घटस्थापना विधि | नवरात्रि पूजा विधि Day 1 — Durga Puja Start
आज — शारदीय नवरात्रि 2026, दिन 4 (Navratri Day 4)
📅 बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 — माँ कूष्मांडा
- 🎨 रंग: रॉयल ब्लू
- 🍬 भोग: मालपुआ
- 🕉️ मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
- 🌸 माँ कूष्मांडा पूजा विधि →
घटस्थापना 11 अक्टूबर को हो चुकी है; पूरे 9 दिन की तालिका: नवरात्रि 2026 कब है →
स्रोत: Drik Panchang (शारदीय नवरात्रि 2026)।
घटस्थापना के बाद आज की पूजा — माँ कूष्मांडा
घटस्थापना 11 अक्टूबर को हो चुकी है। आज 14 अक्टूबर, नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा होती है। आज का रंग रॉयल ब्लू है और माँ को मालपुआ का भोग लगाया जाता है।
मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
पूरी विधि: माँ कूष्मांडा पूजा विधि →
घटस्थापना से विसर्जन तक 9 दिनों की क्रमवार विधि व मंत्र — मोबाइल पर खोलकर पूजा करें।
घटस्थापना विधि — नवरात्रि की शुरुआत कैसे करें | Navratri Ghatasthapana Vidhi
घटस्थापना (Ghatasthapana) — जिसे कलश स्थापना भी कहा जाता है — नवरात्रि के पहले दिन (प्रतिपदा तिथि) की जाने वाली वह प्रारंभिक पूजा है जिसमें माँ दुर्गा और सभी नौ देवियों का आह्वान एक पवित्र कलश में किया जाता है। यह घट माँ दुर्गा की उपस्थिति और शक्ति का प्रतीक माना जाता है, और नौ दिनों तक इसकी स्थापित स्थिति में पूजा-अर्चना की जाती है। शास्त्रों में घट को सृष्टि, समृद्धि और जल-तत्व का भी प्रतीक बताया गया है — इसीलिए इसकी स्थापना विधिपूर्वक और शुभ समय में करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
📅 शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर (घटस्थापना) से — ✅ इस वर्ष यह पर्व बीत चुका है — अगले वर्ष की तिथि जल्द अपडेट होगी · तिथियाँ व घटस्थापना मुहूर्त →
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🪔 नौ दिन की पूजा विधि: ब्रह्मचारिणी (दिन 2) · चंद्रघंटा (दिन 3) · कूष्मांडा (दिन 4) · स्कंदमाता (दिन 5) · कात्यायनी (दिन 6) · कालरात्रि (दिन 7) · महागौरी व कन्या पूजन (दिन 8) · सिद्धिदात्री (दिन 9) · कलश विसर्जन
Ghatasthapana marks the formal beginning of Navratri and is performed on the very first morning (Pratipada tithi) of the festival — either Shardiya Navratri in autumn or Chaitra Navratri in spring. The kalash installed on this day stays in place through all nine days and becomes the focal point of daily worship, so getting the setup and timing right matters more than in a routine daily puja.
