देवउठनी एकादशी पूजा विधि


देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी) कार्तिक शुक्ल एकादशी को आती है। मान्यता है कि आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से चार महीने (चातुर्मास) योगनिद्रा में रहने के बाद इस दिन भगवान विष्णु जागते हैं। इसी दिन से विवाह जैसे मांगलिक कार्य फिर शुरू होते हैं, कई जगह तुलसी विवाह होता है, और खाटू धाम में इसी दिन बाबा श्याम का जन्मोत्सव बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
📅 देवउठनी एकादशी 2026 कब है? शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 ⏳ 23 दिन बाकी
इस पेज पर घर पर की जाने वाली पूरी पूजा विधि है। शुभ मुहूर्त, तिथि का समय और सही तारीख की पूरी जानकारी के लिए देखें: देवउठनी एकादशी 2026 — तारीख →
2026 में देवउठनी एकादशी की तारीख, तिथि-समय और पारण देवउठनी एकादशी 2026 पेज पर देखें। खाटू में इस दिन के उत्सव के लिए खाटू श्याम जन्मोत्सव पेज देखें।
पूजा सामग्री
- भगवान विष्णु / शालिग्राम या श्रीकृष्ण की प्रतिमा-चित्र, तुलसी का गमला
- पीला वस्त्र, पीले फूल, तुलसी दल (एक दिन पहले तोड़कर रखें — एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती)
- रोली, चंदन, अक्षत, मौली, धूप, घी का दीपक, शंख, घंटी
- मौसमी फल — सिंघाड़ा, गन्ना, शकरकंद, बेर, ऋतुफल; मिठाई, पंचामृत
- आँगन में चौक / भगवान के पदचिह्न बनाने के लिए गेरू और चावल का आटा
- गन्ने से मंडप (तुलसी विवाह करने वाले घरों में)
देवउठनी एकादशी पूजा विधि — चरणबद्ध
1. दशमी और व्रत का संकल्प
एक दिन पहले (दशमी) सात्विक भोजन करें। एकादशी को सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें। व्रत निर्जला, फलाहार या एक समय फलाहार — अपनी क्षमता के अनुसार रखें। चावल इस दिन नहीं खाए जाते।
2. घर को सजाना
आँगन या पूजा स्थान पर गेरू और आटे से चौक और भगवान के पदचिह्न बनाएँ। वहाँ सिंघाड़ा, गन्ना, शकरकंद और मौसमी फल रखकर उन्हें डलिया या परात से ढक दिया जाता है।
3. दिन की पूजा
- भगवान विष्णु को पंचामृत और जल से स्नान कराएँ, पीला वस्त्र, चंदन, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें।
- मंत्र जप: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” — 108 बार, या विष्णु सहस्रनाम का पाठ।
- धूप-दीप दिखाकर फल और मिठाई का भोग लगाएँ।
4. संध्या — देव जगाना (देवोत्थान)
शाम को घर के सभी सदस्य चौक के पास बैठें। शंख और घंटी बजाते हुए, थाली बजाकर भगवान को जगाया जाता है। प्रचलित मंत्र:
“उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥ उत्थिते चेष्टते सर्वम् उत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव।”
लोक-परंपरा में महिलाएँ गाती हैं — “उठो देव, बैठो देव, पाटकली चटकाओ देव…”। इसके बाद ढकी हुई डलिया हटाकर फल-सब्ज़ियों का भोग लगाया जाता है।
5. तुलसी विवाह (जहाँ परंपरा हो)
कई घरों में इसी शाम या अगले दिन (द्वादशी) गन्ने के मंडप में तुलसी जी का विवाह शालिग्राम भगवान से कराया जाता है। पूरी विधि तुलसी पूजा विधि में देखें।
6. रात्रि जागरण और पारण
रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन (द्वादशी) सुबह स्नान-पूजा के बाद ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को दान देकर पारण समय के भीतर व्रत खोलें।
खाटू श्याम जी से संबंध
श्याम भक्त कार्तिक शुक्ल एकादशी को बाबा श्याम का जन्मोत्सव मनाते हैं। इस दिन खाटू धाम में विशेष श्रृंगार, भजन संध्या और भारी भीड़ रहती है, और देश भर के श्याम मंदिरों में कीर्तन होते हैं। खाटू जाने की योजना हो तो दर्शन समय और ठहरने की व्यवस्था पहले देख लें। बाकी एकादशियों के लिए एकादशी कैलेंडर देखें।
व्रत के नियम
- ✅ एकादशी को चावल, मसूर, प्याज-लहसुन नहीं खाए जाते; सात्विक फलाहार करें।
- ✅ तुलसी दल एक दिन पहले तोड़कर रखें।
- ❌ द्वादशी को पारण समय निकलने के बाद व्रत न खोलें।
- ❌ बीमार, गर्भवती या बुज़ुर्ग कठोर निर्जला व्रत न रखें — फलाहार पर्याप्त है।
इस पूजा से जुड़े उपयोगी पृष्ठ
- तुलसी पूजा विधि (तुलसी विवाह)
- भगवान विष्णु पूजा विधि
- खाटू श्याम जन्मोत्सव 2026
- एकादशी कैलेंडर 2026
- पूजा सामग्री की पूरी सूची
- सभी त्योहार व व्रत की तिथियाँ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
देवउठनी एकादशी पर भगवान को कैसे जगाते हैं? (How is the Lord awakened?)
शाम को शंख, घंटी और थाली बजाकर “उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां…” मंत्र या लोकगीत “उठो देव बैठो देव” गाकर भगवान विष्णु को जगाया जाता है।
देवउठनी एकादशी पर क्या नहीं खाना चाहिए? (What should not be eaten?)
चावल, मसूर दाल, प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन नहीं खाया जाता। सिंघाड़ा, शकरकंद, फल और दूध से बना फलाहार लिया जाता है।
देवउठनी एकादशी के बाद शादी क्यों शुरू होती है? (Why do weddings start after this Ekadashi?)
चातुर्मास में भगवान विष्णु की योगनिद्रा के कारण मांगलिक कार्य रोके जाते हैं। उनके जागने के बाद विवाह आदि शुभ कार्य फिर शुरू होते हैं।
खाटू श्याम जी का जन्मदिन कब है? (When is Khatu Shyam Ji’s birthday?)
श्याम भक्त कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी को बाबा श्याम का जन्मोत्सव मनाते हैं। 2026 में यह 20 नवंबर को है।
क्या इस दिन तुलसी तोड़ सकते हैं? (Can tulsi leaves be plucked today?)
नहीं, एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती। पूजा के लिए तुलसी दल एक दिन पहले तोड़कर रख लें।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।