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कात्यायनी पूजा विधि | Katyayani Puja Vidhi Day 6

📅 13 अगस्त 2026 ⏱️ 5 मिनट पढ़ने का समय
🔱 श्रेणी: नवरात्रि — दिन 6  |  🎨 रंग: लाल/नारंगी  |  🍯 भोग: शहद
📅 आगामी शारदीय नवरात्रि (2026) में यह दिन 16 अक्टूबर 2026 को पड़ेगा। सभी वर्षों की तारीखें यहां देखें →

माँ कात्यायनी पूजा विधि — नवरात्रि छठा दिन | Katyayani Puja Vidhi

माँ कात्यायनी दुर्गा का छठा स्वरूप हैं — महर्षि कात्यायन के आश्रम में जन्म लेने और उनके द्वारा पूजित होने के कारण इन्हें कात्यायनी कहा जाता है। शक्ति, साहस और न्याय की प्रतीक यह देवी सिंह पर सवार, चार भुजाओं में तलवार और कमल जैसे अस्त्र-शस्त्र धारण किए रहती हैं। मान्यता है कि महिषासुर का वध करने हेतु देवताओं के तेज से इनका प्राकट्य हुआ था।

📅 शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर (घटस्थापना) से — ✅ इस वर्ष यह पर्व बीत चुका है — अगले वर्ष की तिथि जल्द अपडेट होगी · तिथियाँ व घटस्थापना मुहूर्त →

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🪔 नौ दिन की पूजा विधि: घटस्थापना (दिन 1) · ब्रह्मचारिणी (दिन 2) · चंद्रघंटा (दिन 3) · कूष्मांडा (दिन 4) · स्कंदमाता (दिन 5) · कालरात्रि (दिन 7) · महागौरी व कन्या पूजन (दिन 8) · सिद्धिदात्री (दिन 9) · कलश विसर्जन

📅 नवरात्रि 2026 की तारीख के लिए Hindu Calendar देखें। यह पृष्ठ केवल विधि पर केंद्रित है।

सामग्री सूची

🕯️ घी का दीपक🌺 लाल फूल🍯 शहद📿 जपमाला🪔 धूप-अगरबत्ती🌾 अक्षत, रोली🥥 नारियल🍚 नैवेद्य🥛 पंचामृत

पूजा विधि — विस्तृत चरण

स्नान, पूजा स्थान की शुद्धि, दीप-धूप और संकल्प का रोज़ का क्रम नवरात्रि के हर दिन एक-सा रहता है (पूरा क्रम: दुर्गा पूजा विधि)। घटस्थापना का कलश यथावत रहता है। नीचे केवल छठे दिन — माँ कात्यायनी की विशेष विधि है।

  1. स्वरूप का ध्यान: महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होने से नाम कात्यायनी; इन्हीं रूप में माँ ने महिषासुर का वध किया। चार भुजाएँ — तलवार, कमल, अभय और वरमुद्रा; वाहन सिंह।
  2. ध्यान मंत्र: “चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥”
  3. अर्पण: लाल फूल (विशेषकर गुलाब), रोली, लाल चुनरी।
  4. भोग: शहद — या शहद मिला पान/मिठाई।
  5. विशेष — विवाह की कामना: भागवत के अनुसार व्रज की गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कात्यायनी व्रत किया था। विवाह में बाधा हो तो यह मंत्र पढ़ा जाता है: “कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥” (कन्याएँ “नन्दगोपसुतं” के स्थान पर मनोकामना अनुसार प्रार्थना करती हैं।)
  6. जप व आरती: “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः” 108 बार, फिर आरती। बंगाल की दुर्गा पूजा में इसी षष्ठी को बोधन से उत्सव शुरू होता है।

माँ कात्यायनी को क्या अर्पित करें

वस्तु महत्व
शहद सर्वाधिक प्रिय भोग
लाल फूल शक्ति और साहस का प्रतीक रंग
पंचामृत अभिषेक हेतु आवश्यक
घी का दीपक सात्विक पूजा की मूल भेंट

व्रत के दौरान सात्विक आहार का पालन करें — प्याज, लहसुन, मांसाहार और सामान्य नमक से परहेज करें।

