मुखपृष्ठ › पूजा विधि › धनतेरस धन्वंतरि-कुबेर पूजा विधि

धनतेरस धन्वंतरि-कुबेर पूजा विधि

📅 21 अगस्त 2026 ⏱️ 5 मिनट पढ़ने का समय
धनतेरस धन्वंतरि-कुबेर पूजा विधि के लिए सजी पूजा चौकी और प्रमुख सामग्री

धनतेरस (धनत्रयोदशी) कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाई जाती है और यहीं से पाँच दिन का दीपोत्सव शुरू होता है। इस दिन तीन पूजाएँ होती हैं — आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, धन के रक्षक कुबेर के साथ माता लक्ष्मी की पूजा, और शाम को घर के बाहर यम दीपदान। नीचे तीनों की सरल घरेलू विधि दी गई है।

📅 धनतेरस 2026 कब है? शुक्रवार, 6 नवंबर 2026   ⏳ 9 दिन बाकी

इस पेज पर घर पर की जाने वाली पूरी पूजा विधि है। शुभ मुहूर्त, तिथि का समय और सही तारीख की पूरी जानकारी के लिए देखें: धनतेरस 2026 — तारीख व मुहूर्त →

धनतेरस की तीन पूजाएँ — एक नज़र में

पूजा समय उद्देश्य
धन्वंतरि पूजा प्रदोष काल (शाम) परिवार का आरोग्य
लक्ष्मी-कुबेर पूजा प्रदोष काल धन का सदुपयोग और समृद्धि
यम दीपदान सूर्यास्त के बाद अकाल मृत्यु के भय से रक्षा की मान्यता

2026 का पूजा मुहूर्त और “6 या 7 नवंबर” की पूरी जानकारी धनतेरस 2026 पेज पर है।

धनतेरस पूजा सामग्री

  • भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, श्री गणेश और कुबेर का चित्र या प्रतिमा
  • चौकी, लाल या पीला कपड़ा, कलश, आम के पत्ते, नारियल
  • रोली, हल्दी, अक्षत, मौली, कमल या गुलाब के फूल, दूर्वा
  • साबुत धनिया (नया खरीदा हुआ), खील-बताशे, मिठाई, फल
  • इस दिन खरीदे गए नए बर्तन, सिक्के या आभूषण
  • घी के दीपक, और यम दीपदान के लिए चार मुख वाला आटे या मिट्टी का दीपक, सरसों का तेल
  • तुलसी पत्र और आरोग्य के प्रतीक रूप में हल्दी या कोई आयुर्वेदिक औषधि

धनतेरस पूजा विधि — चरणबद्ध

1. सुबह की तैयारी

घर और मुख्य द्वार की सफाई करें, द्वार पर रंगोली और तोरण लगाएँ। दिन में अपनी क्षमता के अनुसार नई वस्तु (बर्तन, सिक्का, झाड़ू या आभूषण) खरीदें — दिखावे के लिए कर्ज़ लेकर खरीदारी न करें।

2. पूजा स्थान सजाना

उत्तर दिशा (कुबेर की दिशा) या उत्तर-पूर्व में चौकी पर कपड़ा बिछाएँ। बीच में धन्वंतरि, बाईं ओर गणेश, दाईं ओर लक्ष्मी-कुबेर का चित्र रखें। जल भरा कलश स्थापित करें और नए बर्तन में साबुत धनिया व खील भरकर रखें।

3. धन्वंतरि पूजा (प्रदोष काल में)

  1. हाथ में जल-अक्षत लेकर परिवार के आरोग्य का संकल्प लें।
  2. श्री गणेश को तिलक-फूल अर्पित करें — “ॐ गं गणपतये नमः”।
  3. भगवान धन्वंतरि को रोली, अक्षत, पीले फूल, तुलसी और मिठाई अर्पित करें। मंत्र: “ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये। अमृतकलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय सर्वरोग निवारणाय॥”
  4. घी का दीपक जलाकर परिवार के सदस्यों के स्वस्थ रहने की प्रार्थना करें।

4. लक्ष्मी-कुबेर पूजा

  1. नए खरीदे बर्तन, सिक्के और आभूषण को धोकर चौकी पर रखें, उन पर रोली-अक्षत लगाएँ।
  2. माता लक्ष्मी को कमल/गुलाब, खील-बताशे और मिठाई अर्पित करें — “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः”।
  3. कुबेर मंत्र: “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥”
  4. धनिये के कुछ दाने तिजोरी या पर्स में रखें; बाकी धनिया बाद में गमले में बो दिया जाता है।
  5. आरती करें और प्रसाद बाँटें।

5. यम दीपदान (सूर्यास्त के बाद)

आटे या मिट्टी का चार मुख वाला दीपक सरसों के तेल से जलाएँ। घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके उसे अनाज की छोटी ढेरी पर रखें और यमराज से परिवार की रक्षा की प्रार्थना करें: “मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥” दीपक रखने के बाद उसे पीछे मुड़कर न देखें — यह लोक-परंपरा है।

धनतेरस की कथा (संक्षेप में)

मान्यता है कि समुद्र मंथन में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए, इसलिए इसे धन्वंतरि जयंती और “राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस” के रूप में भी मनाया जाता है। यम दीपदान से जुड़ी लोककथा में राजा हिम के पुत्र की पत्नी ने दीपों और आभूषणों का ढेर लगाकर रात भर कथा सुनाई, जिससे सर्प रूप में आए यमराज लौट गए — इसी से इस दिन दीप जलाने की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।

क्या खरीदें, क्या ध्यान रखें

  • ✅ पीतल-ताँबे के बर्तन, चाँदी का सिक्का, साबुत धनिया, झाड़ू, दीपक — अपनी क्षमता के अनुसार।
  • ✅ खाली बर्तन घर न लाएँ — उसमें मिठाई, चावल या पानी भरकर लाने की परंपरा है।
  • ❌ धन का प्रदर्शन या उधार लेकर महंगी खरीदारी इस पर्व का भाव नहीं है।
  • ❌ यम दीपक घर के अंदर न रखें; वह द्वार के बाहर ही जलाया जाता है।

इस पूजा से जुड़े उपयोगी पृष्ठ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनतेरस पर किसकी पूजा होती है? (Who is worshipped on Dhanteras?)

भगवान धन्वंतरि (आरोग्य), माता लक्ष्मी और कुबेर (समृद्धि) की पूजा होती है, और शाम को यमराज के लिए दीपदान किया जाता है।

धनतेरस पर धनिया क्यों खरीदते हैं? (Why buy coriander seeds?)

साबुत धनिया समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पूजा के बाद कुछ दाने तिजोरी में रखे जाते हैं और बाकी गमले में बोए जाते हैं।

यम दीपक किस दिशा में रखें? (Which direction for the Yama deepak?)

चार मुख वाला दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखा जाता है।

धनतेरस पर क्या नहीं खरीदना चाहिए? (What should not be bought?)

कई परिवार लोहे की धारदार वस्तुएँ और खाली बर्तन नहीं लाते। सबसे ज़रूरी बात — कर्ज़ लेकर दिखावे की खरीदारी न करें।

धनतेरस और धन्वंतरि जयंती एक ही दिन हैं? (Are Dhanteras and Dhanvantari Jayanti the same day?)

हाँ, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को ही धन्वंतरि जयंती मनाई जाती है, जिसे राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भी कहा जाता है।

यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।

🙏 इस जानकारी को परिवार व मित्रों से शेयर करें / Share

#PujaVidhi