Home एकादशी कैलेंडर जया एकादशी 2026 – संपूर्ण जानकारी, पूजा विधि, व्रत कथा, महत्व

जया एकादशी 2026 – संपूर्ण जानकारी, पूजा विधि, व्रत कथा, महत्व

📅 दिनांक फरवरी 23, 2026 (सोमवार)
🗓️ तिथि माघ, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ फ़र॰ 22, 05:21 PM
⏰ समाप्त फ़र॰ 23, 02:31 PM

प्राचीन काल में इंद्रलोक में एक भव्य उत्सव आयोजित किया गया। उस समय गंधर्व माल्यवान और अप्सरा पुष्पवती भगवान इंद्र के समक्ष नृत्य एवं गायन कर रहे थे।

नृत्य के दौरान दोनों एक-दूसरे के प्रेम में इतने अधिक खो गए कि उनका ध्यान प्रस्तुति से हट गया। इससे देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने दोनों को शाप दे दिया कि वे स्वर्ग से गिरकर पृथ्वी पर पिशाच योनि में जन्म लें।

शाप के प्रभाव से दोनों अत्यंत दुःखी जीवन बिताने लगे। संयोगवश माघ शुक्ल पक्ष की जया एकादशी के दिन उन्होंने भोजन नहीं किया और पूरी रात जागरण किया। इस प्रकार अनजाने में उनसे जया एकादशी का व्रत हो गया।

भगवान विष्णु की कृपा से उनके सभी पाप नष्ट हो गए और वे पिशाच योनि से मुक्त होकर पुनः अपने दिव्य स्वरूप में स्वर्ग लौट गए।

इसलिए जया एकादशी को भूत-प्रेत और पिशाच बाधाओं से मुक्ति दिलाने वाली एकादशी माना जाता है।


जया एकादशी पर क्या करें?

✅ भगवान विष्णु की पूजा करें।
✅ तुलसी दल अर्पित करें।
✅ विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
✅ भजन-कीर्तन करें।
✅ दान-पुण्य करें।
✅ रात्रि जागरण करें।


क्या न करें?

❌ चावल का सेवन न करें।
❌ क्रोध और विवाद से बचें।
❌ मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन न करें।
❌ झूठ और निंदा से दूर रहें।
❌ किसी का अपमान न करें।


व्रत में क्या खा सकते हैं?

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना
  • कुट्टू का आटा
  • सिंघाड़े का आटा
  • राजगीरा
  • सूखे मेवे

जया एकादशी के मंत्र

विष्णु मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥

श्री हरि मंत्र

ॐ विष्णवे नमः॥

विष्णु गायत्री मंत्र

ॐ नारायणाय विद्महे।
वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जया एकादशी किस महीने में आती है?
जया एकादशी माघ मास के शुक्ल पक्ष में आती है।
जया एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
यह पापों का नाश करने तथा भूत-प्रेत एवं पिशाच योनि से मुक्ति दिलाने वाली एकादशी मानी जाती है।
जया एकादशी की कथा किनकी है?
यह कथा गंधर्व माल्यवान और अप्सरा पुष्पवती की है।
क्या महिलाएं जया एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या जया एकादशी पर चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय के भीतर पारण करना चाहिए।
जया एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
भगवान विष्णु की कृपा, पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति।
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