गणेश चतुर्थी स्थापना पूजा विधि


गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इस दिन घरों और पंडालों में गणपति की मूर्ति स्थापित की जाती है, जो परिवार की परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पाँच, सात या दस दिन रहती है और अनंत चतुर्दशी को विसर्जित होती है। मूर्ति स्थापना चतुर्थी तिथि के मध्याह्न (दोपहर) काल में सबसे शुभ मानी जाती है।
📅 गणेश चतुर्थी 2027 कब है? शनिवार, 4 सितंबर 2027 ⏳ 311 दिन बाकी
इस पेज पर घर पर की जाने वाली पूरी पूजा विधि है। शुभ मुहूर्त, तिथि का समय और सही तारीख की पूरी जानकारी के लिए देखें: गणेश चतुर्थी 2027 कब है? →
गणेश चतुर्थी 2027 की तारीख और तिथि-समय गणेश चतुर्थी पेज पर देखें। नियमित गणेश पूजा के लिए श्री गणेश पूजा विधि देखें।
स्थापना के लिए सामग्री
- गणेश जी की मिट्टी की (इको-फ्रेंडली) मूर्ति — घर के लिए बैठी मुद्रा, बाईं ओर मुड़ी सूँड़
- चौकी, लाल/पीला कपड़ा, अक्षत, कलश, आम के पत्ते, नारियल
- 21 दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर, चंदन, जनेऊ, मौली, शमी पत्र
- 21 मोदक (उकडीचे मोदक या लड्डू), केले, नारियल, गुड़-चना
- मूर्ति ढकने के लिए कपड़ा (लाते समय मुख ढका रहता है), पुष्प माला, छतरी/मंडप सजावट
- घी का दीपक (अखंड दीपक की परंपरा हो तो), धूप, कपूर, घंटी
गणेश चतुर्थी स्थापना विधि — चरणबद्ध
- मूर्ति लाना: मूर्ति का मुख कपड़े से ढककर, “गणपति बाप्पा मोरया” के जयकारे के साथ घर लाएँ। द्वार पर आरती उतारकर स्वागत करें।
- स्थान: उत्तर-पूर्व (ईशान) कोण में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ, उस पर अक्षत की ढेरी रखकर मूर्ति स्थापित करें। बगल में जल भरा कलश रखें।
- संकल्प: हाथ में जल-अक्षत-फूल लेकर बताएँ कि गणपति कितने दिन विराजेंगे और परिवार की मनोकामना कहें।
- प्राण प्रतिष्ठा (सरल): मूर्ति का कपड़ा हटाकर दूर्वा से जल छिड़कें और प्रार्थना करें: “ॐ गं गणपतये नमः — हे गणेश, इस मूर्ति में विराजमान होकर हमारी पूजा स्वीकार करें।” विस्तृत वैदिक प्राण-प्रतिष्ठा के लिए आचार्य से कराएँ।
- षोडशोपचार का सरल क्रम: आवाहन → आसन (फूल) → पाद्य-अर्घ्य (जल) → स्नान (जल छिड़कना; मिट्टी की मूर्ति पर पंचामृत न डालें) → वस्त्र-जनेऊ → सिंदूर-चंदन → 21 दूर्वा → फूल-माला → धूप-दीप → नैवेद्य।
- 21 मोदक का भोग लगाएँ, साथ में केले और नारियल।
- मंत्र: “ॐ गं गणपतये नमः” 108 बार, गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ (यदि संभव हो)।
- आरती: “सुखकर्ता दुःखहर्ता” (मराठी परंपरा) या “जय गणेश जय गणेश देवा” आरती करें।
रोज़ की सेवा (स्थापना से विसर्जन तक)
- सुबह-शाम आरती, ताज़ी दूर्वा और फूल, और रोज़ नया भोग (मोदक, लड्डू, खीर)।
- मूर्ति को अकेला न छोड़ें — घर में कोई न कोई रहे, दीपक का ध्यान रखें।
- घर में सात्विक भोजन, लहसुन-प्याज से परहेज़ (परंपरा अनुसार)।
विसर्जन विधि
- विसर्जन के दिन उत्तर-पूजा करें — आरती, भोग और दही-चावल (शिदोरी) साथ बाँधें।
- भूल-चूक के लिए क्षमा माँगें: “गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ स्वस्थाने परमेश्वर, पुनरागमनाय च।”
- मूर्ति को घर में बाल्टी/टब या कृत्रिम कुंड में विसर्जित करना पर्यावरण के लिए सबसे अच्छा है; घुली मिट्टी गमलों में डाल दें।
- जयकारा: “गणपति बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या”।
चतुर्थी का चाँद क्यों नहीं देखते
मान्यता है कि चंद्रमा ने गणेश जी का उपहास किया था, इसलिए गणेश जी ने शाप दिया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की रात जो चंद्रमा देखेगा, उस पर झूठा कलंक लगेगा। भूल से दर्शन हो जाए तो स्यमंतक मणि की कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है।
इस पूजा से जुड़े उपयोगी पृष्ठ
- श्री गणेश पूजा विधि
- गणेश विसर्जन
- संकष्टी चतुर्थी तिथियाँ
- पूजा सामग्री की पूरी सूची
- सभी त्योहार व व्रत की तिथियाँ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्थापना कब करें? (When to install the idol?)
चतुर्थी तिथि के मध्याह्न (दोपहर) काल में स्थापना सबसे शुभ मानी जाती है। 2027 का समय गणेश चतुर्थी पेज पर देखें।
गणपति को कितने दिन रखें? (For how many days?)
परिवार की परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पाँच, सात या दस दिन — दस दिन वाले गणपति का विसर्जन अनंत चतुर्दशी को होता है।
गणपति को 21 मोदक का भोग क्यों? (Why 21 modaks?)
21 की संख्या गणेश पूजा में शुभ मानी जाती है — 21 दूर्वा और 21 मोदक चढ़ाने की परंपरा है।
घर पर इको-फ्रेंडली विसर्जन कैसे करें? (How to do eco-friendly visarjan?)
मिट्टी की मूर्ति को घर में बाल्टी या टब के पानी में विसर्जित करें और घुली मिट्टी गमलों या बगीचे में डाल दें।
गणेश चतुर्थी पर चाँद देख लिया तो क्या करें? (What if the moon is seen?)
परंपरा में स्यमंतक मणि की कथा सुनने या पढ़ने से मिथ्या कलंक का दोष दूर माना जाता है।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।