एकादशी का व्रत खाटू श्याम भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्रत है। नियम सरल हैं: दशमी की शाम से सात्त्विक भोजन, एकादशी को अन्न (विशेषकर चावल) का त्याग और फलाहार या निर्जल व्रत, और द्वादशी को तय पारण समय में व्रत खोलना। नीचे व्रत की पूरी विधि, क्या खाएँ-क्या नहीं, पारण के नियम और अगली एकादशियों का पारण समय (जयपुर) दिया गया है।
🌿 एकादशी व्रत — संक्षेप में
- दशमी: सूर्यास्त से पहले एक बार सात्त्विक भोजन; चावल नहीं
- एकादशी: अन्न नहीं; फलाहार, दूध-फल या निर्जल, सामर्थ्य अनुसार
- द्वादशी: पारण समय में व्रत खोलें; हरि वासर में पारण नहीं
- अगली एकादशी: इन्दिरा एकादशी, मंगलवार 6 अक्टूबर 2026; पारण 7 अक्टूबर, सुबह 6:22–8:43 (जयपुर)
अगली एकादशियाँ और पारण समय (जयपुर)
| एकादशी | व्रत की तारीख | पारण (अगले दिन) |
|---|---|---|
| इन्दिरा एकादशी | मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 | 7 अक्टूबर, 6:22 AM – 8:43 AM |
| पापांकुशा एकादशी | गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 | 23 अक्टूबर, 6:31 AM – 8:47 AM |
| रमा एकादशी | गुरुवार, 5 नवंबर 2026 | 6 नवंबर, 6:40 AM – 8:52 AM |
| देवउठनी एकादशी (श्याम जन्मोत्सव) | शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 | 21 नवंबर, 1:17 PM – 3:26 PM (हरि वासर 12:07 PM तक) |
| उत्पन्ना एकादशी | शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 | 5 दिसंबर, 7:01 AM – 9:08 AM |
स्रोत: Drik Panchang, जयपुर। दूसरे शहरों में पारण का समय कुछ मिनट अलग होता है। देवउठनी पर गौण/वैष्णव एकादशी 21 नवंबर को है, जिसका पारण 22 नवंबर सुबह 6:52–9:00 है। सभी तिथियाँ: एकादशी कैलेंडर।
व्रत की पूरी विधि — क्रम से
दशमी (व्रत से एक दिन पहले)
- सूर्यास्त से पहले एक बार सात्त्विक भोजन करें; प्याज़-लहसुन, मांसाहार और चावल न लें।
- रात में हल्का रहें और मन में अगले दिन के व्रत का विचार रखें।
एकादशी (व्रत का दिन)
- स्नान और संकल्प: सुबह स्नान करके बाबा श्याम / भगवान विष्णु के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। संकल्प में तय करें कि व्रत निर्जल होगा, फलाहारी या केवल एक समय फलाहार।
- पूजा: दीपक जलाएँ, तुलसी दल और फूल चढ़ाएँ, और खाटू श्याम जी की आरती करें। घर पर पूरी विधि: घर पर श्याम बाबा की पूजा।
- भजन-पाठ: दिन में खाटू श्याम चालीसा या मंत्र-जप; संभव हो तो उस एकादशी की व्रत कथा पढ़ें।
- दर्शन: बहुत-से भक्त एकादशी पर खाटू या अपने शहर के श्याम मंदिर जाते हैं: पास का मंदिर · घर बैठे: आज के लाइव दर्शन।
- रात्रि: कई भक्त रात में भजन-कीर्तन या जागरण करते हैं: जागरण कैसे कराएँ।
द्वादशी (पारण का दिन)
- ऊपर की तालिका के पारण समय में व्रत खोलें।
- पहले बाबा को भोग लगाएँ, फिर तुलसी दल या जल से व्रत खोलें और उसके बाद सात्त्विक भोजन करें।
- हो सके तो किसी ज़रूरतमंद को भोजन या दान दें।
व्रत में क्या खाएँ, क्या नहीं
| ✅ खा सकते हैं (फलाहारी व्रत) | ❌ न खाएँ |
|---|---|
| फल, दूध, दही, मखाना, मेवा | चावल और चावल से बनी चीज़ें |
| साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा (परिवार की परंपरा अनुसार) | गेहूँ, दालें और अन्य अनाज |
