गंगा दशहरा पूजा विधि


गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। “दशहरा” का अर्थ है दस पापों का हरण — मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, पूजा और दान से मन, वाणी और शरीर से किए गए दस प्रकार के पाप नष्ट होते हैं। इसीलिए इस दिन की पूजा में दस की संख्या का विशेष महत्व है। (यह आश्विन की विजयादशमी “दशहरा” से अलग पर्व है।)
📅 गंगा दशहरा 2027 कब है? रविवार, 13 जून 2027 ⏳ 228 दिन बाकी
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी — 13 जून रात 2:45 से 14 जून रात 2:13 तक (IST)। सभी व्रत-त्योहार: हिंदू कैलेंडर →
गंगा दशहरा में “दस” का महत्व
| क्या | दस का प्रयोग |
|---|---|
| स्नान | गंगा में दस डुबकियाँ |
| दीपक | दस दीपक का दीपदान |
| पुष्प / फल | दस प्रकार के फूल, दस फल |
| दान | दस वस्तुओं का दान या दस ज़रूरतमंदों को दान |
दस पाप कौन-से हैं
- शरीर के तीन: बिना दिए किसी की वस्तु लेना, हिंसा, पर-स्त्री/पुरुष गमन
- वाणी के चार: कठोर वचन, झूठ, चुगली, व्यर्थ प्रलाप
- मन के तीन: दूसरे के धन की लालसा, दूसरों का बुरा सोचना, नास्तिकता / गलत दृष्टि
गंगा दशहरा का भाव है — इन दसों से बचने का संकल्प लेना।
गंगा दशहरा पूजा सामग्री
- माँ गंगा का चित्र या गंगाजल भरा कलश (घर पर पूजा के लिए)
- दस दीपक, घी, रुई; दस प्रकार के फूल, दस फल
- रोली, अक्षत, चंदन, मौली, धूप
- भोग: सत्तू, गुड़, मिठाई, शर्बत (गर्मी का मौसम होने से)
- दान के लिए: पानी भरा घड़ा, पंखा, छाता, सत्तू, फल, वस्त्र, अन्न
गंगा दशहरा पूजा विधि — चरणबद्ध
- स्नान: गंगा या किसी पवित्र नदी में दस डुबकियाँ लगाएँ। घर पर हों तो स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और माँ गंगा का स्मरण करें।
- संकल्प: हाथ में जल-अक्षत लेकर दस पापों से मुक्ति और सत्कर्म का संकल्प लें।
- गंगा पूजन: गंगा तट पर या घर में गंगाजल कलश के सामने रोली, अक्षत, दस प्रकार के फूल और दस फल अर्पित करें।
- मंत्र: “ॐ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः” — दस माला या 108 बार।
- दीपदान: शाम को दस दीपक जलाकर गंगा में प्रवाहित करें या घर के मंदिर में रखें।
- आरती: “ॐ जय गंगे माता” आरती करें।
- दान: गर्मी का मौसम होने से पानी भरा घड़ा, पंखा, छाता, सत्तू और शर्बत का दान विशेष पुण्यदायी माना जाता है। प्याऊ लगाना भी उत्तम सेवा है।
कथा
राजा भगीरथ के तप से ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरीं। उनके वेग को भगवान शिव ने अपनी जटाओं में धारण किया और फिर गंगा ने भगीरथ के पीछे चलकर राजा सगर के 60,000 पुत्रों का उद्धार किया। पूरी कथा और नियमित गंगा पूजा के लिए गंगा माता पूजा विधि देखें।
ध्यान रखें
- ✅ गंगा दशहरा को निर्जला एकादशी से एक दिन पहले पड़ने की संभावना रहती है — दोनों पर्वों की तैयारी साथ करें। निर्जला एकादशी पूजा विधि
- ❌ घाट पर भीड़ में सावधानी रखें; तैरना न आता हो तो गहरे पानी में न जाएँ।
- ❌ गंगा में साबुन, प्लास्टिक और पूजा का कचरा न डालें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गंगा दशहरा कब मनाया जाता है? (When is Ganga Dussehra?)
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को, जो प्रायः मई-जून में आती है।
गंगा दशहरा को दशहरा क्यों कहते हैं? (Why is it called Dussehra?)
“दश-हरा” यानी दस पापों का हरण — मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान से मन, वाणी और शरीर के दस पाप नष्ट होते हैं।
गंगा दशहरा पर क्या दान करें? (What to donate?)
पानी भरा घड़ा, पंखा, छाता, सत्तू, शर्बत, फल और अन्न — गर्मी को देखते हुए जल-सेवा विशेष पुण्यदायी है।
क्या गंगा दशहरा और विजयादशमी एक ही हैं? (Is it the same as Vijayadashami?)
नहीं, गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को और विजयादशमी (दशहरा) आश्विन शुक्ल दशमी को मनाई जाती है।
घर पर गंगा दशहरा की पूजा कैसे करें? (How to do the puja at home?)
स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें, गंगाजल कलश की पूजा करें, दस दीपक जलाएँ और दान करें।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।