप ईमानदारी और सेवा का पालन करेंगे।
  3. शनि मंदिर या पीपल: शनि मंदिर में शनिदेव की शिला पर सरसों का तेल चढ़ाएँ, या पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करके सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
  4. अर्पण: काले तिल, काली उड़द, नीले फूल और शमी पत्र अर्पित करें।
  5. मंत्र जप: “ॐ शं शनैश्चराय नमः” — 108 बार; या शनि बीज मंत्र “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”।
  6. स्तुति: “नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥” या शनि चालीसा / दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ।
  7. पीपल परिक्रमा: पीपल की सात परिक्रमा करें और कच्चा सूत लपेटें।
  8. दान: ज़रूरतमंद, श्रमिक या विकलांग व्यक्ति को काले तिल, उड़द, तेल, कंबल या जूते-चप्पल दान करें — शनि पूजा में दान और सेवा को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।

छाया दान

एक कटोरी में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें (छाया), फिर उस तेल को सिक्के सहित शनि मंदिर में दान कर दें या किसी ज़रूरतमंद को दें। इसे छाया दान कहते हैं और साढ़ेसाती में यह परंपरा प्रचलित है।

शनि और हनुमान जी

लोककथा के अनुसार हनुमान जी ने रावण की कैद से शनिदेव को मुक्त कराया था (एक अन्य कथा में उनका अहंकार तोड़ा था)। तब शनिदेव ने वचन दिया कि वे हनुमान भक्तों को कष्ट नहीं देंगे। इसीलिए शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ और हनुमान जी को तेल-सिंदूर चढ़ाना भी शनि शांति के लिए किया जाता है।

शनि पूजा के नियम

  • ❌ शनिदेव की प्रतिमा की आँखों में सीधे न देखें — परंपरा में उनके चरणों की ओर देखकर पूजा की जाती है।
  • ❌ शनिवार को तेल, लोहा, नमक और काले तिल खरीदना टालने की परंपरा है — इन्हें दान करें।
  • ✅ शनि पूजा का सबसे बड़ा उपाय — कर्मचारियों, मज़दूरों, बुज़ुर्गों और पशुओं के साथ न्याय और दया।
  • ❌ डर या अंधविश्वास में महँगे उपाय न खरीदें; श्रद्धा, सेवा और सत्कर्म ही पर्याप्त हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शनिदेव की पूजा किस दिन और समय करें? (When to worship Shani Dev?)

शनिवार को, सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद; शनि अमावस्या और शनि जयंती विशेष दिन हैं।

शनिदेव का मंत्र क्या है? (What is Shani Dev’s mantra?)

“ॐ शं शनैश्चराय नमः” — 108 बार; बीज मंत्र “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”।

शनि पर तेल क्यों चढ़ाते हैं? (Why offer mustard oil?)

लोककथा में हनुमान जी से युद्ध के बाद शनिदेव की पीड़ा तेल लगाने से शांत हुई थी — तभी से सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा है।

शनिवार को क्या दान करें? (What to donate on Saturday?)

काले तिल, काली उड़द, सरसों का तेल, कंबल, जूते-चप्पल — ज़रूरतमंद, श्रमिक या विकलांग व्यक्ति को।

शनि की मूर्ति की आँखों में क्यों नहीं देखते? (Why not look into Shani’s eyes?)

परंपरा में शनिदेव की दृष्टि को प्रभावशाली माना जाता है, इसलिए पूजा में उनके चरणों की ओर देखकर प्रार्थना की जाती है।

यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।

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