हरतालिका तीज पूजा विधि


हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को रखा जाने वाला सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं का कठोर व्रत है। यह माता पार्वती की उस तपस्या की स्मृति है जिससे उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाया। व्रत निर्जला रखा जाता है, रेत या मिट्टी से शिव-पार्वती-गणेश की प्रतिमा बनाकर प्रदोष काल में पूजा होती है और रात भर जागरण किया जाता है।
📅 हरतालिका तीज 2027 कब है? शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 ⏳ 310 दिन बाकी
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हरतालिका तीज पूजा सामग्री
- काली मिट्टी या बालू (रेत) — शिवलिंग, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाने के लिए
- केले के पत्ते (मंडप के लिए), फूलों का छत्र
- बेलपत्र, धतूरा, आक, शमी पत्र, सफेद और लाल फूल
- माता पार्वती के लिए सुहाग पिटारी — चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, काजल, महावर, लाल चुनरी
- भगवान शिव के लिए जनेऊ; चंदन, रोली, अक्षत, कलश, नारियल
- फल, मिठाई, पंचामृत, घी का दीपक, धूप, कपूर
हरतालिका तीज पूजा विधि — चरणबद्ध
- संकल्प: सुबह स्नान करके निर्जला व्रत का संकल्प लें; कुंवारी कन्याएँ मनचाहे वर के लिए संकल्प लेती हैं।
- मंडप: शाम से पहले केले के पत्तों से मंडप बनाकर फूलों से सजाएँ।
- प्रतिमा निर्माण: काली मिट्टी या रेत से शिवलिंग, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाकर चौकी पर स्थापित करें।
- प्रदोष काल पूजा: सूर्यास्त के बाद पहले गणेश पूजन करें।
- शिव पूजन: जल, बेलपत्र, धतूरा, आक, शमी पत्र, चंदन और जनेऊ — “ॐ नमः शिवाय”।
- पार्वती पूजन: सुहाग पिटारी, चुनरी और लाल फूल — “ॐ उमायै नमः”। सुहाग सामग्री का एक भाग बाद में सास या किसी सुहागिन को दिया जाता है।
- कथा: हरतालिका व्रत कथा सुनें।
- आरती और जागरण: शिव-पार्वती की आरती करें और रात भर भजन-कीर्तन के साथ जागरण करें।
- विसर्जन और पारण: अगले दिन सुबह पूजा के बाद मिट्टी की प्रतिमाओं का जल में विसर्जन करें और प्रसाद से व्रत खोलें।
हरतालिका तीज की कथा (संक्षेप में)
राजा हिमालय की पुत्री पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाना चाहती थीं। पिता ने उनका विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया, तो पार्वती की सखियाँ उन्हें “हरकर” घने वन में ले गईं — इसी से नाम पड़ा हरत + आलिका (सखी)। वन में भाद्रपद शुक्ल तृतीया को पार्वती ने रेत का शिवलिंग बनाकर निर्जला व्रत और जागरण किया। प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया।
व्रत के नियम
- ✅ परंपरा में व्रत निर्जला और रात्रि जागरण के साथ रखा जाता है।
- ✅ एक बार व्रत शुरू करने पर हर वर्ष रखने की परंपरा है।
- ❌ गर्भवती या बीमार महिलाएँ डॉक्टर की सलाह के बिना निर्जला व्रत न रखें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरतालिका तीज का नाम कैसे पड़ा? (How did it get its name?)
“हरत” (हरण) और “आलिका” (सखी) से — सखियाँ पार्वती जी को वन में ले गई थीं।
हरतालिका तीज में किसकी पूजा होती है? (Who is worshipped?)
रेत या मिट्टी से बने भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा होती है।
हरतालिका तीज की पूजा किस समय करें? (When is the puja done?)
मुख्य पूजा प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद, फिर रात भर जागरण।
क्या कुंवारी लड़कियाँ यह व्रत रख सकती हैं? (Can unmarried girls keep it?)
हाँ, कुंवारी कन्याएँ मनचाहे जीवनसाथी के लिए यह व्रत रखती हैं।
हरतालिका और हरियाली तीज में क्या अंतर है? (Hartalika vs Hariyali Teej?)
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को झूले-हरियाली के उत्सव के साथ; हरतालिका भाद्रपद शुक्ल तृतीया को निर्जला व्रत और जागरण के साथ मनाई जाती है।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।