सीधा जवाब — अगला हरियाली अमावस्या
हरियाली अमावस्या 2027 कब है?
📅 सोमवार, 2 अगस्त 2027 (सोमवती अमावस्या) ⏳
- 🕉️ श्रावण अमावस्या — प्रारंभ: 1 अगस्त, 7:21 PM · समाप्त: 2 अगस्त, 3:35 PM
2026 में हरियाली अमावस्या 12 अगस्त 2026 को था — नीचे की विस्तृत जानकारी (पूजा विधि, कथा) हर वर्ष उपयोगी है। समय जयपुर (IST) के अनुसार खगोलीय गणना से।
हरियाली अमावस्या 2026
Hariyali Amavasya 2026 — तिथि, स्नान-दान, पितृ तर्पण, वृक्षारोपण परंपरा और सूर्य ग्रहण पर सूतक की स्थिति
सीधा जवाब / QUICK ANSWER
हरियाली अमावस्या 2026 बुधवार, 12 अगस्त 2026 को है। अमावस्या तिथि 12 अगस्त रात 1:52 बजे से रात 11:06 बजे तक रहती है — पूरा दिन स्नान, दान और तर्पण के लिए शुभ है। इसी दिन सूर्य ग्रहण है, पर वह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक मान्य नहीं होगा।
📅 12 अगस्त 2026 | 🗓️ बुधवार | 🌑 श्रावण अमावस्या | 🌳 वृक्षारोपण | ✅ सूतक नहीं
हरियाली अमावस्या 2026 कब है?
हरियाली अमावस्या 2026 बुधवार, 12 अगस्त 2026 को है। यह श्रावण मास की अमावस्या है, इसलिए इसे श्रावण अमावस्या या सावन अमावस्या भी कहा जाता है। 2026 में अमावस्या तिथि 12 अगस्त की रात 1:52 बजे शुरू होकर उसी दिन रात 11:06 बजे समाप्त होती है — यानी लगभग 21 घंटे। पूरा दिन धार्मिक कार्यों के लिए उपयुक्त है।
| विवरण | तिथि / समय |
|---|---|
| हरियाली अमावस्या 2026 | बुधवार, 12 अगस्त 2026 |
| अमावस्या तिथि प्रारंभ | 12 अगस्त 2026, रात 1:52 बजे |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 12 अगस्त 2026, रात 11:06 बजे |
| पूजा का समय | पूरा दिन शुभ — स्नान सूर्योदय से पहले |
| अन्य नाम | श्रावण अमावस्या, सावन अमावस्या, हरियाली अमावस |
| सूर्य ग्रहण | इसी दिन, पर भारत में दृश्य नहीं — सूतक मान्य नहीं |
समय दिल्ली के अनुसार है। तिथि आरंभ-समाप्ति के समय में स्रोत के अनुसार 2–3 मिनट का अंतर हो सकता है।
12 अगस्त को सूर्य ग्रहण है — क्या सूतक लगेगा?
नहीं। 12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा। भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण रात के समय होगा, जब सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा। ग्रहण का मार्ग आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी स्पेन से होकर गुज़रेगा।
वैदिक नियम है “यत्र दृश्यं, तत्र फलम्” — सूतक वहीं लागू होता है जहाँ ग्रहण आँखों से दिखाई दे। इसलिए भारत में मंदिर खुले रहेंगे, और अमावस्या का स्नान, दान, तर्पण तथा भोजन — सब सामान्य समय पर किया जा सकता है। विदेश में रहने वाले भक्त अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
हरियाली अमावस्या क्यों मनाई जाती है?
हरियाली अमावस्या प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और पितरों के स्मरण का पर्व है। सावन की वर्षा से धरती हरी हो जाती है — इसी हरियाली के कारण इस अमावस्या का नाम पड़ा। यह दिन तीन परंपराओं को एक साथ जोड़ता है: पितृ तर्पण, शिव आराधना और वृक्षारोपण।
अमावस्या को पितरों के निकट आने का दिन माना जाता है, इसलिए स्नान, तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व है। सावन शिवजी का महीना होने से इस दिन शिवलिंग का अभिषेक भी किया जाता है। किसान इस दिन खेती के औज़ारों की पूजा करके अच्छी फसल की प्रार्थना करते हैं।
अलग-अलग राज्यों में इसके अलग नाम हैं — महाराष्ट्र में गटारी अमावस्या, आंध्र प्रदेश में चुक्कला अमावस्या, और ओडिशा में चितलागी अमावस्या। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में यह हरियाली अमावस्या के नाम से ही प्रसिद्ध है।
हरियाली अमावस्या पर पेड़ क्यों लगाए जाते हैं?
हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण इस पर्व की सबसे विशिष्ट परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। व्यावहारिक दृष्टि से भी यह समय सही है — मानसून के बीच लगाया गया पौधा सबसे आसानी से जड़ पकड़ता है।
परंपरा में पीपल, बरगद, नीम, आँवला, तुलसी और बेल के पौधे लगाना विशेष शुभ माना जाता है। राजस्थान में इस दिन कई जगह मेले लगते हैं और सामूहिक वृक्षारोपण किया जाता है।
हरियाली अमावस्या की पूजा विधि क्या है?
