तुलसी पूजा विधि


हिंदू घरों में तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप और भगवान विष्णु की प्रिय माना जाता है। रोज़ सुबह जल अर्पण और शाम को दीपक — यही तुलसी पूजा का मूल है। कार्तिक मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व है और देवउठनी एकादशी या द्वादशी को तुलसी विवाह होता है। नीचे दैनिक पूजा और तुलसी विवाह — दोनों की विधि है।
📅 तुलसी विवाह 2026 कब है? शनिवार, 21 नवंबर 2026 ⏳ 24 दिन बाकी
इस पेज पर घर पर की जाने वाली पूरी पूजा विधि है। शुभ मुहूर्त, तिथि का समय और सही तारीख की पूरी जानकारी के लिए देखें: तुलसी विवाह 2026 कब है? →
2026 में तुलसी विवाह की तारीख तुलसी विवाह 2026 पेज पर देखें।
दैनिक तुलसी पूजा विधि
सुबह
- स्नान के बाद ताँबे के लोटे में जल लें (चाहें तो थोड़ा गंगाजल मिलाएँ)।
- सूर्योदय के बाद तुलसी की जड़ में जल अर्पित करें और मंत्र बोलें: “महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी। आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोऽस्तु ते॥”
- रोली या हल्दी का तिलक, अक्षत और फूल अर्पित करें।
- तुलसी की तीन या सात परिक्रमा करें।
शाम
सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास घी का दीपक जलाएँ। शाम को जल नहीं चढ़ाया जाता और पत्ते नहीं तोड़े जाते। कार्तिक मास में पूरे महीने शाम का दीपदान विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
तुलसी दल तोड़ने के नियम
- ❌ एकादशी, रविवार, द्वादशी, संक्रांति, अमावस्या-पूर्णिमा और सूर्यास्त के बाद तुलसी नहीं तोड़ी जाती — पूजा के लिए पहले से तोड़कर रख लें।
- ✅ पत्ते नाखून से नहीं, उँगलियों से धीरे से तोड़ें और तोड़ने से पहले प्रणाम करें।
- ✅ भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और हनुमान जी के भोग में तुलसी दल अवश्य रखें।
- ❌ भगवान गणेश और शिव जी को तुलसी सामान्यतः अर्पित नहीं की जाती।
- ✅ तुलसी सूख जाए तो उसे फेंकें नहीं — पवित्र नदी या गमले की मिट्टी में विसर्जित करें और नया पौधा लगाएँ।
तुलसी विवाह विधि
सामग्री
- तुलसी का गमला, शालिग्राम शिला या भगवान विष्णु/श्रीकृष्ण की छोटी प्रतिमा
- गन्ने के 4 डंडे (मंडप के लिए), आम के पत्ते, केले के पत्ते
- तुलसी के लिए लाल चुनरी, सुहाग सामग्री (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी)
- शालिग्राम के लिए पीला वस्त्र, जनेऊ, चंदन
- रोली, हल्दी, अक्षत, फूल, माला (दो), दीपक, धूप, नारियल
- भोग: मिठाई, सिंघाड़ा, बेर, शकरकंद, पंचामृत
विधि
- शाम को आँगन या छत पर तुलसी के गमले के चारों ओर गन्ने से मंडप बनाएँ और रंगोली सजाएँ।
- गमले को गेरू/हल्दी से सजाकर तुलसी जी को लाल चुनरी ओढ़ाएँ और सुहाग सामग्री अर्पित करें — जैसे दुल्हन का श्रृंगार।
- शालिग्राम या विष्णु प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराकर पीला वस्त्र पहनाएँ और तुलसी के दाहिनी ओर एक चौकी पर स्थापित करें।
- श्री गणेश का ध्यान करके संकल्प लें। दोनों को तिलक, फूल, धूप-दीप अर्पित करें।
- घर का कोई पुरुष शालिग्राम को हाथ में लेकर तुलसी की सात परिक्रमा कराता है — यही फेरों का प्रतीक है। कई परिवारों में मौली से गठबंधन भी किया जाता है।
- दोनों को माला पहनाएँ, मंगल गीत गाएँ, आरती करें और भोग लगाएँ।
- प्रसाद बाँटें। मान्यता है कि जिनकी कन्या नहीं है, वे तुलसी विवाह करके कन्यादान जैसा पुण्य पाते हैं।
तुलसी विवाह की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार असुरराज जालंधर की पत्नी वृंदा अत्यंत पतिव्रता थीं और उनके सतीत्व के कारण जालंधर अजेय था। देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने छल से वृंदा का व्रत भंग किया, जिससे जालंधर मारा गया। वृंदा ने विष्णु को पत्थर (शालिग्राम) होने का शाप दिया और स्वयं सती हो गईं; उनकी राख से तुलसी का पौधा उगा। विष्णु ने वरदान दिया कि तुलसी के बिना उनकी पूजा अधूरी रहेगी और शालिग्राम रूप में उनका विवाह तुलसी से होगा। इसी स्मृति में तुलसी विवाह मनाया जाता है।
इस पूजा से जुड़े उपयोगी पृष्ठ
- देवउठनी एकादशी पूजा विधि
- भगवान विष्णु पूजा विधि
- पूजा सामग्री की पूरी सूची
- सभी त्योहार व व्रत की तिथियाँ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तुलसी में जल कब चढ़ाना चाहिए? (When should water be offered to tulsi?)
सूर्योदय के बाद सुबह स्नान करके जल चढ़ाएँ। शाम को जल नहीं, केवल घी का दीपक जलाया जाता है।
किस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए? (On which days should tulsi not be plucked?)
एकादशी, रविवार, द्वादशी, संक्रांति, अमावस्या, पूर्णिमा और सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते।
तुलसी विवाह कब होता है? (When is Tulsi Vivah performed?)
कार्तिक शुक्ल एकादशी या द्वादशी को, देवउठनी एकादशी के आसपास। 2026 में यह 21 नवंबर को है।
तुलसी विवाह में शालिग्राम न हो तो क्या करें? (What if Shaligram is not available?)
भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की छोटी प्रतिमा या चित्र से भी तुलसी विवाह कराया जा सकता है।
क्या शिव जी को तुलसी चढ़ा सकते हैं? (Can tulsi be offered to Lord Shiva?)
परंपरा में शिव जी और गणेश जी को तुलसी अर्पित नहीं की जाती; शिव जी को बेलपत्र और गणेश जी को दूर्वा चढ़ाई जाती है।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।