गुरु पूर्णिमा पूजा विधि


गुरु पूर्णिमा आषाढ़ पूर्णिमा को मनाई जाती है। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन महाभारत और पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ। इस दिन अपने गुरु — आध्यात्मिक गुरु, शिक्षक, माता-पिता या जिनसे जीवन में मार्गदर्शन मिला — का पूजन और आभार व्यक्त किया जाता है।
📅 गुरु पूर्णिमा 2027 कब है? रविवार, 18 जुलाई 2027 ⏳ 263 दिन बाकी
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गुरु पूजन सामग्री
- गुरु का चित्र या पादुका (जहाँ गुरु प्रत्यक्ष न हों), महर्षि व्यास / भगवान विष्णु का चित्र
- चौकी, सफेद या पीला कपड़ा
- चंदन, रोली, अक्षत, फूलों की माला, पीले फूल, तुलसी दल
- फल, मिठाई, नारियल, पान-सुपारी
- गुरु-दक्षिणा (धन, वस्त्र, पुस्तक या सेवा का संकल्प)
- घी का दीपक, धूप
गुरु पूर्णिमा पूजा विधि — चरणबद्ध
- स्नान और संकल्प: सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और गुरु पूजन का संकल्प लें।
- व्यास पूजा: चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर गंध-अक्षत से बारह रेखाएँ बनाई जाती हैं (व्यास पीठ का प्रतीक)। महर्षि वेदव्यास, ब्रह्मा और शंकराचार्य आदि गुरु-परंपरा का स्मरण करें।
- गुरु वंदना: “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥”
- पादुका / चरण पूजन: गुरु प्रत्यक्ष हों तो उनके चरण धोकर चंदन, अक्षत, फूल अर्पित करें; न हों तो उनकी पादुका या चित्र का पूजन करें।
- माला और भोग: फूलों की माला पहनाएँ, फल-मिठाई अर्पित करें।
- गुरु मंत्र जप: यदि दीक्षा में गुरु मंत्र मिला हो तो उसका 108 बार जप करें; अन्यथा “ॐ गुरवे नमः”।
- गुरु-दक्षिणा: अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा दें — गुरु की सेवा, किसी शिक्षण संस्था को दान या किसी विद्यार्थी की सहायता भी गुरु-दक्षिणा मानी जाती है।
- आशीर्वाद: गुरु, माता-पिता और शिक्षकों को प्रणाम कर आशीर्वाद लें।
गुरु पूर्णिमा पर और क्या करें
- सत्यनारायण पूजा: पूर्णिमा होने से कई घरों में शाम को सत्यनारायण कथा होती है।
- दान: पुस्तकें, वस्त्र या अन्न का दान विशेष शुभ माना जाता है।
- स्वाध्याय: गीता, रामायण या गुरु के उपदेशों का पाठ और मनन।
- चातुर्मास: गुरु पूर्णिमा के आसपास से संन्यासी चार महीने एक स्थान पर रहकर प्रवचन करते हैं।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
महर्षि वेदव्यास ने वेदों को चार भागों में व्यवस्थित किया और महाभारत, श्रीमद्भागवत तथा पुराणों की रचना की — इसलिए उन्हें “आदि गुरु” माना जाता है। बौद्ध परंपरा में इसी दिन भगवान बुद्ध ने सारनाथ में पहला उपदेश दिया था। “गु” का अर्थ अंधकार और “रु” का अर्थ उसे दूर करने वाला — जो अज्ञान का अंधकार दूर करे, वही गुरु है।
खाटू श्याम भक्तों के लिए
श्याम भक्ति में बाबा श्याम को भी “हारे का सहारा” और मार्गदर्शक माना जाता है। कई भक्त गुरु पूर्णिमा पर श्याम मंदिर में भजन-कीर्तन और खाटू श्याम पूजा करते हैं।
इस पूजा से जुड़े उपयोगी पृष्ठ
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा क्यों कहते हैं? (Why is it called Vyasa Purnima?)
मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ, जिन्होंने वेदों का विभाजन और महाभारत की रचना की।
गुरु पूर्णिमा पर गुरु न हों तो किसकी पूजा करें? (Whom to worship without a guru?)
माता-पिता, शिक्षक, महर्षि व्यास, भगवान शिव या श्रीकृष्ण को गुरु रूप में पूजकर आभार व्यक्त किया जा सकता है।
गुरु वंदना का मंत्र क्या है? (What is the Guru vandana mantra?)
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥”
गुरु-दक्षिणा में क्या दें? (What to give as guru dakshina?)
अपनी क्षमता के अनुसार धन, वस्त्र या पुस्तक — या गुरु की सेवा और किसी ज़रूरतमंद विद्यार्थी की सहायता।
गुरु पूर्णिमा पर क्या दान करें? (What to donate?)
पुस्तकें, वस्त्र, अन्न और शिक्षा से जुड़ी सहायता विशेष शुभ मानी जाती है।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।