Home एकादशी कैलेंडर पौष पुत्रदा एकादशी 2026 | व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, मंत्र और पारण समय

पौष पुत्रदा एकादशी 2026 | व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, मंत्र और पारण समय

पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है और विशेष रूप से संतान सुख, संतान की उन्नति, स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए की जाती है।

📅 दिनांक Jan 25 (रविवार)
🗓️ तिथि पौष, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ जन॰ 25, 12:10 PM
⏰ समाप्त जन॰ 26, 09:43 AM

पौष पुत्रदा एकादशी पूजा सामग्री

  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र
  • माता लक्ष्मी का चित्र
  • पीला वस्त्र
  • गंगाजल
  • पंचामृत
  • चंदन
  • अक्षत (चावल)
  • तुलसी दल
  • पीले पुष्प
  • धूप, दीप
  • नैवेद्य
  • मौसमी फल
  • नारियल

पौष पुत्रदा एकादशी पूजा विधि

1. प्रातःकाल स्नान करें

एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें तथा स्वच्छ एवं पीले वस्त्र धारण करें।

2. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु के समक्ष जल लेकर व्रत का संकल्प करें।

संकल्प मंत्र:

मम समस्त पापक्षयपूर्वक श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं पुत्रदा एकादशी व्रतमहं करिष्ये।

3. भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी का पूजन करें

  • गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
  • चंदन, पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
  • तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं।
  • धूप एवं दीप प्रज्वलित करें।
  • नैवेद्य अर्पित करें।

4. मंत्र जप करें

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥

या

ॐ विष्णवे नमः॥

5. पुत्रदा एकादशी व्रत कथा का श्रवण करें

पूजा के पश्चात व्रत कथा अवश्य पढ़ें या सुनें।

6. रात्रि जागरण करें

संभव हो तो भगवान विष्णु के भजन, कीर्तन एवं नामस्मरण करते हुए जागरण करें।

7. द्वादशी को पारण करें

द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक व्रत का पारण करें और ब्राह्मण अथवा जरूरतमंदों को दान दें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुत्रदा एकादशी किसके लिए की जाती है?
संतान प्राप्ति, संतान के सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए।
पुत्रदा एकादशी वर्ष में कितनी बार आती है?
पुत्रदा एकादशी वर्ष में दो बार आती है—एक पौष शुक्ल पक्ष में और दूसरी श्रावण शुक्ल पक्ष में।
क्या अविवाहित व्यक्ति भी यह व्रत कर सकते हैं?
हाँ, भगवान विष्णु की कृपा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए कोई भी श्रद्धालु यह व्रत कर सकता है।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित पारण समय के भीतर करना चाहिए।
क्या महिलाएं पुत्रदा एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं एवं पुरुष दोनों यह व्रत कर सकते हैं।
पुत्रदा एकादशी का मुख्य फल क्या है?
संतान सुख, पारिवारिक समृद्धि, भगवान विष्णु की कृपा और पापों से मुक्ति।
शेयर करें: WhatsApp Facebook

एकादशी पर खाटू दर्शन की योजना?

पहले से होटल और टैक्सी बुक करें — एकादशी पर भारी भीड़ होती है।

अभी बुक करें

📅 अन्य एकादशी 2026

📚 सन्दर्भ एवं अधिक जानकारी