कात्यायनी का महत्व — Significance

पौराणिक कथा के अनुसार, जब राक्षस महिषासुर के अत्याचार से त्रस्त होकर देवता भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पास पहुंचे, तब तीनों देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई। महर्षि कात्यायन ने सबसे पहले इस शक्ति की पूजा की और इन्हें अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया, इसीलिए इन्हें कात्यायनी कहा गया। बाद में इन्हीं देवी ने महिषासुर का वध किया, इसलिए इन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है।

छठे दिन इनकी पूजा विशेष रूप से विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति हेतु की जाती है — विशेषकर व्रज क्षेत्र में सखियों द्वारा भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने हेतु इसी देवी की पूजा की परंपरा प्रचलित रही है।

मंत्र का अर्थ — Mantra Meaning

“ॐ देवी कात्यायन्यै नमः” का सरल अर्थ है — “उन देवी को नमन जो महर्षि कात्यायन की पुत्री रूप में प्रकट हुईं”। जाप करते समय यह भाव रखें कि जिस साहस से उन्होंने अन्याय का सामना किया, वही साहस हमारे भीतर भी जागृत हो। यह मंत्र विशेष रूप से किसी बाधा या द्वंद्व का सामना कर रहे भक्तों के लिए बल देने वाला माना जाता है।

ध्यान विधि — कैसे करें एकाग्रता

आंखें बंद कर माँ कात्यायनी के सिंह पर सवार, तलवार और कमल धारण किए तेजस्वी स्वरूप की कल्पना करें। मन में यह भाव लाएं कि उनकी शक्ति हमारे जीवन की बाधाओं — चाहे वह करियर हो, संबंध हों, या कोई निर्णय — को दूर करने में सहायक हो। कुछ क्षण इस साहसी स्वरूप पर एकाग्र होकर बैठें।

व्यावहारिक सुझाव

  • शहद उपलब्ध न हो तो कोई भी मीठी वस्तु भोग के रूप में अर्पित की जा सकती है।
  • विवाह में विलंब से जुड़ी मनोकामना रखने वाले इस दिन विशेष श्रद्धा से पूजा कर सकते हैं, यह परंपरागत मान्यता है।
  • लाल वस्त्र न होने पर कोई भी शुभ रंग पहना जा सकता है।

कात्यायनी पूजा से जुड़े प्रश्न

Q: माँ कात्यायनी की पूजा किस उद्देश्य से विशेष रूप से की जाती है?

परंपरागत रूप से यह देवी विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और उचित जीवनसाथी की प्राप्ति हेतु पूजी जाती हैं, साथ ही शक्ति और साहस की प्राप्ति के लिए भी इनकी उपासना की जाती है।

Q: दुर्गा परंपरा में माँ कात्यायनी किससे जुड़ी हैं? (Maa Katyayani’s significance)

माँ कात्यायनी शक्ति, साहस और न्याय से जुड़ी हैं। परंपरागत कथाओं के अनुसार वे महिषासुर का वध करने के लिए देवताओं की संयुक्त शक्ति से प्रकट हुई थीं।

Q: माँ कात्यायनी को महिषासुरमर्दिनी क्यों कहा जाता है?

पौराणिक कथा के अनुसार इन्हीं देवी ने राक्षस महिषासुर का वध किया था, जिसके कारण इन्हें “महिषासुरमर्दिनी” (महिषासुर का नाश करने वाली) भी कहा जाता है — यह नाम इनकी शक्ति और न्यायप्रियता का प्रतीक है।

Q: अविवाहित भक्त विशेष रूप से माँ कात्यायनी की पूजा क्यों करते हैं? (Katyayani and marriage)

ब्रज क्षेत्र से जुड़ी परंपरा में युवा भक्त योग्य जीवनसाथी की कामना से माँ कात्यायनी की पूजा करते थे — यह परंपरा आज भी उन लोगों में प्रचलित है जो विवाह में देरी या बाधा दूर होने की कामना करते हैं।

॥ जय माता दी ॥

Source: Traditional Navratri puja-vidhi practice, Drik Panchang | Updated August 2026

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#PujaVidhi