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रक्षाबंधन 2026 कब है? | Raksha Bandhan 2026 Date, Rakhi Shubh Muhurat, Bhadra & Rahu Kaal

Spiritual 📅 20 Aug 2026 ⏱️ 20 min read
Raksha Bandhan 2026 Date

रक्षाबंधन 2026 | Raksha Bandhan 2026 Date & Muhurat

Raksha Bandhan 2026 Date, Rakhi Shubh Muhurat, Purnima Tithi, Bhadra, Rahu Kaal, Chandra Grahan, सूतक और सरल पूजा विधि

✍️ Team KhatuWaleBaba.in
📍 नई दिल्ली
🗓️ प्रकाशित: 20 अगस्त 2026
🔄 अपडेटेड: 20 अगस्त 2026

रक्षाबंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक रहेगा। इस दौरान भद्रा नहीं होगी। 28 अगस्त का चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां उसका सूतक मान्य नहीं होगा।

Raksha Bandhan 2026 Date: Friday, 28 August 2026. Rakhi Shubh Muhurat: 5:57 AM to 9:48 AM IST.

📅 28 अगस्त 2026
🗓️ शुक्रवार
🧵 राखी: 5:57–9:48 AM
⏱️ 3 घंटे 51 मिनट
भद्रा नहीं
⏳ अगला व्रत/त्योहार लोड हो रहा है…

Raksha Bandhan 2026 Shubh Muhurat: भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि दो दिनों में पड़ने और रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण होने के कारण तारीख तथा पूजा के समय को लेकर लोगों में भ्रम है।

पंचांग गणना के अनुसार स्थिति साफ है—पूर्णिमा 27 अगस्त को शुरू होगी, लेकिन उस दिन भद्रा रहने के कारण राखी नहीं बांधी जाएगी। 28 अगस्त की सुबह पूर्णिमा तिथि भी रहेगी और भद्रा समाप्त हो चुकी होगी। इसलिए उदयातिथि के आधार पर देशभर में रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा।

विवरण तिथि / समय
रक्षाबंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 – 9:48 बजे
कुल शुभ अवधि 3 घंटे 51 मिनट
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ 27 अगस्त, सुबह 9:08 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त 28 अगस्त, सुबह 9:48 बजे
28 अगस्त को भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त
राहुकाल—नई दिल्ली सुबह 10:46 – दोपहर 12:22 बजे
चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा
हिंदू तिथि श्रावण शुक्ल पूर्णिमा, विक्रम संवत 2083

समय नई दिल्ली और भारतीय मानक समय के अनुसार है। सूर्योदय तथा राहुकाल शहर के अनुसार कुछ मिनट बदल सकते हैं।

रक्षाबंधन 2026 कब है—27 या 28 अगस्त?

रक्षाबंधन शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को है। श्रावण शुक्ल पूर्णिमा 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। पूर्णिमा 27 अगस्त को आरंभ होने के बावजूद उस दिन भद्रा का प्रभाव रहेगा।

रक्षाबंधन का मुख्य नियम है कि रक्षा सूत्र पूर्णिमा तिथि में और भद्रा से मुक्त समय में बांधा जाए। 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा विद्यमान रहेगी और भद्रा पहले ही समाप्त हो चुकी होगी। इसी कारण 28 अगस्त को पर्व मनाना शास्त्रीय और व्यावहारिक—दोनों दृष्टि से उचित है।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक है। इस 3 घंटे 51 मिनट की अवधि में पूर्णिमा तिथि रहेगी और भद्रा नहीं होगी। परिवार अपनी सुविधा के अनुसार इस समय के भीतर पूजा करके भाई की कलाई पर राखी बांध सकते हैं।

समय बचाने की सलाह: पूजा की थाली, राखी, रोली, अक्षत और मिठाई रात में ही तैयार रखें। सुबह 9:48 बजे पूर्णिमा समाप्त हो जाएगी, इसलिए पूजा को अंतिम मिनट तक न टालें।

क्या रक्षाबंधन 2026 पर भद्रा रहेगी?