मुहूर्त का महत्व — Why Timing Matters
घटस्थापना पारंपरिक रूप से प्रतिपदा तिथि के प्रातःकाल (सूर्योदय के बाद) के समय की जाती है, और अधिकांश पंडित इसे दिन के पहले प्रहर में करने की सलाह देते हैं। पारंपरिक मान्यता के अनुसार चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के समय घटस्थापना वर्जित मानी जाती है — इसलिए हर वर्ष पंचांग देखकर उस दिन का सही मुहूर्त निकाला जाता है। यदि प्रतिपदा तिथि पूरे दिन के लिए उपलब्ध न हो या इन वर्जित संयोगों से प्रभावित हो, तो पंडितजी अभिजित मुहूर्त (दोपहर के आसपास का शुभ समय) में भी घटस्थापना करने की अनुमति देते हैं। यह गणना हर वर्ष बदलती है, इसलिए स्थिर तारीख की जगह हमेशा उस वर्ष के पंचांग या हमारे कैलेंडर पृष्ठ से पुष्टि करें।
सामग्री सूची — Samagri for Ghatasthapana
घटस्थापना की सामग्री थोड़ी विस्तृत होती है क्योंकि इसमें कलश, जौ बोने की मिट्टी, और नौ दिनों तक चलने वाली अखंड ज्योति — तीनों तत्व एक साथ स्थापित किए जाते हैं। नीचे दी गई सूची में सभी आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं:
घटस्थापना की पूर्ण विधि — Step-by-Step Method
स्थान शुद्धि और संकल्प
पूजा स्थान को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें और हाथ में जल, अक्षत व पुष्प लेकर घटस्थापना का संकल्प लें — अपना नाम, गोत्र और उद्देश्य (नवरात्रि पूजा आरंभ) बोलकर संकल्प जल भूमि पर छोड़ें।
जौ बोना (मिट्टी का पात्र तैयार करना)
चौड़े मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी बिछाएं और उसमें सप्तधान्य या जौ के बीज छिड़कें। ऊपर से हल्की मिट्टी की परत डालें और थोड़ा जल छिड़कें। यह पात्र कलश के ठीक पास या नीचे रखा जाता है — नौ दिनों में इसमें से जौ के अंकुर निकलते हैं, जिन्हें शुभ माना जाता है।
कलश तैयार करना
कलश में शुद्ध जल भरें, उसमें थोड़ा गंगाजल, एक सुपारी, एक सिक्का और अक्षत डालें। कलश के मुख पर मौली बांधें और गर्दन पर आम या अशोक के पांच पत्ते इस प्रकार रखें कि वे कलश के मुख को घेरे रहें। कलश के ऊपर नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर, मौली से बांधकर रखें — नारियल का मुख ऊपर की ओर होना चाहिए।
कलश की स्थापना
तैयार कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के ऊपर या उसके निकट, माँ दुर्गा की मूर्ति/तस्वीर के सामने स्थापित करें। कलश स्थापित करते समय “ॐ भूर्भुवः स्वः” मंत्र या कलश-आवाहन मंत्र का उच्चारण करें, और कलश में सभी देवी-देवताओं व पवित्र नदियों का आह्वान करें।
अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करना
यदि नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने का संकल्प लिया गया है, तो कलश के पास शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं। इस दीपक को नौ दिनों तक बुझने न दें — इसके लिए पर्याप्त तेल/घी और लंबी बत्ती का प्रबंध पहले से कर लें।
माँ दुर्गा का आवाहन और षोडशोपचार पूजा
कलश स्थापित हो जाने के बाद अगला चरण है माँ दुर्गा और नौ देवियों का विधिवत आवाहन (आमंत्रण) और उसके बाद षोडशोपचार पूजा — यानी सोलह अलग-अलग उपचारों (सेवाओं) से देवी की पूजा। यह चरण घटस्थापना का सबसे विस्तृत हिस्सा होता है, इसलिए इसे जल्दबाजी में न करें।
पहला भाग — आवाहन:
हाथ जोड़कर, आंखें बंद करके माँ दुर्गा और नौ देवियों (शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक) का ध्यान करें। मन में उनकी छवि का स्मरण करते हुए “ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी” या सामान्य दुर्गा आवाहन मंत्र बोलें, और कलश की ओर मुट्ठी भर अक्षत-पुष्प अर्पित करते हुए देवी का आवाहन करें — अर्थात उन्हें इस कलश और मूर्ति/तस्वीर में विराजमान होने का निमंत्रण दें। यह मानते हुए कि देवी अब कलश में साक्षात उपस्थित हैं, आगे की पूजा पूरी श्रद्धा से करें।
