हनुमान जी पूजा विधि


हनुमान जी बल, बुद्धि, भक्ति और संकट से रक्षा के देवता हैं। उनकी पूजा विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को होती है, और हनुमान चालीसा का पाठ सबसे सरल व लोकप्रिय उपासना है। राजस्थान में सालासर बालाजी और मेहंदीपुर बालाजी हनुमान जी के प्रसिद्ध धाम हैं, जिन्हें खाटू श्याम जी की यात्रा के साथ भी जोड़ा जाता है।
हनुमान पूजा सामग्री
- हनुमान जी का चित्र या प्रतिमा, चौकी, लाल कपड़ा
- सिंदूर और चमेली का तेल (चोला चढ़ाने के लिए), चाँदी / सोने का वरक (वैकल्पिक)
- लाल फूल, गुड़हल, आक या गेंदे की माला, तुलसी दल
- भोग: बूँदी या बेसन के लड्डू, गुड़-चना, केले, पान का बीड़ा
- जनेऊ, लाल लंगोट/वस्त्र, रोली, अक्षत, सरसों या चमेली के तेल का दीपक, धूप
- हनुमान चालीसा / बजरंग बाण / सुंदरकांड की पुस्तक
हनुमान पूजा विधि — चरणबद्ध
- शुद्धता: स्नान करके साफ (संभव हो तो लाल) वस्त्र पहनें। हनुमान पूजा में ब्रह्मचर्य और सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
- राम स्मरण: हनुमान जी की पूजा से पहले भगवान राम और माता सीता का स्मरण करें — “श्री राम जय राम जय जय राम”। मान्यता है कि राम नाम से हनुमान जी सबसे जल्दी प्रसन्न होते हैं।
- संकल्प: हाथ में जल-अक्षत लेकर संकल्प लें।
- चोला / सिंदूर: चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को लगाएँ (मंदिर में या घर की प्रतिमा पर)। चित्र हो तो केवल सिंदूर का तिलक करें।
- पुष्प और जनेऊ: लाल फूल, माला, जनेऊ और तुलसी दल अर्पित करें।
- दीपक: चमेली या सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
- पाठ: हनुमान चालीसा — 1, 7, 11 या 108 बार; समय हो तो बजरंग बाण या सुंदरकांड।
- मंत्र: “ॐ हं हनुमते नमः” या “ॐ श्री हनुमते नमः” — 108 बार।
- भोग: बूँदी के लड्डू, गुड़-चना, केले और पान का बीड़ा अर्पित करें।
- आरती: “आरती कीजै हनुमान लला की” गाएँ और प्रसाद बाँटें।
मंगलवार और शनिवार व्रत
| दिन | विशेष |
|---|---|
| मंगलवार | हनुमान जी का प्रमुख दिन; व्रत में एक समय मीठा भोजन (नमक रहित), लाल वस्त्र, 21 मंगलवार का संकल्प प्रचलित |
| शनिवार | शनि पीड़ा से राहत की मान्यता; तेल का दीपक, सुंदरकांड पाठ — शनिदेव पूजा के साथ |
हनुमान जी और सिंदूर की कथा
लोककथा है कि माता सीता को माँग में सिंदूर लगाते देख हनुमान जी ने पूछा कि ऐसा क्यों करती हैं। सीता जी ने बताया कि इससे श्रीराम की आयु बढ़ती है। यह सुनकर हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया — तभी से हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाने की परंपरा है।
ध्यान रखें
- ✅ हनुमान पूजा से पहले राम नाम का स्मरण अवश्य करें।
- ❌ परंपरा में महिलाएँ हनुमान जी की प्रतिमा को स्पर्श कर चोला नहीं चढ़ातीं — वे दीपक, पाठ, भोग और प्रार्थना से पूरी पूजा कर सकती हैं।
- ❌ हनुमान पूजा के दिन मांसाहार और नशा वर्जित।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हनुमान जी की पूजा किस दिन करें? (Which day for Hanuman puja?)
मंगलवार और शनिवार हनुमान पूजा के विशेष दिन हैं; हनुमान जयंती पर विशेष पूजा होती है।
हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाते हैं? (Why is sindoor offered?)
लोककथा के अनुसार श्रीराम की दीर्घायु के लिए हनुमान जी ने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया था, इसलिए सिंदूर का चोला चढ़ाया जाता है।
हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़ें? (How many times to read Hanuman Chalisa?)
अपनी श्रद्धा के अनुसार 1, 7, 11 या 108 बार — नियमित पाठ सबसे महत्वपूर्ण है।
क्या महिलाएँ हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं? (Can women worship Hanuman ji?)
हाँ, महिलाएँ दीपक, हनुमान चालीसा पाठ, भोग और प्रार्थना से पूजा कर सकती हैं; परंपरा में प्रतिमा को स्पर्श कर चोला चढ़ाने से बचा जाता है।
हनुमान जी को क्या भोग लगाएँ? (What bhog for Hanuman ji?)
बूँदी या बेसन के लड्डू, गुड़-चना, केले और पान का बीड़ा।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।