सोमवती अमावस्या कब है? 2026–27 की तारीखें, महत्व और पूजा विधि
अगली सोमवती अमावस्या — जयपुर पंचांग के अनुसार सोमवार, 9 नवंबर 2026 को है (कार्तिक अमावस्या)। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। 2026–27 में ऐसे चार अवसर हैं: 9 नवंबर 2026, 8 मार्च 2027, 2 अगस्त 2027 और 27 दिसंबर 2027। इस दिन तीर्थ-स्नान, दान, पितृ तर्पण और पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
सीधा जवाब
अगली सोमवती अमावस्या कब है?
📅 सोमवार, 9 नवंबर 2026 — कार्तिक अमावस्या ⏳
- 🌑 अमावस्या तिथि: 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे से 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे तक
- 🛕 9 नवंबर की सुबह सूर्योदय के समय अमावस्या रहने से स्नान-दान इसी दिन होगा
- 🪔 दीपावली का लक्ष्मी पूजन इससे एक दिन पहले, 8 नवंबर की शाम है
📌 सोमवती अमावस्या कैसे तय होती है? जिस सोमवार को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि हो, वही सोमवती अमावस्या मानी जाती है — इसीलिए स्नान-दान वाला दिन इसका आधार है।
समय जयपुर (IST) के अनुसार (Drik Panchang)। आपके शहर में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
सोमवती अमावस्या 2026–27 — सभी तारीखें
| तारीख | अमावस्या | तिथि (जयपुर) | साथ में |
|---|---|---|---|
| 9 नवंबर 2026 (सोम) | कार्तिक अमावस्या | 8 नवंबर 11:27 AM – 9 नवंबर 12:31 PM | दीपावली के अगले दिन; दीपावली 8 नवंबर |
| 8 मार्च 2027 (सोम) | फाल्गुन अमावस्या | 7 मार्च 1:46 PM – 8 मार्च 2:58 PM | महाशिवरात्रि (6 मार्च) के दो दिन बाद |
| 2 अगस्त 2027 (सोम) | श्रावण अमावस्या | 1 अगस्त 7:19 PM – 2 अगस्त 3:34 PM | हरियाली अमावस्या; सावन सोमवार भी |
| 27 दिसंबर 2027 (सोम) | पौष अमावस्या | 27 दिसंबर 12:22 AM – 28 दिसंबर 1:41 AM | वर्ष 2027 की अंतिम अमावस्या |
2 अगस्त 2027 का संयोग विशेष है — उस दिन सावन का सोमवार, हरियाली अमावस्या और सोमवती अमावस्या तीनों एक साथ हैं।
सोमवती अमावस्या का महत्व
अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है, और सोमवार भगवान शिव का दिन है। दोनों के एक साथ पड़ने से यह तिथि स्नान, दान, पितृ तर्पण और शिव पूजा — चारों के लिए विशेष मानी जाती है। लोक-मान्यता है कि ऐसे अवसर वर्ष में केवल एक-दो बार आते हैं, इसलिए इस दिन गंगा, पुष्कर या अन्य तीर्थों पर स्नान के लिए भारी भीड़ रहती है।
उत्तर भारत में विवाहित महिलाएँ इस दिन पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखकर पीपल वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करती हैं। परंपरा में पीपल में त्रिदेव — ब्रह्मा, विष्णु और शिव — का वास माना जाता है।
सोमवती अमावस्या की पूजा विधि
- स्नान: सुबह तीर्थ या नदी में स्नान करें; संभव न हो तो घर पर नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- सूर्य अर्घ्य और शिव पूजा: सूर्यदेव को जल अर्पित करें, फिर शिवलिंग पर जल, दूध और बेल पत्र चढ़ाएँ।
- पीपल पूजा: पीपल की जड़ में जल और कच्चा दूध चढ़ाएँ, रोली-अक्षत लगाएँ, कच्चा सूत (मौली) लपेटते हुए परिक्रमा करें। परंपरा में 108 परिक्रमा का उल्लेख है; जितनी संभव हो, उतनी श्रद्धा से करें।
- पितृ तर्पण: जल में काले तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को तर्पण करें।
- दान: अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ या सामर्थ्य अनुसार दान करें; गाय, कुत्ते और कौए को भोजन देना भी शुभ माना जाता है।
- शाम: पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
क्या करें और क्या न करें
- इस दिन सात्विक भोजन करें; मांसाहार, मदिरा और तामसिक भोजन से बचें।
- वाद-विवाद और क्रोध से बचें — अमावस्या को संयम और मौन का दिन माना जाता है।
- परंपरा में इस दिन बाल-नाखून काटना और नई वस्तु की खरीद टालने की सलाह दी जाती है।
- यदि उपवास रखें तो सेहत के अनुसार फलाहार लें; बुज़ुर्ग और रोगी कठोर व्रत न रखें।
सोमवती अमावस्या और खाटू श्याम जी
अमावस्या के दिन खाटू में सामान्य दिनों से अधिक भीड़ रहती है। 9 नवंबर 2026 की सोमवती अमावस्या दीपावली के ठीक अगले दिन है, और 8 मार्च 2027 वाली सोमवती अमावस्या फाल्गुन मेले (18–20 मार्च) से दस दिन पहले है — इन दोनों अवसरों पर खाटू मार्ग पर भीड़ बढ़ी रहेगी। दर्शन की योजना हो तो सुबह जल्दी पहुँचें। मंदिर सुबह 4:30 बजे खुलता है और दोपहर 2 से 4 बजे बंद रहता है।
खाटू के पास स्नान के लिए श्याम कुंड है; तीर्थ-स्नान के लिए राजस्थान में पुष्कर (खाटू से लगभग 178 km) प्रसिद्ध है। मंदिर की जानकारी: खाटू श्याम जी मंदिर।
संबंधित उपयोगी जानकारी
सोमवती अमावस्या — सामान्य प्रश्न
अगली सोमवती अमावस्या कब है? (Next Somvati Amavasya)
अगली सोमवती अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर 2026 को है (कार्तिक अमावस्या)। इसके बाद 8 मार्च, 2 अगस्त और 27 दिसंबर 2027 को सोमवती अमावस्या है।
सोमवती अमावस्या क्या होती है? (What is Somvati Amavasya)
जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन (सूर्योदय के समय) पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। यह वर्ष में आमतौर पर एक से तीन बार आती है।
सोमवती अमावस्या पर पीपल की पूजा क्यों होती है? (Why Peepal puja)
परंपरा में पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और शिव का वास माना जाता है। विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घायु के लिए पीपल पर जल-दूध चढ़ाकर और सूत लपेटकर परिक्रमा करती हैं।
2027 में कितनी सोमवती अमावस्या हैं? (Somvati Amavasya 2027)
2027 में तीन सोमवती अमावस्या हैं — 8 मार्च (फाल्गुन), 2 अगस्त (श्रावण, हरियाली अमावस्या के साथ) और 27 दिसंबर (पौष)।
क्या 9 नवंबर 2026 को दीपावली है? (Is Diwali on 9 Nov?)
नहीं। दीपावली का लक्ष्मी पूजन 8 नवंबर 2026 की शाम है, क्योंकि उस शाम प्रदोष काल में अमावस्या है। 9 नवंबर की सुबह सूर्योदय पर अमावस्या होने से स्नान-दान और सोमवती अमावस्या 9 नवंबर को है।
पंचांग संदर्भ
- Drik Panchang — Amavasya Dates 2026 व 2027 और 2027 Hindu Festivals Calendar, Jaipur
- Drik Panchang — Lakshmi Puja 2026, Jaipur