हरियाली अमावस्या पर सूर्योदय से पहले स्नान करके पितरों का तर्पण और शिवजी का अभिषेक किया जाता है। इसके बाद दान, वृक्षारोपण और संध्या के समय दीपदान किया जाता है।
- स्नान — सूर्योदय से पहले स्नान करें। किसी पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिला लें।
- सूर्य अर्घ्य — तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करें।
- पितृ तर्पण — दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल और जल से पितरों को तर्पण दें। पिंडदान की परंपरा भी है।
- शिव अभिषेक — शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें। सावन का महीना होने से इसका विशेष महत्व है।
- वृक्षारोपण — पीपल, नीम, बरगद, आँवला या तुलसी का पौधा लगाएं और उसे जल दें।
- दान — अन्न, वस्त्र, तिल और जल का दान करें। ज़रूरतमंदों को भोजन कराना विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
- दीपदान — संध्या के समय पीपल के वृक्ष के नीचे और घर के मंदिर में दीपक जलाएं।
हरियाली अमावस्या के आसपास कौन-से पर्व हैं?
| तिथि | पर्व |
|---|---|
| 11 अगस्त | सावन शिवरात्रि — एक दिन पहले |
| 12 अगस्त | हरियाली अमावस्या |
| 15 अगस्त | हरियाली तीज — तीन दिन बाद |
| 17 अगस्त | नाग पंचमी |
हरियाली अमावस्या पर खाटू श्याम जी दर्शन
अमावस्या पर खाटू श्याम जी में दर्शन का समय सामान्य रहता है — 4:30 AM – 2:00 PM और 4:00 – 10:00 PM (दोपहर 2–4 बजे बंद)। चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, मंदिर सामान्य रूप से खुला रहेगा और कोई सूतक-संबंधी बदलाव नहीं होगा।
अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए दर्शन और दान करने की परंपरा है। ध्यान रहे कि इसके तीन दिन बाद हरियाली तीज और स्वतंत्रता दिवस एक साथ पड़ रहे हैं, इसलिए 15 अगस्त के आसपास भीड़ काफी बढ़ेगी। नज़दीकी स्टेशन रींगस जंक्शन (RGS) — 17 km; रींगस से खाटू ऑटो ₹150–200, शेयर्ड जीप ₹50, टैक्सी ₹300–500, लगभग 25 मिनट। ट्रेन शेड्यूल →
अमावस्या पर खाटू यात्रा की तैयारी
.ics file Google Calendar, Apple Calendar और Outlook तीनों में import होती है — हर त्योहार से एक दिन पहले reminder अपने आप मिलेगा।
FAQ — हरियाली अमावस्या 2026 / Hariyali Amavasya 2026
Q: हरियाली अमावस्या 2026 में कब है?
हरियाली अमावस्या बुधवार, 12 अगस्त 2026 को है। अमावस्या तिथि रात 1:52 बजे से रात 11:06 बजे तक रहेगी।
Q: When is Hariyali Amavasya 2026?
Hariyali Amavasya 2026 falls on Wednesday, 12 August 2026. The Amavasya tithi runs from 1:52 AM to 11:06 PM the same day, so the whole day is suitable for snan, daan and tarpan.
Q: क्या 12 अगस्त के सूर्य ग्रहण का सूतक लगेगा?
नहीं। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा — भारतीय समय के अनुसार यह रात में होगा जब सूर्य क्षितिज के नीचे है। सूतक केवल वहीं मान्य होता है जहाँ ग्रहण दृश्य हो, इसलिए भारत में मंदिर खुले रहेंगे और सभी धार्मिक कार्य सामान्य रहेंगे।
Q: हरियाली अमावस्या पर कौन सा पेड़ लगाना चाहिए?
परंपरा में पीपल, बरगद, नीम, आँवला, बेल और तुलसी लगाना शुभ माना जाता है। अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल पौधा चुनें जिसकी देखभाल आप लंबे समय तक कर सकें।
Q: हरियाली अमावस्या और हरियाली तीज में क्या अंतर है?
हरियाली अमावस्या श्रावण कृष्ण पक्ष की अमावस्या है (12 अगस्त 2026) — यह पितृ तर्पण, दान और वृक्षारोपण का दिन है। हरियाली तीज उसके तीन दिन बाद शुक्ल तृतीया को आती है (15 अगस्त 2026) — यह सुहागिन महिलाओं का उत्सव है।
Q: हरियाली अमावस्या पर पितृ तर्पण कैसे करें?
स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल और जल से पितरों को तर्पण दें। इसके बाद ज़रूरतमंदों को भोजन कराना और अन्न-वस्त्र का दान करना परंपरा है।
Q: अलग-अलग राज्यों में इसे किस नाम से जानते हैं?
महाराष्ट्र में गटारी अमावस्या, आंध्र प्रदेश में चुक्कला अमावस्या, ओडिशा में चितलागी अमावस्या, और उत्तर भारत में हरियाली अमावस्या।
संबंधित पेज
References
- Drik Panchang — Hariyali Amavasya date and time
- Prokerala — Amavasya dates and tithi timings
- Drik Panchang — Solar Eclipse dates and visibility
- Shri Shyam Mandir — official temple site
सभी तिथियाँ भारत (IST), दिल्ली के अनुसार, एक से अधिक पंचांग स्रोतों से cross-verified. Updated July 2026.