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उगादी पूजा विधि

📅 21 अगस्त 2026 ⏱️ 3 मिनट पढ़ने का समय
उगादी पूजा विधि के लिए सजी पूजा चौकी और प्रमुख सामग्री

उगादि (युगादि — “युग का आरंभ”) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। कन्नड़ में इसे ಯುಗಾದಿ (युगादि) और तेलुगु में ఉగాది (उगादि) कहते हैं। मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने इसी दिन सृष्टि की रचना आरंभ की। महाराष्ट्र में यही दिन गुड़ी पड़वा है। इस पर्व की सबसे विशिष्ट पहचान है उगादि पचड़ी — छह स्वादों वाला प्रसाद।

📅 उगादि 2027 कब है? बुधवार, 7 अप्रैल 2027   ⏳ 161 दिन बाकी

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा — 7 अप्रैल सुबह 5:21 से 8 अप्रैल सुबह 4:29 तक (IST)। सभी व्रत-त्योहार: हिंदू कैलेंडर →

उगादि पचड़ी — छह स्वाद, छह भावनाएँ

सामग्री स्वाद जीवन का भाव
गुड़ मीठा सुख
नीम के फूल कड़वा दुःख
कच्चा आम चटपटा-कसैला आश्चर्य
इमली खट्टा अरुचि/चुनौती
हरी मिर्च या काली मिर्च तीखा क्रोध
नमक नमकीन भय

संदेश: नया वर्ष हर तरह के अनुभव लाएगा — सबको समभाव से स्वीकार करें। (भावनाओं का यह अर्थ क्षेत्र-अनुसार थोड़ा अलग बताया जाता है।)

पूजा सामग्री

  • आम के पत्तों का तोरण (मामिडी तोरणम्), रंगोली (मुग्गु / रंगोली)
  • हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल, दीपक, अगरबत्ती, नारियल, पान-सुपारी
  • पचड़ी की सामग्री (ऊपर तालिका)
  • नैवेद्य: ओब्बट्टु / होलिगे / बोब्बटलु (मीठी भरवाँ रोटी), पुलिहोरा (इमली चावल), पायसम
  • नया पंचांग (पंचांगम्)

पूजा विधि — चरणबद्ध

  1. तैलाभ्यंग स्नान: सूर्योदय से पहले तिल का तेल लगाकर स्नान करें; नए वस्त्र पहनें।
  2. घर की सजावट: द्वार पर आम के पत्तों का तोरण और आँगन में रंगोली।
  3. देव पूजन: घर के इष्ट देवता, ब्रह्मा जी और गणेश जी का हल्दी-कुमकुम, अक्षत, फूल से पूजन करें — गणेश पूजा विधि।
  4. पचड़ी भोग: उगादि पचड़ी और ओब्बट्टु/बोब्बटलु का नैवेद्य लगाएँ।
  5. प्रसाद ग्रहण: भोजन से पहले परिवार के सभी सदस्य एक-एक चम्मच पचड़ी खाएँ।
  6. पंचांग श्रवणम्: शाम को मंदिर या घर पर पुरोहित से नए वर्ष का पंचांग सुनें — वर्ष का नाम (60 संवत्सरों के चक्र में), राजा-मंत्री, वर्षा और राशिफल।
  7. बड़ों का आशीर्वाद: बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लें; मंदिर दर्शन करें।

क्षेत्रीय परंपराएँ

  • कर्नाटक: “बेवु-बेल्ला” (नीम-गुड़) बाँटने की परंपरा; होलिगे का भोजन।
  • आंध्र-तेलंगाना: उगादि पचड़ी, बोब्बटलु; कवि सम्मेलन (कवि सम्मेलनम्) और पंचांग श्रवणम्।
  • उगादि से ही चैत्र नवरात्रि और वसंत नवरात्रि भी आरंभ होती है — राम नवमी इसके नौवें दिन आती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उगादि कब मनाया जाता है? (When is Ugadi?)

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को, प्रायः मार्च-अप्रैल में — वही दिन जब महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा होता है।

उगादि पचड़ी में कौन-से छह स्वाद होते हैं? (Six tastes of Ugadi Pachadi)

गुड़ (मीठा), नीम के फूल (कड़वा), कच्चा आम (कसैला), इमली (खट्टा), मिर्च (तीखा) और नमक (नमकीन)।

उगादि का अर्थ क्या है? (Meaning of Ugadi)

“युग” और “आदि” से बना शब्द — नए युग या नए वर्ष का आरंभ।

पंचांग श्रवणम् क्या है? (What is Panchanga Shravanam?)

उगादि के दिन पुरोहित द्वारा नए वर्ष के पंचांग का पाठ — वर्ष का नाम, ग्रह स्थिति, वर्षा और राशिफल।

उगादि पर क्या बनाते हैं? (Traditional dishes)

उगादि पचड़ी, ओब्बट्टु/होलिगे या बोब्बटलु, पुलिहोरा और पायसम।

यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।

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