परशुराम जयंती पूजा विधि


परशुराम जयंती वैशाख शुक्ल तृतीया को भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है — यही दिन अक्षय तृतीया भी है। परशुराम जी ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे। उन्हें भगवान शिव से परशु (फरसा) प्राप्त हुआ, इसी से उनका नाम “परशुराम” पड़ा। वे उन आठ चिरंजीवियों में माने जाते हैं जो आज भी जीवित हैं। चूँकि उनका जन्म प्रदोष काल में माना जाता है, कई पंचांग जयंती की तिथि प्रदोष व्यापिनी तृतीया से तय करते हैं — इसलिए कभी-कभी यह अक्षय तृतीया से एक दिन पहले पड़ती है।
📅 परशुराम जयंती 2027 कब है? शनिवार, 8 मई 2027 ⏳ 192 दिन बाकी
प्रदोष काल में तृतीया 8 मई को है (8 मई सुबह 11:43 से 9 मई सुबह 9:04 तक), इसलिए जयंती अक्षय तृतीया (9 मई) से एक दिन पहले। सभी व्रत-त्योहार: हिंदू कैलेंडर →
भगवान परशुराम — संक्षिप्त परिचय
- ब्राह्मण कुल में क्षत्रिय स्वभाव: वे भृगुवंशी ब्राह्मण थे, पर शस्त्र-विद्या में अद्वितीय थे।
- गुरु: भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण को उन्होंने ही शस्त्र-विद्या सिखाई।
- रामायण में: सीता स्वयंवर में शिव धनुष टूटने पर वे आए और श्रीराम से संवाद के बाद वन को लौट गए।
- भूमि दान: कथा के अनुसार उन्होंने अपनी जीती हुई पृथ्वी ऋषि कश्यप को दान कर दी और स्वयं महेंद्र पर्वत पर तप करने चले गए।
पूजा सामग्री
- भगवान परशुराम का चित्र (या विष्णु जी का चित्र)
- चंदन, रोली, अक्षत, पीले/लाल फूल, तुलसी दल
- घी का दीपक, धूप, कपूर
- भोग: फल, मिठाई, सत्तू, गुड़
- दान के लिए: अन्न, जल-कलश, वस्त्र
पूजा विधि — चरणबद्ध
- स्नान व संकल्प: प्रातः स्नान कर व्रत या पूजा का संकल्प लें।
- स्थापना: चौकी पर वस्त्र बिछाकर परशुराम जी का चित्र स्थापित करें।
- पूजन: चंदन, अक्षत, फूल और तुलसी दल अर्पित करें; दीपक और धूप जलाएँ।
- मंत्र: “ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि। तन्नो परशुराम प्रचोदयात्॥” (परशुराम गायत्री) का 108 बार जप करें।
- कथा व पाठ: परशुराम जी के जीवन की कथा पढ़ें; विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- भोग व आरती: भोग लगाकर आरती करें।
- प्रदोष पूजा: शाम को प्रदोष काल में दीपक जलाकर पुनः स्मरण करें।
- दान: अन्न, जल-कलश और वस्त्र का दान करें।
उत्सव की परंपराएँ
ब्राह्मण समाज के संगठन इस दिन कई शहरों में शोभा यात्राएँ, हवन और सम्मान समारोह करते हैं। केरल और कोंकण क्षेत्र में परशुराम जी को इन भूभागों का संस्थापक माना जाता है। अरुणाचल प्रदेश का परशुराम कुंड भी उनसे जुड़ा प्रसिद्ध तीर्थ है।
विष्णु के अन्य अवतारों की पूजा: नृसिंह जयंती, राम नवमी, कृष्ण पूजा विधि।
इस पूजा से जुड़े उपयोगी पृष्ठ
- अक्षय तृतीया पूजा विधि
- भगवान विष्णु पूजा विधि
- पूजा सामग्री की पूरी सूची
- सभी त्योहार व व्रत की तिथियाँ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
परशुराम जयंती कब मनाई जाती है? (When is Parshuram Jayanti?)
वैशाख शुक्ल तृतीया को। प्रदोष व्यापिनी तिथि के कारण कभी-कभी यह अक्षय तृतीया से एक दिन पहले पड़ती है।
भगवान परशुराम किसके अवतार हैं? (Whose avatar is Parshuram?)
वे भगवान विष्णु के दस अवतारों में छठे अवतार माने जाते हैं।
परशुराम जी का मंत्र क्या है? (Parshuram mantra)
परशुराम गायत्री: “ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि। तन्नो परशुराम प्रचोदयात्॥”
परशुराम जी के माता-पिता कौन थे? (Who were his parents?)
ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका।
क्या परशुराम जी चिरंजीवी हैं? (Is Parshuram immortal?)
हाँ, परंपरा में उन्हें अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और मार्कंडेय के साथ आठ चिरंजीवियों में गिना जाता है।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।