इन्दिरा एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी
पद्म पुराण के अनुसार प्राचीन समय में माहिष्मती नगरी में राजा इन्द्रसेन राज्य करते थे। वे धर्मपरायण, न्यायप्रिय और भगवान विष्णु के महान भक्त थे।
एक दिन महर्षि नारद उनके दरबार में पहुंचे। राजा ने उनका आदर-सत्कार किया। तब नारद जी ने बताया कि राजा के पिता यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं और उन्होंने अपने पुत्र के माध्यम से मुक्ति प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की है।
राजा इन्द्रसेन यह सुनकर अत्यंत दुखी हुए और अपने पिता के उद्धार का उपाय पूछा।
महर्षि नारद ने उन्हें आश्विन कृष्ण पक्ष की इन्दिरा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि राजा श्रद्धापूर्वक यह व्रत करें और उसका पुण्य अपने पिता को समर्पित कर दें, तो उन्हें मुक्ति मिल सकती है।
राजा इन्द्रसेन ने विधिपूर्वक इन्दिरा एकादशी का व्रत किया, भगवान विष्णु की पूजा की और व्रत का पुण्य अपने पिता को अर्पित किया।
व्रत के प्रभाव से उनके पिता यमलोक के कष्टों से मुक्त होकर दिव्य लोक में चले गए। इस प्रकार इन्दिरा एकादशी पितरों को सद्गति प्रदान करने वाली एकादशी के रूप में प्रसिद्ध हुई।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी पर खाटू दर्शन की योजना?
पहले से होटल और टैक्सी बुक करें — एकादशी पर भारी भीड़ होती है।
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📚 सन्दर्भ एवं अधिक जानकारी
- Drik Panchang — Ekadashi Dates & Muhurat 2026 ↗ — Accurate tithi timings
- Sikar.rajasthan.gov.in — Official Govt Website ↗ — Sikar district official information
- Wikipedia — Ekadashi ↗ — Complete Ekadashi history