| आलू, शकरकंद, अरबी | प्याज़, लहसुन |
| सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा | साधारण नमक (कई परिवारों में वर्जित) |
| नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी | मांसाहार, शराब, तंबाकू |
फलाहार के नियम परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होते हैं; अपनी कुल-परंपरा का पालन करें।
पारण के नियम — सबसे ज़्यादा होने वाली गलतियाँ
- पारण द्वादशी में ही: व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद, द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले खोला जाता है।
- हरि वासर में पारण नहीं: द्वादशी का पहला चौथाई भाग “हरि वासर” कहलाता है, जिसमें पारण नहीं किया जाता। इसी कारण देवउठनी एकादशी 2026 का पारण 21 नवंबर को सुबह नहीं, दोपहर 1:17 बजे के बाद है।
- मध्याह्न से बचें: परंपरा में सुबह का पारण उत्तम माना गया है; सुबह न हो सके तो मध्याह्न के बाद करें।
- पारण भूलना: तय समय में पारण न करने को व्रत का अधूरापन माना जाता है, इसलिए समय पहले ही नोट कर लें।
श्याम भक्तों के लिए एकादशी क्यों विशेष
खाटू में हर एकादशी पर भारी भीड़ रहती है, और शुक्ल पक्ष की एकादशी सबसे विशेष मानी जाती है। कार्तिक शुक्ल (देवउठनी) एकादशी को श्याम जन्मोत्सव होता है, और फाल्गुन शुक्ल (आमलकी) एकादशी के आसपास फाल्गुन मेला लगता है (2027 में 18 मार्च)। एकादशी पर खाटू जाने की योजना हो तो भीड़ और ठहरने की तैयारी पहले करें: एकादशी पर दर्शन · खाटू में कमरा।
किसे व्रत में ढील लेनी चाहिए
बच्चे, बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ, बीमार व्यक्ति और नियमित दवा लेने वाले लोग निर्जल व्रत न रखें। ऐसे लोग फलाहार या एक समय भोजन वाला व्रत रख सकते हैं, या केवल पूजा-पाठ से एकादशी मना सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो तो डॉक्टर की सलाह लें। भक्ति परंपरा में भाव को नियम से ऊपर माना गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दशमी की शाम सात्त्विक भोजन करें, एकादशी को सुबह स्नान-संकल्प करके अन्न त्यागें और सामर्थ्य अनुसार फलाहार या निर्जल व्रत रखें, दिन में पूजा-भजन करें, और द्वादशी को तय पारण समय में व्रत खोलें।
अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद, हरि वासर समाप्त होने पर और द्वादशी तिथि खत्म होने से पहले। उदाहरण: इन्दिरा एकादशी 2026 का पारण 7 अक्टूबर को सुबह 6:22–8:43 (जयपुर)।
परंपरा में एकादशी पर अन्न, विशेषकर चावल, का त्याग व्रत का मुख्य नियम माना गया है। इसी कारण दशमी और एकादशी दोनों दिन चावल नहीं खाया जाता।
शनिवार, 21 नवंबर 2026 को दोपहर 1:17 से 3:26 बजे तक (जयपुर)। उस दिन हरि वासर दोपहर 12:07 बजे तक है, इसलिए सुबह पारण नहीं होगा।
फलाहारी व्रत में बहुत-से लोग दूध वाली चाय लेते हैं, पर कई परिवार इसे भी वर्जित मानते हैं। अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें; निर्जल व्रत में कुछ भी नहीं लिया जाता।
स्रोत: Drik Panchang, जयपुर (एकादशी तिथियाँ व पारण समय, 2026); प्रचलित वैष्णव व्रत परंपरा। व्रत के नियम परिवार व संप्रदाय के अनुसार अलग हो सकते हैं।