दूसरा भाग — षोडशोपचार के सोलह उपचार क्रम से:
- आवाहन — देवी को आमंत्रित करना (ऊपर पूर्ण)
- आसन — बैठने हेतु आसन अर्पित करना (चावल/कपड़े का प्रतीकात्मक आसन)
- पाद्य — चरण धोने हेतु जल अर्पित करना
- अर्घ्य — हाथ धोने हेतु जल अर्पित करना
- आचमन — मुख शुद्धि हेतु जल अर्पित करना
- स्नान — पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान, फिर शुद्ध जल से स्नान (यदि मूर्ति उपलब्ध है)
- वस्त्र — नई चुनरी या लाल वस्त्र अर्पित करना
- यज्ञोपवीत/आभूषण — यथासंभव आभूषण अथवा मौली अर्पित करना
- गंध — चंदन या रोली का तिलक लगाना
- पुष्प — ताजे फूल व माला अर्पित करना
- धूप — अगरबत्ती या धूपबत्ती दिखाना
- दीप — घी या तेल का दीपक दिखाना
- नैवेद्य — फल, मिठाई या भोग अर्पित करना
- ताम्बूल — पान का बीड़ा (सुपारी सहित) अर्पित करना
- दक्षिणा — यथाशक्ति द्रव्य/सिक्का अर्पित करना
- प्रदक्षिणा व नमस्कार — कलश की परिक्रमा कर साष्टांग प्रणाम करना
यदि समय कम हो या यह पहली बार की जा रही पूजा हो, तो पूर्ण षोडशोपचार की जगह पंचोपचार (गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य — केवल पांच उपचार) से भी पूजा पूर्ण मानी जाती है। दोनों ही विधियां शास्त्र-सम्मत हैं; अंतर केवल विस्तार का है, भक्ति-भाव का नहीं।
तीसरा भाग — पाठ आरंभ:
पूजा के इसी चरण में दुर्गा सप्तशती के प्रारंभिक अध्यायों का पाठ, या सरल विकल्प के रूप में दुर्गा चालीसा और नवार्ण मंत्र (“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”) का जाप शुरू किया जा सकता है — यह पाठ नौ दिनों तक प्रतिदिन जारी रखा जाता है, और अष्टमी/नवमी तक क्रमशः पूरा किया जाता है।
आरती और पूजा समापन
घटस्थापना की आरती करें, कपूर या घी के दीपक से माँ दुर्गा और कलश दोनों की आरती उतारें। परिवार के सभी सदस्य आरती में सम्मिलित हों। इसके बाद प्रतिदिन सुबह-शाम इसी कलश और मूर्ति की नियमित पूजा-आरती नौ दिनों तक जारी रखी जाती है, और नवमी/दशमी पर विसर्जन विधि से पूजा का समापन होता है।
ध्यान रखने योग्य बातें — Common Guidelines
- घटस्थापना के बाद कलश को नौ दिनों तक हिलाया या हटाया नहीं जाता — इसे स्थिर स्थान पर ही रखें।
- अखंड ज्योति जलाने का संकल्प लिया है तो घर में हमेशा कोई न कोई सदस्य उपस्थित रहे, ताकि दीपक की देखभाल होती रहे।
- जौ वाले पात्र को हल्की धूप और नियमित जल छिड़काव मिलता रहे ताकि अंकुर ठीक से निकलें।
- यदि किसी कारण चित्रा नक्षत्र/वैधृति योग के समय ही घटस्थापना करनी पड़े, तो स्थानीय विद्वान पंडित से अभिजित मुहूर्त की सलाह अवश्य लें।
यह किस श्रेणी की जानकारी है
ऊपर दी गई मूल विधि (कलश तैयार करना, स्थापना का क्रम, आवाहन) पूजा-पद्धति श्रेणी में आती है — यह प्रचलित, व्यापक रूप से अपनाई जाने वाली विधि है। मुहूर्त संबंधी नियम (चित्रा नक्षत्र, वैधृति योग का निषेध) शास्त्रीय आधार रखते हैं, जबकि सामग्री की सटीक मात्रा और कुछ छोटे विवरण (जैसे किस रंग का कपड़ा प्रयोग हो) क्षेत्र और परिवार-परंपरा के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं — ऐसे बिंदुओं पर हमने सबसे व्यापक रूप से प्रचलित तरीका बताया है।
नवरात्रि से जुड़ी और जानकारी
घटस्थापना विधि से जुड़े सामान्य प्रश्न
Q: घटस्थापना और कलश स्थापना में क्या कोई अंतर है?