28 अगस्त के राखी मुहूर्त में भद्रा नहीं रहेगी। भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए सूर्योदय के बाद से पूर्णिमा समाप्त होने तक बिना भद्रा के राखी बांधी जा सकेगी।

27 अगस्त को पूर्णिमा शुरू होते समय भद्रा रहेगी। धार्मिक परंपराओं में भद्रा के दौरान रक्षा सूत्र, विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य करने से बचा जाता है। इसलिए केवल पूर्णिमा शुरू हो जाने के आधार पर 27 अगस्त को राखी बांधना उचित नहीं माना गया है।

रक्षाबंधन के दिन राहुकाल कितने बजे रहेगा?

नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार शुक्रवार, 28 अगस्त को राहुकाल लगभग सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा। राखी का प्रमुख मुहूर्त सुबह 9:48 बजे समाप्त हो जाएगा, इसलिए शुभ अवधि में राखी बांधने वालों के लिए राहुकाल से टकराव नहीं होगा।

राहुकाल सूर्योदय और भौगोलिक स्थान पर निर्भर करता है। दिल्ली, जयपुर, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में समय कुछ मिनट अलग हो सकता है। अपने शहर के स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।

क्या रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण लगेगा?

28 अगस्त 2026 को दुनिया के कुछ हिस्सों में गहरा आंशिक चंद्रग्रहण लगेगा। अधिकतम चरण में चंद्रमा का लगभग 96 प्रतिशत भाग पृथ्वी की गहरी छाया में आ जाएगा। यह खगोलीय घटना मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण अमेरिका तथा यूरोप और अफ्रीका के कुछ भागों से देखी जा सकेगी।

भारत में ग्रहण के दौरान चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण और रक्षाबंधन एक ही पूर्णिमा पर पड़ रहे हैं, लेकिन भारत में त्योहार के आयोजन पर इसकी दृश्यता का प्रभाव नहीं होगा।

क्या भारत में चंद्रग्रहण का सूतक लगेगा?

भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण इसका सूतक सामान्यतः मान्य नहीं होगा। धार्मिक परंपरा में प्रायः उसी क्षेत्र में सूतक के नियम लागू माने जाते हैं जहां ग्रहण दिखाई देता है। इसलिए भारत में रक्षाबंधन की पूजा, भोजन और राखी बांधने पर ग्रहण का प्रतिबंध नहीं माना जा रहा है।

🙏 परंपरा संबंधी सूचना: संप्रदाय और परिवार के अनुसार ग्रहण संबंधी नियम अलग हो सकते हैं। विशेष गुरु-परंपरा का पालन करने वाले परिवार अपने धर्माचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।

राखी बांधने की पूजा सामग्री

🧵 राखी या रक्षा सूत्र
भाई की दाहिनी कलाई के लिए।

🔴 रोली और अक्षत
मंगल तिलक लगाने के लिए।

🪔 घी का दीपक
आरती और पूजा के लिए।

🍬 मिठाई
राखी के बाद भाई को खिलाने के लिए।

🌸 फूल और नारियल
पूजा एवं शुभ संकल्प के लिए।

💧 जल का पात्र
पूजा और आचमन के लिए।

राखी बांधने की सरल पूजा विधि

1

स्नान और पूजा

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर के पूजा स्थान पर भगवान गणेश और अपने इष्टदेव का स्मरण करें।

2

थाली तैयार करें

थाली में राखी, रोली, अक्षत, दीपक, फूल और मिठाई रखें। दीपक प्रज्वलित करें।

3

भाई को शुभ दिशा में बैठाएं

भाई को संभव हो तो पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं।

4

तिलक और आरती

भाई के माथे पर रोली का तिलक लगाकर अक्षत लगाएं और आरती उतारें।

5

रक्षा सूत्र बांधें

भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधते हुए उसकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करें।

6

मिठाई और संकल्प

भाई को मिठाई खिलाएं। भाई बहन के सम्मान, सहयोग और हर परिस्थिति में साथ निभाने का संकल्प ले।

राखी बांधते समय कौन सा मंत्र बोलें?

येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि, रक्षे मा चल मा चल॥

इस मंत्र का भाव है—जिस रक्षा सूत्र से महाबली राजा बलि को बांधा गया था, उसी पवित्र सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षा, तुम अटल रहना और सदैव रक्षा करना।

रक्षाबंधन पर क्या करें और क्या न करें?

