अक्षय तृतीया पूजा विधि


अक्षय तृतीया (आखा तीज) वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। “अक्षय” का अर्थ है जिसका क्षय न हो — मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप, पूजा और शुभ कार्य का फल अक्षय रहता है। इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है, यानी विवाह, गृह प्रवेश या नया कार्य शुरू करने के लिए अलग से मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं समझी जाती। राजस्थान में आखा तीज पर बड़ी संख्या में विवाह होते हैं।
📅 अक्षय तृतीया 2027 कब है? रविवार, 9 मई 2027 ⏳ 193 दिन बाकी
वैशाख शुक्ल तृतीया — 8 मई सुबह 11:43 से 9 मई सुबह 9:04 तक (IST)। पूजा 9 मई सुबह 9:04 से पहले श्रेष्ठ। सभी व्रत-त्योहार: हिंदू कैलेंडर →
अक्षय तृतीया का महत्व — प्रमुख मान्यताएँ
- भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का जन्म — परशुराम जयंती पूजा विधि
- बद्रीनाथ धाम के कपाट प्रायः इसी समय खुलते हैं; वृंदावन में बांके बिहारी जी के चरण दर्शन वर्ष में केवल इसी दिन होते हैं।
- जैन परंपरा में भगवान ऋषभदेव ने इसी दिन गन्ने के रस से वर्षीतप का पारणा किया था।
- मान्यता है कि इसी दिन माँ गंगा का अवतरण हुआ और त्रेता युग आरंभ हुआ।
पूजा सामग्री
- भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी का चित्र, पीला वस्त्र
- चंदन, अक्षत (साबुत चावल), पीले फूल, तुलसी दल
- जौ या गेहूँ, सत्तू, चने की दाल, ककड़ी/खीरा, गुड़ — इस पर्व का पारंपरिक भोग
- घी का दीपक, धूप, जल भरा कलश
- दान के लिए: जल भरा मिट्टी का घड़ा, पंखा, छाता, सत्तू, फल, अन्न
पूजा विधि — चरणबद्ध
- स्नान व संकल्प: प्रातः स्नान (संभव हो तो गंगाजल मिलाकर) कर संकल्प लें।
- विष्णु-लक्ष्मी पूजन: चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर प्रतिमा रखें; चंदन, अखंड अक्षत, पीले फूल, तुलसी दल अर्पित करें।
- भोग: जौ/सत्तू, चने की दाल, गुड़, ककड़ी और मौसमी फल का भोग लगाएँ।
- मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः” का जप।
- आरती: विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें — विस्तार: लक्ष्मी पूजा विधि, विष्णु पूजा विधि।
- दान: वैशाख की गर्मी में जल भरा घड़ा (उदकुंभ), सत्तू, पंखा, छाता, जूते का दान इस दिन की विशेष परंपरा है।
- पितृ तर्पण: कई परिवार इस दिन पितरों के निमित्त जल और तिल से तर्पण भी करते हैं।
सोना खरीदना — शास्त्र और चलन
अक्षय तृतीया पर सोना-चाँदी खरीदने का चलन आधुनिक समय में बहुत बढ़ा है, लेकिन शास्त्रों में इस दिन का मुख्य फल दान, जप और सत्कर्म से जुड़ा बताया गया है। खरीदारी अपनी क्षमता के अनुसार ही करें; न खरीद सकें तो भी पूजा और दान का पुण्य पूरा है।
ध्यान रखें
- ✅ विवाह/गृह प्रवेश के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है, फिर भी अपने पुरोहित से पंचांग शुद्धि पूछ लें।
- ❌ बाल विवाह कानूनन अपराध है — आखा तीज पर होने वाले ऐसे विवाह की सूचना 1098 (चाइल्डलाइन) या पुलिस को दें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अक्षय तृतीया कब होती है? (When is Akshaya Tritiya?)
वैशाख शुक्ल तृतीया को, जो प्रायः अप्रैल-मई में आती है। राजस्थान में इसे आखा तीज कहते हैं।
अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त क्यों कहते हैं? (Why is it called Abujh Muhurat?)
क्योंकि मान्यता है कि पूरा दिन शुभ होता है और विवाह, गृह प्रवेश या नए कार्य के लिए अलग मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
अक्षय तृतीया पर क्या दान करें? (What to donate?)
जल भरा घड़ा, सत्तू, जौ, गुड़, पंखा, छाता, जूते और अन्न — गर्मी के मौसम से जुड़ी वस्तुओं का दान विशेष माना गया है।
क्या अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना ज़रूरी है? (Is buying gold necessary?)
नहीं। यह प्रचलित रिवाज़ है, पर शास्त्रीय महत्व दान, जप और पूजा का है। क्षमता अनुसार ही खरीदें।
अक्षय तृतीया पर किस भगवान की पूजा करें? (Which deity to worship?)
भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की; साथ ही परशुराम जयंती होने से परशुराम जी का स्मरण भी किया जाता है।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।