Home एकादशी कैलेंडर निर्जला एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

निर्जला एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक जून 25, 2026 (बृहस्पतिवार)
🗓️ तिथि ज्येष्ठ, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ जून 24, 06:12 PM
⏰ समाप्त जून 25, 08:09 PM

1. दशमी तिथि से तैयारी

  • दशमी के दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • रात्रि में हल्का भोजन करें।
  • तामसिक भोजन एवं नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

2. प्रातःकाल स्नान करें

एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

3. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु के समक्ष जल लेकर व्रत का संकल्प करें।

संकल्प मंत्र:

मम समस्त पापक्षयपूर्वक श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं निर्जला एकादशी व्रतमहं करिष्ये।

4. भगवान विष्णु की पूजा करें

  • भगवान विष्णु का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
  • गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
  • चंदन, अक्षत, पुष्प एवं तुलसी दल अर्पित करें।
  • धूप एवं दीप प्रज्वलित करें।
  • फल एवं नैवेद्य अर्पित करें।

5. मंत्र जाप करें

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥

या

ॐ विष्णवे नमः॥

6. निर्जल व्रत का पालन

  • पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करें।
  • भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • भजन, कीर्तन और सत्संग करें।

7. रात्रि जागरण

संभव हो तो रात्रि में भगवान विष्णु के भजन एवं कीर्तन करते हुए जागरण करें।

8. द्वादशी को पारण

द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद शुभ समय पर जल ग्रहण कर व्रत का पारण करें।


निर्जला एकादशी पर क्या करें?

✅ भगवान विष्णु की पूजा करें।
✅ तुलसी दल अर्पित करें।
✅ विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
✅ दान-पुण्य करें।
✅ जल, छाता, वस्त्र और अन्न का दान करें।
✅ भजन-कीर्तन एवं जागरण करें।


निर्जला एकादशी पर क्या न करें?

❌ अन्न और जल ग्रहण न करें (यदि स्वास्थ्य अनुमति दे)।
❌ चावल का सेवन न करें।
❌ क्रोध, झूठ और विवाद से बचें।
❌ मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन न करें।
❌ किसी का अपमान न करें।


निर्जला एकादशी पर दान का महत्व

निर्जला एकादशी पर निम्न वस्तुओं का दान विशेष पुण्यदायी माना जाता है:

  • जल से भरा कलश
  • छाता
  • वस्त्र
  • पंखा
  • जूते-चप्पल
  • फल
  • अन्न
  • दक्षिणा

गर्मी के मौसम में जलदान और छाता दान को अत्यंत शुभ माना गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्जला एकादशी क्यों मनाई जाती है?
भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त करने के लिए।
निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी क्यों कहते हैं?
क्योंकि महाभारत काल में भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास के निर्देश पर यह व्रत किया था।
क्या निर्जला एकादशी में पानी पी सकते हैं?
परंपरागत रूप से इस व्रत में जल भी ग्रहण नहीं किया जाता। हालांकि स्वास्थ्य कारणों से व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार व्रत कर सकता है।
निर्जला एकादशी किस देवता को समर्पित है?
यह भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है।
क्या महिलाएं निर्जला एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित पारण समय के भीतर करना चाहिए।
निर्जला एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
सभी 24 एकादशियों के व्रत के समान पुण्य, पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति।
यदि स्वास्थ्य कारणों से निर्जल व्रत संभव न हो तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में श्रद्धा के साथ फलाहार या जल ग्रहण करके भी भगवान विष्णु की पूजा की जा सकती है।
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