Home एकादशी कैलेंडर आमलकी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

आमलकी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

संक्षेप में: आमलकी एकादशी 2027 — बृहस्पतिवार, 18 मार्च 2027 (141 दिन बाद)। पारण: शुक्रवार, 19 मार्च 2027, सुबह 7:12 से 8:57 बजे तक (जयपुर)। इस दिन खाटू श्याम जी मंदिर में भारी भीड़ रहती है। अगली एकादशी: पापमोचिनी एकादशी — शुक्रवार, 2 अप्रैल 2027। दर्शन समय →
📅 दिनांक मार्च 25, 2026 (बुधवार)
🗓️ तिथि फाल्गुन, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ मार्च 24, 11:11 PM
⏰ समाप्त मार्च 25, 09:28 PM

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में वैदिशा नगरी में राजा चैत्ररथ नामक एक धर्मात्मा राजा राज्य करते थे। उनकी प्रजा भी अत्यंत धार्मिक और भगवान विष्णु की भक्त थी।

एक बार फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन पूरे राज्य में आमलकी एकादशी का व्रत रखा गया। राजा और प्रजा ने मिलकर भगवान विष्णु तथा आंवला वृक्ष की पूजा की और रात्रि जागरण किया।

उसी रात एक शिकारी, जो जीवन भर हिंसा और पाप कर्मों में लिप्त रहा था, वहां पहुंच गया। भूख और थकान के कारण वह मंदिर के पास बैठ गया और अनजाने में पूरी रात भगवान विष्णु की कथा सुनता रहा तथा जागरण करता रहा।

उससे अनजाने में आमलकी एकादशी का व्रत हो गया।

जब उसकी मृत्यु हुई तो भगवान विष्णु की कृपा से उसे श्रेष्ठ लोकों की प्राप्ति हुई। अगले जन्म में वह एक धर्मपरायण और पराक्रमी राजा बना। अंततः उसे मोक्ष प्राप्त हुआ।

इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि भगवान विष्णु की भक्ति और आमलकी एकादशी का व्रत अनजाने में भी किया जाए तो उसका महान पुण्य प्राप्त होता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आमलकी एकादशी किस देवता को समर्पित है?▾
आमलकी एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है।
आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है?▾
शास्त्रों के अनुसार आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु और अन्य देवताओं का निवास माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा का विशेष महत्व है।
आमलकी एकादशी की कथा किससे संबंधित है?▾
यह कथा वैदिशा नगरी के राजा चैत्ररथ और एक शिकारी से संबंधित है।
क्या महिलाएं आमलकी एकादशी का व्रत कर सकती हैं?▾
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों यह व्रत कर सकते हैं।
क्या आमलकी एकादशी पर चावल खा सकते हैं?▾
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?▾
द्वादशी तिथि में निर्धारित पारण समय के भीतर करना चाहिए।
आमलकी एकादशी का मुख्य फल क्या है?▾
भगवान विष्णु की कृपा, पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति।
क्या आंवला दान करना शुभ माना जाता है?▾
हाँ, आमलकी एकादशी पर आंवला, अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान शुभ माना जाता है।
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