✅ करें
सुबह के शुभ मुहूर्त में पूजा करें, भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें, बड़े सदस्यों का आशीर्वाद लें, सात्विक भोजन करें और जरूरतमंद को दान दें।

❌ न करें
27 अगस्त के भद्रा काल में राखी न बांधें, पूजा को 9:48 बजे के बाद तक न टालें, टूटी या अशुद्ध राखी न चढ़ाएं और त्योहार को केवल उपहार तक सीमित न रखें।

रक्षाबंधन का धार्मिक और सामाजिक महत्व

रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी का पर्व है। बहन रक्षा सूत्र बांधकर भाई के स्वस्थ और समृद्ध जीवन की प्रार्थना करती है। भाई बहन के सम्मान और हर परिस्थिति में सहयोग का वचन देता है।

समय के साथ इस पर्व का अर्थ व्यापक हुआ है। कई परिवारों में बहनें एक-दूसरे को, बेटियां माता-पिता को और श्रद्धालु अपने आराध्य को रक्षा सूत्र अर्पित करते हैं। इसका मूल संदेश पारस्परिक सम्मान, सुरक्षा और संबंधों को मजबूत करना है।

खाटू श्याम जी के भक्त रक्षाबंधन कैसे मनाएं?

श्याम भक्त रक्षाबंधन के दिन घर में पूजा के बाद बाबा श्याम को मोली या रक्षा सूत्र अर्पित कर सकते हैं। प्रार्थना में केवल अपनी सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरे परिवार के स्वास्थ्य, सद्भाव और सेवा-भाव की कामना करें। जो श्रद्धालु खाटू नहीं जा सकते, वे घर पर बाबा का स्मरण करके “हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा” का जाप कर सकते हैं।

यदि आप खाटू यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो निकलने से पहले खाटू श्याम जी संपूर्ण दर्शन गाइड, मंदिर दर्शन समय और यात्रा संबंधी जानकारी जरूर देखें। त्योहार और सप्ताहांत के आसपास भीड़ सामान्य दिनों से अधिक हो सकती है।

रक्षाबंधन 2026 से जुड़े सामान्य प्रश्न

रक्षाबंधन 2026 किस तारीख को है?

रक्षाबंधन शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा।

राखी बांधने का शुभ समय क्या है?

प्रमुख शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक है। कुल अवधि 3 घंटे 51 मिनट है।

पूर्णिमा तिथि कब शुरू और समाप्त होगी?

पूर्णिमा 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी।

क्या 28 अगस्त को भद्रा रहेगी?

नहीं। भद्रा 28 अगस्त के सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी।

रक्षाबंधन के दिन राहुकाल कब है?

नई दिल्ली के अनुसार राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा। शहर के अनुसार समय बदल सकता है।

क्या चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा?

नहीं। 28 अगस्त का आंशिक चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

क्या भारत में ग्रहण का सूतक लगेगा?

ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण भारत में सूतक सामान्यतः मान्य नहीं होगा। संप्रदाय विशेष की परंपरा हो तो अपने धर्माचार्य के निर्देश का पालन करें।

राखी किस हाथ में बांधनी चाहिए?

परंपरा के अनुसार भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है।

संबंधित पेज

References

  1. Drik Panchang — Raksha Bandhan date, Purnima and muhurat
  2. NASA — August 2026 partial lunar eclipse visibility
  3. Aaj Tak — Raksha Bandhan 2026 news reference

संपादकीय सूचना: तिथि और प्रमुख मुहूर्त नई दिल्ली, IST के अनुसार एक से अधिक स्रोतों से जांचे गए हैं। स्थानीय सूर्योदय के कारण शहरवार समय कुछ मिनट बदल सकता है। यह पेज 20 अगस्त 2026 को अपडेट किया गया।

॥ जय श्री श्याम ॥
🙏 Source: KhatuWaleBaba.in — खाटू श्याम जी का सम्पूर्ण तीर्थयात्रा पोर्टल | Hotels • Trains • Routes • Live Darshan
Prakash Bengani
लेखक / Author
Prakash Bengani

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