नहीं, दोनों एक ही पूजा के दो नाम हैं। “घट” और “कलश” दोनों शब्द उसी पात्र के लिए प्रयोग होते हैं जिसमें माँ दुर्गा का आह्वान किया जाता है, इसलिए घटस्थापना और कलश स्थापना पूर्ण रूप से एक ही विधि को दर्शाते हैं।
Q: नवरात्रि 2026 की तारीख और घटस्थापना मुहूर्त कहां मिलेगा?
नवरात्रि 2026 की सटीक तारीख, प्रतिपदा तिथि और घटस्थापना का शुभ मुहूर्त हर वर्ष बदलता है, इसलिए यह जानकारी हमारे Hindu Calendar पर अलग से दी जाती है। यह पृष्ठ जानबूझकर तारीख नहीं दोहराता, ताकि जानकारी हमेशा नवीनतम और एक ही जगह पर सटीक रहे — विधि और सामग्री के लिए यहीं रुकें, तारीख के लिए कैलेंडर देखें।
Q: घटस्थापना किस समय करनी चाहिए? (Correct time for Ghatasthapana)
घटस्थापना परंपरागत रूप से प्रतिपदा तिथि की सुबह, आदर्श रूप से सूर्योदय के बाद के पहले प्रहर में की जाती है। यदि उस वर्ष सुबह के समय चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग पड़े, तो दोपहर के आसपास का अभिजित मुहूर्त स्वीकृत विकल्प माना जाता है। सटीक समय हर वर्ष बदलता है, इसलिए उसी वर्ष का पंचांग अवश्य देखें।
Q: घटस्थापना के बाद कलश को क्या नौ दिन तक हिलाना नहीं चाहिए?
सही है, परंपरा के अनुसार एक बार घट स्थापित हो जाने के बाद उसे नौ दिनों तक उसी स्थान पर स्थिर रखा जाता है और हटाया नहीं जाता। पूजा-आरती कलश के पास ही की जाती है, और विसर्जन नवमी या दशमी के दिन विधिपूर्वक किया जाता है।
Q: क्या घर में दुर्गा जी की मूर्ति के बिना घटस्थापना हो सकती है? (Ghatasthapana without an idol)
हाँ — नवरात्रि में कलश को ही देवी का मुख्य आसन माना जाता है, इसलिए दुर्गा जी की मूर्ति या चित्र रखना आम है, पर अनिवार्य नहीं। कई घरों में, विशेषकर छोटे घरों में, पूरे नौ दिनों की पूजा केवल कलश और जौ के पात्र के साथ की जाती है।
Q: अखंड ज्योति जलाना क्या अनिवार्य है?
नहीं, अखंड ज्योति जलाना एक संकल्प है, अनिवार्यता नहीं। जो परिवार यह संकल्प लेते हैं, उन्हें नौ दिनों तक दीपक की निरंतर देखभाल करनी होती है; जो यह संकल्प नहीं लेना चाहते, वे केवल सुबह-शाम नियमित दीपक जलाकर भी पूजा पूर्ण रूप से कर सकते हैं।
Q: घटस्थापना में मंत्र बोलते समय गलती हो जाए तो क्या पूजा अमान्य हो जाती है? (Mistakes in mantras)
नहीं — भाव और क्रियाओं का सही क्रम (स्थान शुद्धि, जौ बोना, कलश तैयार कर स्थापित करना, आवाहन और आरती) शब्दशः सही उच्चारण से अधिक महत्वपूर्ण है। संस्कृत मंत्रों को लेकर संशय हो तो हर चरण सही तरीके से करते हुए अपने शब्दों में संकल्प बोलना भी स्वीकार्य माना जाता है; पूर्ण पारंपरिक विधि के लिए पंडित जी की सहायता ली जा सकती है।
Source: Traditional Navratri puja-vidhi practice (Devi Bhagavata Purana / Durga Saptashati tradition), Drik Panchang, Prokerala | Updated August 2026