निर्जला एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी ⭐
महाभारत काल में पांडवों में से भीमसेन अत्यंत बलशाली थे, लेकिन उन्हें अत्यधिक भूख लगती थी। माता कुंती, द्रौपदी, युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल और सहदेव सभी एकादशी का व्रत रखते थे, परंतु भीमसेन के लिए पूरे दिन भूखे रहना कठिन था।
एक दिन भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास से कहा कि वे सभी धार्मिक नियमों का पालन करना चाहते हैं, लेकिन प्रत्येक एकादशी का व्रत रखना उनके लिए संभव नहीं है।
तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत करने की सलाह दी और कहा कि यदि वे इस दिन बिना अन्न और जल के व्रत करें, तो उन्हें वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होगा।
वेदव्यास जी के निर्देशानुसार भीमसेन ने निर्जला एकादशी का व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें सभी एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त हुआ।
तभी से यह एकादशी भीमसेनी एकादशी के नाम से भी प्रसिद्ध हुई।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी पर खाटू दर्शन की योजना?
पहले से होटल और टैक्सी बुक करें — एकादशी पर भारी भीड़ होती है।
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योगिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी
📅 अन्य एकादशी 2026
📚 सन्दर्भ एवं अधिक जानकारी
- Drik Panchang — Ekadashi Dates & Muhurat 2026 ↗ — Accurate tithi timings
- Sikar.rajasthan.gov.in — Official Govt Website ↗ — Sikar district official information
- Wikipedia — Ekadashi ↗ — Complete Ekadashi history