🛕 इस दिन खाटू आ रहे हैं?
हर शुक्ल एकादशी–द्वादशी को खाटू में मासिक मेला भरता है और भीड़ सामान्य दिनों से कई गुना होती है। ठहरने, टैक्सी और दर्शन की जानकारी एक जगह:
निर्जला एकादशी 2027 कब है? तारीख, पारण समय, व्रत कथा और नियम
निर्जला एकादशी 2027 — जयपुर/राजस्थान पंचांग के अनुसार सोमवार, 14 जून 2027 को है। यह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसमें व्रती सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक अन्न के साथ-साथ जल भी ग्रहण नहीं करते। इसे सभी 24 एकादशियों में सबसे कठिन और सबसे पुण्यदायी व्रत माना जाता है। इसे भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी भी कहा जाता है।
सीधा जवाब
निर्जला एकादशी 2027 कब है?
📅 सोमवार, 14 जून 2027 — ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी ⏳
- 🌙 एकादशी तिथि: 14 जून रात 2:11 बजे से 15 जून रात 2:07 बजे तक
- 💧 पारण (व्रत खोलना): 15 जून, सुबह 8:13 से 8:18 बजे — केवल 5 मिनट
📌 पारण का समय बहुत छोटा है: 15 जून को हरि वासर सुबह 8:13 बजे समाप्त होता है और उसके कुछ ही मिनट बाद द्वादशी तिथि भी समाप्त हो जाती है। इसलिए पारण की तैयारी पहले से रखें — तुलसी दल, जल और फल सामने रखकर ठीक 8:13 के बाद व्रत खोलें।
समय जयपुर (IST) के अनुसार (Drik Panchang)। आपके शहर में पारण का समय कुछ मिनट अलग हो सकता है — अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें।
निर्जला एकादशी का महत्व
वर्ष में 24 एकादशियाँ आती हैं (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। मान्यता है कि जो व्यक्ति वर्ष भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाता, वह यदि श्रद्धा और नियम से केवल निर्जला एकादशी का व्रत कर ले, तो उसे सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य मिलता है। यह व्रत भगवान विष्णु की उपासना को समर्पित है।
ज्येष्ठ का महीना वर्ष का सबसे गर्म समय होता है, और इसी गर्मी में बिना जल के पूरा दिन बिताना इस व्रत को कठिन बनाता है। इसीलिए इस दिन जल-दान का विशेष महत्व है — प्यासे को पानी पिलाना इस एकादशी का सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है।
व्रत कथा — भीमसेन और महर्षि व्यास
पौराणिक कथा के अनुसार पांडवों में भीमसेन को भूख सहन नहीं होती थी, इसलिए वे एकादशी का व्रत नहीं रख पाते थे, जबकि उनके भाई और माता कुंती नियम से हर एकादशी का व्रत करते थे। दुखी होकर भीम ने महर्षि वेदव्यास से कोई ऐसा उपाय पूछा जिससे उन्हें भी एकादशी का पुण्य मिल सके।
महर्षि व्यास ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को बिना अन्न और बिना जल के एक दिन का कठोर व्रत रखने की सलाह दी और बताया कि इस एक व्रत से वर्ष भर की सभी एकादशियों का फल मिलता है। भीम ने यह व्रत किया — इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी कहा जाता है।
व्रत और पूजा विधि
- दशमी (13 जून) की रात: सात्विक भोजन करें और रात को अन्न ग्रहण न करें। शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए दिन भर पर्याप्त पानी पिएँ।
- एकादशी की सुबह: स्नान के बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें — “आज मैं निर्जल व्रत रखूँगा/रखूँगी।”
- पूजा: पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, अक्षत, धूप-दीप और फल से विष्णु जी की पूजा करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- दिन भर: जल और अन्न दोनों से परहेज़; आचमन के लिए थोड़ा जल लेना परंपरा में स्वीकार्य है। दिन में सोने के बजाय भजन-कीर्तन करें।
- रात्रि जागरण: संभव हो तो रात में भगवान का भजन करें।
- पारण (15 जून): सुबह स्नान-पूजा के बाद, 8:13 से 8:18 बजे के बीच, पहले तुलसी दल और जल ग्रहण करके व्रत खोलें; फिर ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को दान दें।
इस दिन क्या दान करें
| दान | क्यों |
|---|---|
| जल से भरा मिट्टी का घड़ा या कलश | निर्जला एकादशी का मुख्य दान — गर्मी में जल-दान का सबसे बड़ा पुण्य |
| शर्बत, छाछ या ठंडा पानी (प्याऊ) | राहगीरों और प्यासों की सेवा |
| हाथ का पंखा, छाता, जूते-चप्पल | ज्येष्ठ की गर्मी से बचाव की वस्तुएँ |
| अन्न, फल, वस्त्र | ज़रूरतमंद या ब्राह्मण को सामर्थ्य अनुसार |
स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरी सावधानियाँ
- दिन में धूप में बाहर जाने से बचें और ठंडी जगह पर रहें।
- भारी शारीरिक काम या लंबी यात्रा इस दिन न करें।
- पारण के बाद एकदम से बहुत पानी या भारी भोजन न लें — पहले थोड़ा जल, फिर हल्का भोजन।
निर्जला एकादशी और खाटू श्याम जी
खाटू श्याम जी के भक्तों के लिए हर शुक्ल एकादशी विशेष होती है, और निर्जला एकादशी पर भी खाटू में भक्तों की भीड़ रहती है। लेकिन जून में राजस्थान का तापमान बहुत अधिक होता है — निर्जल व्रत रखकर लंबी कतार में खड़े होना जोखिम भरा हो सकता है। अगर इस दिन दर्शन की योजना है, तो सुबह 4:30 बजे मंदिर खुलने के बाद जल्दी दर्शन करें, दोपहर की धूप से बचें, और साथ के यात्रियों के लिए पानी रखें।
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जून 2027 की अन्य एकादशी और पर्व
| तारीख (2027) | पर्व |
|---|---|
| 4 जून (शुक्र) | ज्येष्ठ अमावस्या |
| 14 जून (सोम) | निर्जला एकादशी |
| 18 जून (शुक्र) | ज्येष्ठ पूर्णिमा |
| 30 जून (बुध) | योगिनी एकादशी |
| 14 जुलाई (बुध) | देवशयनी एकादशी — चातुर्मास आरंभ |
पूरी सूची: एकादशी कैलेंडर 2026–27 · निर्जला एकादशी पूजा विधि · पूर्णिमा कब है · अमावस्या कब है
पंचांग संदर्भ
- Drik Panchang — Nirjala Ekadashi 2027, Jaipur (तिथि, पारण, हरि वासर)
- Drik Panchang — Ekadashi Dates 2027, Purnima/Amavasya Dates 2027, Jaipur