Home एकादशी कैलेंडर इन्दिरा एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

इन्दिरा एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक अक्टूबर 6, 2026 (मंगलवार)
🗓️ तिथि आश्विन, कृष्ण एकादशी
⏰ प्रारम्भ अक्टू॰ 06, 02:07 AM
⏰ समाप्त अक्टू॰ 07, 12:34 AM

पद्म पुराण के अनुसार प्राचीन समय में माहिष्मती नगरी में राजा इन्द्रसेन राज्य करते थे। वे धर्मपरायण, न्यायप्रिय और भगवान विष्णु के महान भक्त थे।

एक दिन महर्षि नारद उनके दरबार में पहुंचे। राजा ने उनका आदर-सत्कार किया। तब नारद जी ने बताया कि राजा के पिता यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं और उन्होंने अपने पुत्र के माध्यम से मुक्ति प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की है।

राजा इन्द्रसेन यह सुनकर अत्यंत दुखी हुए और अपने पिता के उद्धार का उपाय पूछा।

महर्षि नारद ने उन्हें आश्विन कृष्ण पक्ष की इन्दिरा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि राजा श्रद्धापूर्वक यह व्रत करें और उसका पुण्य अपने पिता को समर्पित कर दें, तो उन्हें मुक्ति मिल सकती है।

राजा इन्द्रसेन ने विधिपूर्वक इन्दिरा एकादशी का व्रत किया, भगवान विष्णु की पूजा की और व्रत का पुण्य अपने पिता को अर्पित किया।

व्रत के प्रभाव से उनके पिता यमलोक के कष्टों से मुक्त होकर दिव्य लोक में चले गए। इस प्रकार इन्दिरा एकादशी पितरों को सद्गति प्रदान करने वाली एकादशी के रूप में प्रसिद्ध हुई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इन्दिरा एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
यह एकादशी पितरों की शांति, मोक्ष और सद्गति के लिए विशेष रूप से की जाती है।
इन्दिरा एकादशी किस महीने में आती है?
यह आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में, पितृ पक्ष के दौरान आती है।
इन्दिरा एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा राजा इन्द्रसेन, उनके पिता और महर्षि नारद से संबंधित है।
क्या इन्दिरा एकादशी पर पितृ तर्पण करना चाहिए?
हाँ, यह दिन पितरों के स्मरण, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
क्या महिलाएं इन्दिरा एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय के भीतर पारण करना चाहिए।
इन्दिरा एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
पितरों की सद्गति, भगवान विष्णु की कृपा, पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति।
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