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नरसिंह जयंती पूजा विधि

📅 21 अगस्त 2026 ⏱️ 4 मिनट पढ़ने का समय
नरसिंह जयंती पूजा विधि के लिए सजी पूजा चौकी और प्रमुख सामग्री

नृसिंह जयंती वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नृसिंह (आधे मनुष्य, आधे सिंह) के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। पुराणों के अनुसार भगवान ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए खंभे से प्रकट होकर संध्या काल में दैत्यराज हिरण्यकशिपु का वध किया था — इसलिए नृसिंह जयंती की मुख्य पूजा सायंकाल (संध्या) में की जाती है।

📅 नृसिंह जयंती 2027 कब है? मंगलवार, 18 मई 2027   ⏳ 202 दिन बाकी

वैशाख शुक्ल चतुर्दशी — 18 मई शाम 4:04 से 19 मई शाम 4:03 तक; संध्या पूजा 18 मई को (जयपुर सूर्यास्त 7:08)। सभी व्रत-त्योहार: हिंदू कैलेंडर →

कथा (संक्षेप)

हिरण्यकशिपु को ब्रह्मा जी से वरदान मिला था कि उसे न मनुष्य मार सके न पशु, न दिन में न रात में, न घर के भीतर न बाहर, न धरती पर न आकाश में, न किसी अस्त्र से न शस्त्र से। उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्त था, जिसे मारने के कई प्रयास — होलिका दहन की कथा सहित — विफल रहे। अंत में जब हिरण्यकशिपु ने खंभे पर प्रहार कर पूछा कि “कहाँ है तेरा विष्णु?”, तब भगवान नृसिंह रूप में प्रकट हुए और संध्या के समय, महल की देहली पर, अपनी गोद में रखकर, नखों से उसका वध किया — वरदान की हर शर्त का सम्मान करते हुए।

पूजा सामग्री

  • भगवान नृसिंह या लक्ष्मी-नृसिंह का चित्र
  • चंदन (शीतलता के लिए विशेष रूप से), लाल/पीले फूल, तुलसी दल
  • पंचामृत, गंगाजल, घी का दीपक, धूप, कपूर
  • भोग: पानक (गुड़-पानी में इलायची व काली मिर्च का शर्बत), कोसंबरी/भीगी मूंग दाल, फल, खीर
  • दान के लिए: तिल, अन्न, वस्त्र, जल-कलश

पूजा विधि — चरणबद्ध

  1. व्रत संकल्प: प्रातः स्नान कर दिन भर व्रत (निराहार या फलाहार) का संकल्प लें।
  2. दिन में: भगवान विष्णु का सामान्य पूजन, नाम जप और शांत रहें।
  3. संध्या पूजा: सूर्यास्त के आसपास संध्या काल में मुख्य पूजा करें — भगवान को पंचामृत से अभिषेक कर चंदन का लेप लगाएँ (उग्र रूप को शीतल करने की परंपरा)।
  4. मंत्र: “ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥” — 11, 21 या 108 बार।
  5. पाठ: नृसिंह कवच या प्रह्लाद कृत नृसिंह स्तुति (भागवत पुराण, सप्तम स्कंध) का पाठ करें।
  6. भोग व आरती: पानक और फल का भोग लगाकर आरती करें।
  7. रात्रि जागरण: भजन-कीर्तन करें।
  8. पारण: अगले दिन (पूर्णिमा) सूर्योदय के बाद दान देकर व्रत खोलें।

प्रमुख नृसिंह मंदिर

आंध्र प्रदेश के अहोबिलम (नव नृसिंह क्षेत्र) और सिंहाचलम (जहाँ वर्ष में केवल अक्षय तृतीया पर चंदन हटाकर निज रूप दर्शन होते हैं), तेलंगाना का यादगिरिगुट्टा और महाराष्ट्र का नीरा नृसिंहपुर — इन मंदिरों में नृसिंह जयंती पर विशेष उत्सव होते हैं।

ध्यान रखें

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नृसिंह जयंती कब मनाई जाती है? (When is Narasimha Jayanti?)

वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को, जो प्रायः मई में, बुद्ध पूर्णिमा से एक दिन पहले आती है।

नृसिंह जयंती की पूजा किस समय करें? (Puja timing)

संध्या काल (सूर्यास्त के आसपास) में, क्योंकि भगवान नृसिंह का प्राकट्य और हिरण्यकशिपु वध संध्या में हुआ माना जाता है।

नृसिंह भगवान को क्या भोग लगाएँ? (What bhog to offer?)

पानक (गुड़-पानी का इलायची-काली मिर्च वाला शर्बत), भीगी मूंग दाल, फल और खीर।

नृसिंह भगवान का मंत्र क्या है? (Narasimha mantra)

“ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥”

नृसिंह भगवान किसके अवतार हैं? (Whose avatar?)

भगवान विष्णु के दस अवतारों में चौथे अवतार।

यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।

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